मोदी 3.0 कैबिनेट विस्तार: ‘एक व्यक्ति-एक पद’ फॉर्मूले से कटेगा कई दिग्गजों का पत्ता, जानें कब तय हुई है ‘मुहूर्त’ की तारीख

नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल (मोदी 3.0) के पहले बड़े मंत्रिमंडल विस्तार की स्क्रिप्ट पूरी तरह तैयार हो चुकी है। किसे प्रमोट करना है, किसका विभाग बदलना है, किसकी छुट्टी करनी है और किन नए चेहरों को लाकर चौंकाना है-सब कुछ तय हो चुका है। इस बार के फेरबदल में ‘महिलाएं, युवा और पिछड़ा वर्ग’ मुख्य फोकस रहने वाले हैं।
आइए समझते हैं कि यह बड़ा फेरबदल कब होने जा रहा है और इस बार मोदी कैबिनेट का क्या पैटर्न रहने वाला है।
1. कब होगा मंत्रिमंडल विस्तार? ये हैं दो संभावित तारीखें
पीएम मोदी और राष्ट्रपति के व्यस्त शेड्यूल को देखते हुए मंत्रिमंडल विस्तार के लिए दो ही मौके बनते दिख रहे हैं:
- पहला मौका (5 जुलाई): 30 जून से 3 जुलाई के बीच राष्ट्रपति का आंध्र प्रदेश दौरा और जापानी पीएम का भारत दौरा है। 4 जुलाई को पीएम मोदी राजस्थान में होंगे। ऐसे में 5 जुलाई का दिन पूरी तरह खाली है, जब यह विस्तार हो सकता है।
- दूसरा और मजबूत मौका (11 से 20 जुलाई के बीच): 6 से 11 जुलाई तक पीएम मोदी विदेशी दौरे पर रहेंगे। संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने की संभावना है।
पुरानी टाइमलाइन से समझें: साल 2021 में भी मॉनसून सत्र शुरू होने से ठीक एक हफ्ता पहले (7 जुलाई को) कैबिनेट में बड़ा फेरबदल हुआ था, जिसमें रविशंकर प्रसाद और प्रकाश जावड़ेकर जैसे दिग्गजों को हटा दिया गया था। इस बार भी मॉनसून सत्र से ठीक पहले (11 से 20 जुलाई के बीच) नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है।
2. ‘एक व्यक्ति, एक पद’ नीति: इन बड़े चेहरों की हो सकती है छुट्टी
बीजेपी संगठन और सरकार में संतुलन बनाने के लिए कई मौजूदा मंत्रियों को संगठन की जिम्मेदारी दी जा रही है, जिससे उनके इस्तीफे तय माने जा रहे हैं..
- पंकज चौधरी (वित्त राज्य मंत्री): इन्हें यूपी बीजेपी का अध्यक्ष बनाया जा चुका है। 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव पर फोकस करने के लिए इनकी मंत्री पद से छुट्टी हो सकती है।
- हर्ष मल्होत्रा (सहकारिता राज्य मंत्री): इन्हें दिल्ली बीजेपी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जिसके चलते ‘एक व्यक्ति एक पद’ के तहत इनकी कुर्सी खाली होगी।
- जॉर्ज कुरियन (अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री): ये पहले ही 23 जून को अपना इस्तीफा सौंप चुके हैं, जिससे एक सीट पहले ही खाली है।
- रवनीत सिंह बिट्टू (रेल राज्य मंत्री): 21 जून को इनका राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो चुका है और इस बार इन्हें दोबारा राज्यसभा नहीं भेजा गया। इन्हें पंजाब के आगामी चुनावों के लिए पूरी तरह फ्री किया जा सकता है।
3. यूपी मॉडल और चुनावी राज्यों पर रहेगा पूरा फोकस
इस बार मोदी कैबिनेट के विस्तार में आगामी विधानसभा चुनावों (यूपी, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा, मणिपुर, हिमाचल प्रदेश और गुजरात) का पूरा असर दिखेगा। इसका एक बड़ा ट्रेलर हाल ही में यूपी बीजेपी की टीम में देखने को मिला है, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर भी लागू किया जाएगा:
संभावित सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूला
- पिछड़ा वर्ग (OBC): लगभग 47% सीटों पर प्रतिनिधित्व की उम्मीद।
- महिलाएं और युवा: संगठन की नई टीम की तरह कैबिनेट में भी महिलाओं को करीब 20% और युवाओं को विशेष तरजीह दी जाएगी।
- एससी-एसटी (SC/ST): करीब 13% पदों पर दलित और आदिवासी चेहरों को मौका मिल सकता है।
मोदी 3.0 का यह पहला विस्तार केवल मंत्रियों को बदलने के लिए नहीं, बल्कि 2027 और उसके बाद के चुनावी चक्र को ध्यान में रखकर किया जा रहा है, जिसमें कुछ बेहद चौंकाने वाले नए चेहरों की एंट्री होना तय है।

