Ram Mandir Donation Case: तीसरे दिन भी जारी रहेगी SIT की जांच, चंपत राय से पूछताछ; जानिए अब तक क्या-क्या हुआ

अयोध्या। राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे और दान राशि में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) लगातार तीसरे दिन भी जांच में जुटा है। बीते दो दिनों में जांच टीम ने मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों, कर्मचारियों, बैंक अधिकारियों और नकदी गणना प्रक्रिया से जुड़े लोगों से लंबी पूछताछ की है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि दानपात्रों से निकाली गई नकदी और बहुमूल्य वस्तुओं के प्रबंधन में कहीं कोई गड़बड़ी तो नहीं हुई।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
राम मंदिर में चढ़ावे की राशि और बहुमूल्य वस्तुओं के प्रबंधन को लेकर विवाद उस समय बढ़ा जब करोड़ों रुपये की कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आए। इसके बाद राजनीतिक दलों, संत समाज और विभिन्न संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। मामला तूल पकड़ने के बाद राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भी स्वतंत्र जांच की मांग की थी।
उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया। इस टीम में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन कुमार को शामिल किया गया। जांच टीम को प्रारंभिक रिपोर्ट सात दिनों और विस्तृत रिपोर्ट 15 दिनों में देने का निर्देश दिया गया है।
SIT ने किन लोगों से की पूछताछ?
मंगलवार को एसआईटी ने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, व्यवस्थापक गोपाल राव और नकदी गणना प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों से विस्तृत पूछताछ की। टीम ने यह जानने की कोशिश की कि दानपात्रों से नकदी निकलने से लेकर बैंक में जमा होने तक की पूरी प्रक्रिया कैसे संचालित होती है और किस स्तर पर निगरानी रखी जाती है।
सूत्रों के अनुसार, जांचकर्ताओं ने कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया, उनकी जिम्मेदारियों, निगरानी तंत्र और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कई सवाल पूछे।
दानपात्रों और रिकॉर्ड की गहन जांच
जांच टीम ने मंदिर परिसर में स्थापित दानपात्रों का निरीक्षण किया। उनकी संख्या, सुरक्षा व्यवस्था और उनसे नकदी निकालने की प्रक्रिया की समीक्षा की गई। इसके अलावा सीसीटीवी फुटेज, ड्यूटी रजिस्टर, नकदी जमा करने के रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की गई।
एसआईटी यह समझने का प्रयास कर रही है कि दानपात्रों से प्राप्त धनराशि किस-किस चरण से गुजरती है और कथित गड़बड़ी की संभावना कहां उत्पन्न हो सकती है।
आभूषण कक्ष भी जांच के दायरे में
जांच के दौरान एसआईटी प्रमुख विजय विश्वास पंत ने उस विशेष कक्ष का भी निरीक्षण किया जहां श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए सोने-चांदी के आभूषण और अन्य कीमती वस्तुएं रखी जाती हैं। इस कक्ष की देखरेख करने वाले कर्मचारियों से भी पूछताछ की गई। जांच टीम ने आभूषणों के रिकॉर्ड, सुरक्षा व्यवस्था और संरक्षण प्रणाली की जानकारी जुटाई।
नकदी गिनने में 40 कर्मचारी, दो शिफ्टों में होता है काम
जांच के दौरान एसआईटी को बताया गया कि दानपात्रों से प्राप्त नकदी की गिनती में ट्रस्ट, भारतीय स्टेट बैंक और एक कलेक्शन एजेंसी के करीब 40 कर्मचारी शामिल रहते हैं। यह कार्य दो शिफ्टों में किया जाता है। कलेक्शन एजेंसी का काम केवल दानपात्रों से नकदी निकालकर उसे निर्धारित गणना कक्ष तक पहुंचाना होता है। इसके बाद नोटों की गिनती और बैंक जमा करने की प्रक्रिया शुरू होती है।
कर्मचारियों की संपत्ति भी जांच के घेरे में
जांच के दौरान कुछ कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति और संपत्ति को लेकर भी सवाल उठे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कम वेतन पाने वाले कुछ कर्मचारियों के पास करोड़ों रुपये की संपत्तियां होने की जानकारी सामने आई है। एसआईटी इन दावों की भी जांच कर रही है और आय के स्रोतों का सत्यापन किया जा रहा है।
ट्रस्ट का क्या कहना है?
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने कहा है कि जांच में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। उनके अनुसार, जांच का उद्देश्य केवल संभावित आपराधिक पहलुओं की पड़ताल करना ही नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यवस्था को और मजबूत बनाना भी है।
वहीं, महासचिव चंपत राय ने पहले कहा था कि ट्रस्ट की ओर से नियमित ऑडिट कराया जाता है और जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अब आगे क्या?
तीसरे दिन एसआईटी की टीम कुछ और कर्मचारियों, बैंक अधिकारियों तथा दान प्रबंधन से जुड़े लोगों से पूछताछ कर सकती है। इसके अलावा सीसीटीवी फुटेज, बैंक रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच भी की जा रही है। जांच एजेंसियों का फोकस यह पता लगाने पर है कि यदि कोई अनियमितता हुई है तो वह किस स्तर पर हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
फिलहाल जांच जारी है और अभी तक एसआईटी ने किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया है। अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएंगे।



