सऊदी अरब में नौकरी की तैयारी कर रहे लोगों के लिए बड़ी खबर

सऊदी अरब ने विदेशी कर्मचारियों की भर्ती और वर्क परमिट जारी करने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। देश के मानव संसाधन और सामाजिक विकास मंत्रालय (MHRSD) से जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘किवा’ (Qiwa) ने वर्क वीजा और इंस्टेंट वर्क परमिट जारी करने के नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन की घोषणा की है।
नए नियमों के तहत अब नई कंपनियों को पहले की तुलना में काफी कम संख्या में तत्काल वर्क वीजा मिल सकेंगे। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य श्रम बाजार को अधिक व्यवस्थित बनाना, नियमों के पालन को मजबूत करना और विदेशी कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का सबसे अधिक प्रभाव उन विदेशी पेशेवरों पर पड़ सकता है जो सऊदी अरब में नई कंपनियों, स्टार्टअप्स या हाल ही में स्थापित संस्थानों में नौकरी की तलाश कर रहे हैं। भारतीय कर्मचारियों और भारतीय कंपनियों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है क्योंकि सऊदी अरब में काम करने वाले विदेशी कर्मचारियों में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक मानी जाती है।
क्या बदला है नए नियम में?
‘Qiwa’ प्लेटफॉर्म के अनुसार अब दो वर्ष से कम समय पहले स्थापित हुई कंपनियां अधिकतम 5 इंस्टेंट वर्क वीजा के लिए ही पात्र होंगी।
पहले कई मामलों में नई कंपनियां अपनी जरूरत के अनुसार अधिक संख्या में विदेशी कर्मचारियों की भर्ती कर लेती थीं, लेकिन अब सरकार ने इस प्रक्रिया पर सीमा तय कर दी है।
वहीं, दो वर्ष या उससे अधिक समय से संचालित कंपनियों को राहत दी गई है। ऐसी कंपनियां अधिकतम 50 वीजा तक प्राप्त कर सकती हैं। यह सीमा एक बार में या एक सप्ताह के भीतर किए गए कई आवेदनों पर भी लागू होगी।
सरकार का मानना है कि पुरानी और स्थापित कंपनियों का संचालन रिकॉर्ड बेहतर होता है, इसलिए उन्हें अधिक भर्ती की अनुमति दी जा सकती है।
स्टार्टअप और नई कंपनियों पर सबसे ज्यादा असर
नए नियमों का सबसे बड़ा प्रभाव सऊदी अरब में शुरू हो रही नई कंपनियों और स्टार्टअप्स पर पड़ने की संभावना है।
कई स्टार्टअप्स शुरुआत में विदेशी विशेषज्ञों, इंजीनियरों, तकनीकी कर्मचारियों और प्रबंधन पेशेवरों पर निर्भर रहते हैं। लेकिन अब केवल पांच इंस्टेंट वीजा की सीमा होने के कारण उन्हें भर्ती प्रक्रिया की योजना पहले से अधिक सावधानी से बनानी होगी।
इसका असर आईटी, निर्माण, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवा, लॉजिस्टिक्स और कंसल्टिंग जैसे क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है, जहां शुरुआती चरण में विदेशी प्रतिभाओं की मांग अधिक रहती है।
‘एस्टेब्लिशमेंट प्रोग्राम’ में शामिल कंपनियों के लिए अलग नियम
‘Qiwa’ ने स्पष्ट किया है कि ‘एस्टेब्लिशमेंट प्रोग्राम’ के तहत आने वाली कंपनियों को शुरुआत में केवल दो वीजा जारी किए जाएंगे।
हालांकि यदि कंपनी सऊदीकरण (Saudisation) की शर्तों को बेहतर तरीके से पूरा करती है और स्थानीय नागरिकों को अधिक रोजगार देती है, तो उसे अतिरिक्त वीजा प्राप्त करने की अनुमति मिल सकती है।
इसका सीधा मतलब है कि विदेशी कर्मचारियों की भर्ती का अवसर अब स्थानीय रोजगार सृजन से जुड़ गया है।
क्या है सऊदीकरण (Saudisation)?
