बांग्लादेश और पाकिस्तान की बढ़ती दोस्ती, क्या भारत के लिए नई कूटनीतिक चुनौती?

Bangladesh India Relations: बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की पहली विदेश यात्रा ने दक्षिण एशिया की कूटनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है। पद संभालने के करीब चार महीने बाद तारिक रहमान ने विदेश दौरे की शुरुआत भारत से नहीं, बल्कि मलेशिया और चीन से की। चीन यात्रा के दौरान उन्होंने राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की, जिसके बाद क्षेत्रीय राजनीति में इसके असर को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

तारिक रहमान की पहली विदेश यात्रा को लेकर पहले कई तरह की अटकलें थीं। माना जा रहा था कि वह भारत, चीन या सऊदी अरब जैसे किसी अहम साझेदार देश का दौरा कर सकते हैं। लेकिन आखिरकार उन्होंने मलेशिया और चीन को चुना। इस फैसले को बांग्लादेश की नई सरकार की विदेश नीति के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

बांग्लादेश और भारत के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध काफी मजबूत रहे हैं। 1971 के मुक्ति संग्राम के बाद दोनों देशों के रिश्तों में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। इसके बावजूद हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद सामने आए हैं।

तारिक रहमान की चीन यात्रा ऐसे समय हुई है, जब भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है। चीन लंबे समय से बांग्लादेश में निवेश, बुनियादी ढांचे और व्यापार के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश करता रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन बांग्लादेश के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार है, जबकि बांग्लादेश अपनी विदेश नीति में कई देशों के साथ संतुलन बनाकर चलना चाहता है।

तारिक रहमान की विदेश यात्रा से कुछ दिन पहले भारत के नए उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी बांग्लादेश पहुंचे थे। भारत और बांग्लादेश के करीब 55 साल के राजनयिक संबंधों में यह भी एक अहम बदलाव माना गया, क्योंकि पहली बार भारत ने किसी राजनीतिक व्यक्ति को ढाका में अपना प्रतिनिधि बनाया।

ढाका पहुंचने के बाद दिनेश त्रिवेदी ने लोकप्रिय गायक भूपेन हजारिका के एक गीत का हवाला देते हुए कहा कि दोनों देशों का “आसमान एक है और हवा भी एक है”। हालांकि, बांग्लादेश में इस टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हो गया। कुछ लोगों ने इसे “अखंड भारत” जैसी अवधारणाओं से जोड़कर देखा और आलोचना की।

भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तनाव का एक बड़ा कारण सीमा से जुड़े मुद्दे हैं। बांग्लादेश ने आरोप लगाया है कि भारत कथित तौर पर लोगों को जबरन सीमा पार भेज रहा है। इसे “पुश-बैक” या “पुश-इन” कहा जा रहा है।

इस मुद्दे को लेकर दोनों देशों के सीमा सुरक्षा बलों के बीच बैठक भी हुई, लेकिन कोई बड़ा समाधान सामने नहीं आया।

बांग्लादेश के अधिकारियों का कहना है कि इन घटनाओं ने रिश्तों में बनी सकारात्मकता को नुकसान पहुंचाया है। वहीं भारत का कहना है कि सीमा सुरक्षा और अवैध गतिविधियों को रोकना उसकी जिम्मेदारी है।

शेख हसीना सरकार के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश और पाकिस्तान के संबंधों में बदलाव देखने को मिला। दोनों देशों के बीच संपर्क बढ़ा है और कई क्षेत्रों में सहयोग की कोशिशें हुई हैं।

पाकिस्तान के वरिष्ठ अधिकारियों की बांग्लादेश यात्राएं, व्यापार बढ़ाने की पहल और दोनों देशों के बीच सीधी उड़ान शुरू करने की योजना को इसी बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है।

भारत के कुछ रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान बांग्लादेश में अपना प्रभाव दोबारा बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, उनका यह भी कहना है कि दोनों देशों के बीच रक्षा और रणनीतिक सहयोग की अपनी सीमाएं हैं।

भारतीय अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान की कोशिश केवल राजनीतिक स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि वह शिक्षा, संस्कृति और व्यापार के जरिए भी संबंध मजबूत करना चाहता है।

भारत का मानना है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई पहले बांग्लादेश के सैन्य और प्रशासनिक ढांचे में प्रभाव रखती थी और अब वह दोबारा अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर सकती है।

हालांकि, बांग्लादेश के कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि ढाका केवल अपनी विदेश नीति को विविध बनाना चाहता है और किसी एक देश के प्रभाव में नहीं आना चाहता।

भारत के कई नीति विशेषज्ञ बांग्लादेश और पाकिस्तान के संबंधों को 1971 के इतिहास के नजरिए से देखते हैं। बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तान की सेना की भूमिका दोनों देशों के रिश्तों में आज भी संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है।

यही वजह है कि भारत में कई लोग मानते हैं कि पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच गहरी दोस्ती लंबे समय तक टिकना आसान नहीं होगा।

विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत के लिए सबसे जरूरी है कि वह बांग्लादेश के साथ अपने पुराने संबंधों को मजबूत बनाए रखे। भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार, ऊर्जा, परिवहन और सुरक्षा के क्षेत्र में लंबे समय से सहयोग रहा है।

जानकारों का कहना है कि भारत को बांग्लादेश की घरेलू राजनीति से अलग रहते हुए आर्थिक और कूटनीतिक स्तर पर संबंधों को आगे बढ़ाना होगा।

दूसरी ओर, बांग्लादेश भी यह समझता है कि भारत उसके लिए एक बड़ा आर्थिक और क्षेत्रीय साझेदार है। ऐसे में आने वाले समय में ढाका को चीन, पाकिस्तान और भारत के बीच संतुलन बनाकर चलने की चुनौती होगी।

तारिक रहमान की पहली विदेश यात्रा ने यह साफ संकेत दिया है कि बांग्लादेश अपनी नई विदेश नीति में कई विकल्प खुले रखना चाहता है। चीन और पाकिस्तान के साथ बढ़ती नजदीकी के बीच भारत के साथ संबंधों का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि दोनों देश आपसी मतभेदों को किस तरह संभालते हैं।

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