IPL 2026 Final में कैच पर बवाल! Rajat Patidar अंपायर से भिड़े, मैदान पर हाई वोल्टेज ड्रामा, देखें-वीडियो

जुबिली स्पेशल डेस्क
अहमदाबाद। नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला जा रहा आईपीएल 2026 का फाइनल मुकाबला एक बड़े अंपायरिंग विवाद की भेंट चढ़ता दिख रहा है।
रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और गुजरात टाइटंस के बीच खिताबी जंग में एक कैच के फैसले ने मैदान का पारा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया।
आरसीबी के कप्तान रजत पाटीदार ऑन-फील्ड अंपायर नितिन मेनन से सीधे भिड़ गए। लेकिन इस गुस्से की वजह सिर्फ वॉशिंगटन सुंदर का विकेट न मिलना नहीं था, बल्कि ठीक एक महीने पहले इसी मैदान पर आरसीबी के साथ हुआ ‘धोखा’ था।
‘सॉफ्ट सिग्नल’ और घास का बहाना: क्या सच में नॉट-आउट थे सुंदर?
गुजरात की पारी के 10वें ओवर में जब जैकब डफी की गेंद पर वॉशिंगटन सुंदर ने हवा में शॉट खेला, तो डीप फाइन लेग पर मौजूद सब्स्टिट्यूट फील्डर जॉर्डन कॉक्स ने चीते जैसी फुर्ती दिखाते हुए आगे की ओर डाइव लगाकर अद्भुत कैच लपका। सुंदर भी मान चुके थे कि वह आउट हैं और पवेलियन की तरफ बढ़ चले थे।
तभी अंपायर नितिन मेनन ने फैसले को थर्ड अंपायर के पास भेजा। रिप्ले में दिखा कि गेंद कॉक्स की उंगलियों में थी, लेकिन अंपायर ने माना कि गेंद का एक हिस्सा घास को छू गया था। फैसला पलट दिया गया और सुंदर (4 रन) को जीवनदान मिल गया।
पाटीदार के गुस्से का ‘क्रोनोलॉजी’ समझिए: 30 अप्रैल का वो खूनी फ्लैशबैक
आरसीबी के खिलाड़ी और कप्तान रजत पाटीदार इस फैसले पर अंपायर से क्यों उलझे? इसकी वजह क्रिकेट की ‘सच्चाई’ और अंपायरों के ‘दोहरे मापदंड’ में छिपी है।
दरअसल, इसी मैदान पर 30 अप्रैल को जब गुजरात और बेंगलुरु का आमना-सामना हुआ था, तब ठीक ऐसा ही नजारा था-बस किरदार बदले हुए थे…
- तब बल्लेबाज थे खुद रजत पाटीदार।
- कैच लिया था गुजरात के जेसन होल्डर ने (डीप फाइन लेग पर ही)।
- होल्डर के कैच लेते वक्त भी उनका हाथ और गेंद मैदान को साफ छूते हुए दिख रहे थे, लेकिन तब थर्ड अंपायर ने पाटीदार को OUT दे दिया था।
आरसीबी का सीधा सवाल: जब 30 अप्रैल को जेसन होल्डर का संदिग्ध कैच ‘आउट’ हो सकता है, तो आज फाइनल जैसे बड़े मंच पर जॉर्डन कॉक्स का वैसा ही कैच ‘NOT OUT’ कैसे हो गया? अंपायरिंग के इस यू-टर्न पर विराट कोहली समेत पूरी आरसीबी टीम का भड़कना लाजमी था।
फाइनल की जंग में अंपायरिंग पर उठे गंभीर सवाल
यह विवाद महज एक कैच का नहीं है, बल्कि आईपीएल जैसे बड़े टूर्नामेंट में अंपायरिंग के स्तर पर बड़ा सवालिया निशान है।
एक ही सीजन में, एक ही मैदान पर, एक जैसी परिस्थिति में दो अलग-अलग टीमों के लिए थर्ड अंपायर का चश्मा बदल जाना फैंस और एक्सपर्ट्स के गले नहीं उतर रहा है। अब देखना यह है कि अंपायर का यह फैसला इस महामुकाबले के नतीजे पर कितना बड़ा असर डालता है।
