मिशन 2027 के लिए BJP की नई फौज तैयार, जानें किसका दबदबा

लखनऊ: उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने करीब छह महीने के लंबे इंतजार के बाद अपनी नई संगठनात्मक टीम का ऐलान कर दिया है। नई टीम में 19 उपाध्यक्ष, 8 महामंत्री, 18 मंत्री, 6 क्षेत्रीय अध्यक्ष, मुख्य प्रवक्ता और विभिन्न मोर्चों के अध्यक्षों की नियुक्ति की गई है। भाजपा ने इस टीम के जरिए साफ संकेत दिया है कि उसकी नजर अब 2027 के विधानसभा चुनाव पर है और संगठन को उसी रणनीति के तहत तैयार किया गया है।

नई टीम में सबसे खास बात यह है कि भाजपा ने समाजवादी पार्टी के PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फॉर्मूले की काट निकालने के लिए पिछड़े और दलित वर्ग के नेताओं को बड़ी जिम्मेदारियां दी हैं। साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और संगठन महामंत्री धर्मपाल की पसंद का प्रभाव भी टीम में स्पष्ट दिखाई दे रहा है।

भाजपा की नई टीम को देखकर राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि उत्तर प्रदेश में सरकार के बाद अब संगठन पर भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पकड़ और मजबूत हुई है। टीम में योगी के करीबी नेताओं को प्रमुख जिम्मेदारियां मिली हैं। वहीं संघ की सिफारिशों को भी काफी महत्व दिया गया है।

संगठन महामंत्री धर्मपाल इस पूरी कवायद में अहम भूमिका निभाते नजर आए। सूत्रों के अनुसार टीम गठन से पहले कई दौर की बैठकों में क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों पर विस्तार से चर्चा हुई, जिसके बाद अंतिम सूची तैयार की गई।

भाजपा संगठन की दृष्टि से क्षेत्रीय अध्यक्षों का पद बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट वितरण की प्रारंभिक जिम्मेदारी इन्हीं के पास होती है। इस बार घोषित छह क्षेत्रीय अध्यक्षों में चार OBC और दो सवर्ण नेताओं को मौका दिया गया है।

  • गोरखपुर क्षेत्र – विनोद राय
  • अवध क्षेत्र – अवधेश द्विवेदी
  • काशी क्षेत्र – अशोक चौरसिया
  • कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र – शिवदयाल साहू
  • ब्रज क्षेत्र – पूरन लाल लोधी
  • पश्चिम क्षेत्र – नवाब सिंह नागर

विनोद राय को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का करीबी माना जाता है। वहीं अवधेश द्विवेदी और शिवदयाल साहू संघ के प्रभावशाली पदाधिकारियों की पसंद बताए जाते हैं। अशोक चौरसिया, पूरन लाल लोधी और नवाब सिंह नागर के जरिए भाजपा ने OBC समाज को स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है।

नई टीम में आठ महामंत्री बनाए गए हैं। इनमें संजय राय का नाम सबसे चर्चित माना जा रहा है। संजय राय पहले भी संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं और पार्टी नेतृत्व के भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते हैं।

इसके अलावा:

  • राजेश चौधरी
  • अभिजात मिश्रा
  • दिलीप पटेल
  • गीता शाक्य

जैसे नेताओं को भी महामंत्री बनाया गया है। राजेश चौधरी जाट समाज से आते हैं, जबकि अभिजात मिश्रा ब्राह्मण समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। दिलीप पटेल कुर्मी समाज से जुड़े हैं और गीता शाक्य OBC वर्ग की प्रमुख महिला नेता मानी जाती हैं।

भाजपा ने 19 उपाध्यक्षों की सूची में भी जातीय संतुलन साधने का प्रयास किया है। इनमें:

  • 7 OBC नेता
  • 10 सामान्य वर्ग के नेता
  • 2 अनुसूचित जाति वर्ग के नेता

को शामिल किया गया है।

पूर्व मंत्री सुरेश राणा को उपाध्यक्ष बनाकर पार्टी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपना संदेश देने की कोशिश की है। 2022 का चुनाव हारने के बाद सुरेश राणा की संगठन में यह बड़ी वापसी मानी जा रही है।

वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे नीरज सिंह को भी संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देकर भाजपा ने एक बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है।

समाजवादी पार्टी से अलग होकर भाजपा के करीब आईं पूजा पाल को भी उपाध्यक्ष बनाया गया है। कौशांबी की राजनीति में उनका प्रभाव माना जाता है।

इसके अलावा बदायूं से लोकसभा चुनाव लड़ चुके दुर्विजय शाक्य को भी संगठन में अहम जिम्मेदारी देकर भाजपा ने शाक्य समाज को साधने की कोशिश की है।

भाजपा ने युवा और महिला संगठनों में भी सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखा है।

  • रोहित मिश्रा को युवा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है।
  • सरोज कुशवाहा को महिला मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है।
  • मिश्रिख सांसद अशोक रावत को अनुसूचित मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है।

इन नियुक्तियों के जरिए भाजपा ने OBC और दलित समुदायों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने का संकेत दिया है।

PDA की काट या मिशन 2027 की तैयारी?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा की यह नई टीम केवल संगठनात्मक बदलाव नहीं बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीतिक तैयारी का हिस्सा है। समाजवादी पार्टी लगातार PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) राजनीति को मजबूत करने में जुटी है। ऐसे में भाजपा ने OBC और दलित चेहरों को प्रमुख पद देकर उस रणनीति का जवाब देने की कोशिश की है।

साथ ही क्षेत्रीय संतुलन, जातीय प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक अनुभव का मिश्रण बनाकर भाजपा ने चुनावी मशीनरी को पहले से ज्यादा सक्रिय करने का प्रयास किया है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में संगठन की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है। भाजपा की नई टीम में योगी आदित्यनाथ, संघ और संगठन के प्रभाव का संतुलन देखने को मिला है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह नई टीम 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को फिर से बड़ी जीत दिलाने में सफल होगी या विपक्ष की चुनौतियां पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी करेंगी। आने वाले महीनों में इसका असर प्रदेश की राजनीति में साफ दिखाई देगा।

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