वेनेजुएला भूकंप के बाद आफ्टरशॉक का अलर्ट, जानिए क्यों आते हैं ये झटके

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कारकास/नई दिल्ली. वेनेजुएला और जापान में आए विनाशकारी भूकंपों ने इस समय पूरी दुनिया को खौफ में डाल दिया है। वेनेजुएला में प्रकृति के डबल अटैक (7.2 और 7.5 तीव्रता) ने गगनचुंबी इमारतों को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया है, जिसके बाद देश में आपातकाल लगा हुआ है। लेकिन असली संकट अभी टला नहीं है।

भूकंप वैज्ञानिकों (Seismologists) ने चेतावनी जारी की है कि अगले कुछ दिनों या हफ्तों तक वेनेजुएला को आफ्टरशॉक्स (Aftershocks) का सामना करना पड़ सकता है। यह स्थिति मलबे में दबे लोगों को निकालने में जुटी राहत और बचाव टीमों (NDRF/Rescuers) के लिए काल बन सकती है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर आफ्टरशॉक क्या होते हैं और ये मुख्य भूकंप से भी ज़्यादा ख़तरनाक क्यों माने जाते हैं।

जब किसी क्षेत्र में एक बहुत बड़ा और मुख्य भूकंप (Mainshock) आता है, तो उसके बाद उसी फॉल्ट लाइन या दायरे में कई दिनों, हफ्तों या महीनों तक लगातार आने वाले छोटे-छोटे भूकंपीय झटकों को आफ्टरशॉक कहा जाता है।

इसके पीछे विशुद्ध भूगर्भीय विज्ञान (Geology) काम करता है…

  • टेक्टोनिक प्लेट्स का टकराव: पृथ्वी के नीचे मौजूद टेक्टोनिक प्लेट्स जब आपस में टकराती हैं या टूटती हैं, तो मुख्य भूकंप आता है।
  • चट्टानों का री-एडजस्टमेंट (Re-adjustment): मुख्य झटके के बाद धरती के अंदर की चट्टानें तुरंत शांत नहीं होतीं। वे खुद को दोबारा व्यवस्थित करने का प्रयास करती हैं।
  • इसी री-एडजस्टमेंट की प्रक्रिया में चट्टानें रुक-रुक कर थोड़ी और खिसकती हैं, जिससे सतह पर बार-बार झटके महसूस होते हैं।

भले ही आफ्टरशॉक की तीव्रता मुख्य भूकंप से कम होती है, लेकिन आपदा के समय ये तीन कारणों से ‘साइलेंट किलर’ साबित होते हैं:

  1. कमजोर इमारतों का गिरना: मुख्य भूकंप के कारण जो इमारतें पहले ही जर्जर हो चुकी हैं या जिनमें बड़ी दरारें आ चुकी हैं, वे आफ्टरशॉक के एक हल्के झटके से भी पूरी तरह जमींदोज हो जाती हैं।
  2. रेस्क्यू ऑपरेशन में बाधा: जब बचाव दल मलबे के नीचे दबे जिंदा लोगों को तलाश रहे होते हैं, तब आफ्टरशॉक आने से ऑपरेशन को तुरंत रोकना पड़ता है। मलबे के दोबारा खिसकने से पीड़ितों और बचावकर्मियों दोनों की जान खतरे में पड़ जाती है।
  3. मनोवैज्ञानिक खौफ: बार-बार हिलती धरती के कारण राहत शिविरों में रह रहे लोगों के मन में ऐसा डर बैठ जाता है कि वे पूरी तरह सुरक्षित इमारतों के अंदर जाने से भी कतराने लगते हैं।

विज्ञान के नियमों के अनुसार, आफ्टरशॉक हमेशा मुख्य भूकंप से कम तीव्रता का होता है। हालांकि, अगर बाद में आने वाला कोई झटका मुख्य भूकंप से भी ज़्यादा तेज़ निकल जाए, तो वैज्ञानिक उस नए झटके को ‘Mainshock’ घोषित कर देते हैं और पहले आए भूकंप को उसका ‘फोरशॉक’ (Foreshock – पहले का झटका) मान लिया जाता है।

वेनेजुएला और कैरिबियाई देशों के पास इस समय सुनामी (Tsunami) का खतरा भी बना हुआ है। जब भी समुद्र तल या तटीय इलाकों के पास 7.0 या उससे अधिक तीव्रता का भूकंप आता है, तो समुद्र के नीचे की जमीन पानी को तेजी से ऊपर-नीचे धकेलती है।

इससे समुद्र में विशालकाय लहरें पैदा होती हैं, जो 500 से 800 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तटों की तरफ बढ़ती हैं। वेनेजुएला के मामले में गनीमत यह रही कि भूकंप का केंद्र जमीन के काफी अंदर था, जिससे शुरुआती सुनामी का खतरा फिलहाल टल गया है, लेकिन तटीय आबादी को अभी भी हाई अलर्ट पर रहने की सलाह दी गई है।

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