सऊदीकरण या ‘निताकात’ (Nitaqat) कार्यक्रम सऊदी सरकार की एक प्रमुख नीति है जिसका उद्देश्य निजी क्षेत्र में सऊदी नागरिकों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना है।
इस नीति के तहत कंपनियों को अपने कुल कर्मचारियों में एक निश्चित प्रतिशत सऊदी नागरिकों को रखना अनिवार्य होता है।
जो कंपनियां इस लक्ष्य को पूरा करती हैं उन्हें कई प्रशासनिक और भर्ती संबंधी सुविधाएं दी जाती हैं, जबकि नियमों का पालन न करने वाली कंपनियों पर प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं।
नए वर्क वीजा नियम भी इसी नीति को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम माने जा रहे हैं।
विदेशी कर्मचारियों की भर्ती के लिए 10 प्रमुख शर्तें
‘Qiwa’ ने विदेशी कर्मचारियों की भर्ती के लिए 10 महत्वपूर्ण शर्तें निर्धारित की हैं।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- कंपनी का स्टेटस सक्रिय (Active) होना चाहिए।
- वैध कमर्शियल रजिस्ट्रेशन होना आवश्यक है।
- सभी कर्मचारियों के पास वैध वर्क परमिट होना चाहिए।
- कंपनी को ‘मीडियम ग्रीन’ या उससे उच्च श्रेणी में होना चाहिए।
- सऊदीकरण के निर्धारित मानकों को पूरा करना होगा।
- वेज प्रोटेक्शन सिस्टम (WPS) का पालन अनिवार्य होगा।
- Absher और Muqeem प्लेटफॉर्म पर आवश्यक बैलेंस बनाए रखना होगा।
- 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों को वार्षिक सेल्फ-असेसमेंट पूरा करना होगा।
- Qiwa प्लेटफॉर्म पर कार्यस्थल का पंजीकरण जरूरी होगा।
- कर्मचारियों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए।
इसके अलावा कंपनियों को अपने भर्ती कोटा के अनुसार पर्याप्त वीजा बैलेंस बनाए रखना होगा।
भारतीय कर्मचारियों पर क्या पड़ेगा असर?
सऊदी अरब भारतीय प्रवासी कामगारों और पेशेवरों के लिए सबसे बड़े रोजगार बाजारों में से एक है।
निर्माण, स्वास्थ्य सेवा, तेल एवं गैस, आईटी, इंजीनियरिंग, शिक्षा, होटल उद्योग और सेवा क्षेत्र में लाखों भारतीय काम करते हैं।
नई व्यवस्था के बाद उन भारतीय पेशेवरों को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है जो नई कंपनियों या स्टार्टअप्स में नौकरी पाने की योजना बना रहे हैं।
क्योंकि नई कंपनियों के पास अब सीमित संख्या में इंस्टेंट वीजा उपलब्ध होंगे, इसलिए भर्ती प्रक्रिया पहले की तुलना में धीमी हो सकती है।
स्थापित कंपनियों को मिलेगा फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव के बाद नौकरी तलाशने वाले पेशेवर दो वर्ष से अधिक पुरानी और स्थापित कंपनियों को प्राथमिकता दे सकते हैं।
ऐसी कंपनियों के पास अधिक वीजा कोटा होगा और वे बड़ी संख्या में विदेशी कर्मचारियों की भर्ती कर सकेंगी।
इससे अनुभवी कंपनियों को कुशल कर्मचारियों को आकर्षित करने में लाभ मिल सकता है।
भारतीय कंपनियों के लिए भी नई चुनौती
कई भारतीय कंपनियां सऊदी अरब में निर्माण, तकनीकी सेवाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में काम कर रही हैं।
यदि कोई भारतीय कंपनी सऊदी अरब में नया कारोबार शुरू करती है तो उसे शुरुआती चरण में विदेशी कर्मचारियों की भर्ती के लिए नई सीमाओं का सामना करना पड़ सकता है।
ऐसी कंपनियों को अब स्थानीय कर्मचारियों की भर्ती बढ़ाने और सऊदीकरण की नीतियों का अधिक प्रभावी तरीके से पालन करना होगा।
विजन 2030 से जुड़ा है फैसला
विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम सऊदी अरब के महत्वाकांक्षी ‘Vision 2030’ कार्यक्रम का हिस्सा है।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य देश की अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से बाहर निकालना, निजी क्षेत्र को मजबूत करना और स्थानीय नागरिकों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना है।
विदेशी कर्मचारियों की भर्ती को अधिक नियंत्रित और नियमबद्ध बनाकर सरकार श्रम बाजार में संतुलन स्थापित करना चाहती है।
आगे क्या?
नए नियमों के लागू होने के बाद कंपनियों को अपनी भर्ती रणनीति में बदलाव करना होगा। विदेशी पेशेवरों को भी नौकरी चुनते समय कंपनी की उम्र, वीजा कोटा और सऊदीकरण की स्थिति जैसे पहलुओं पर ध्यान देना पड़ सकता है।
हालांकि सऊदी अरब विदेशी प्रतिभाओं के लिए अब भी एक बड़ा रोजगार केंद्र बना हुआ है, लेकिन नए नियम यह संकेत देते हैं कि भविष्य में भर्ती प्रक्रिया पहले से अधिक नियंत्रित, पारदर्शी और नियम-आधारित होने जा रही है।



