सिचुएशन रूम की महाबैठक बेनतीजा! अरबों डॉलर की संपत्तियों की रिहाई पर फंसा पेंच

जुबिली स्पेशल डेस्क
वाशिंगटन / तेहरान / यरुशलम। मिडिल ईस्ट में बारूद के ढेर के बीच शांति की उम्मीदों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज की नाकाबंदी हटाने और सीजफायर की शर्तों का ऐलान करने के बाद व्हाइट हाउस के ‘सिचुएशन रूम’ में चली 2 घंटे की हाई-लेवल मीटिंग बिना किसी नतीजे (बेनतीजा) के खत्म हो गई है।
अमेरिकी अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि राष्ट्रपति ट्रंप केवल उसी समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे जो 100% अमेरिका के हित में हो और ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को हमेशा के लिए दफन कर दे। वहीं, दूसरी तरफ ईरान ने अमेरिका की इन शर्तों को मानने से साफ इनकार करते हुए इसे ‘हुक्म की भाषा’ करार दिया है।
सिचुएशन रूम का इनसाइड अपडेट: ‘नो न्यूक्लियर’ पर अड़े ट्रंप
व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस गोपनीय बैठक के बाद ब्रीफिंग में बताया कि अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के साथ ट्रंप की लंबी चर्चा हुई।
अमेरिकी अधिकारी का बयान: “राष्ट्रपति का रुख बिल्कुल साफ है। ईरान को कभी भी, किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। जब तक तेहरान इन शर्तों को पूरी तरह लिखित में स्वीकार नहीं करता, तब तक कोई अंतिम समझौता नहीं होगा और न ही ट्रंप इस पर हस्ताक्षर करेंगे।”
’47 साल पहले छोड़ दी हुक्म सुनने की आदत’-ईरान का कड़ा पलटवार
अमेरिकी राष्ट्रपति के दावों और शर्तों पर ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने बेहद आक्रामक प्रतिक्रिया दी है। तेहरान ने साफ किया है कि बातचीत जरूर चल रही है, लेकिन ईरान किसी भी तरह के अमेरिकी दबाव या थोपी गई शर्तों के तहत घुटने नहीं टेकेगा।
- ईरान की दो टूक: प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा, “ईरान ने 47 साल पहले ही महाशक्तियों की हुक्म देने वाली भाषा को अलविदा कह दिया था। संवाद और विचार-विमर्श अपनी जगह है, लेकिन हम झुककर कोई समझौता नहीं करेंगे।”
- ट्रंप के दावों को बताया ‘झूठ का पुलिंदा’: ईरान की आधिकारिक मीडिया ‘फ़ार्स समाचार एजेंसी’ ने ट्रंप के बयान को ‘सच और झूठ का मिश्रण’ बताते हुए खारिज कर दिया। ईरान ने विशेष रूप से परमाणु सामग्री को नष्ट करने और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नियंत्रण वाले दावों का खंडन किया है।
असली पेंच: अरबों डॉलर की फ्रीज संपत्तियों पर अड़ा तेहरान
इनसाइड रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस महा-गतिरोध की सबसे बड़ी वजह सिर्फ परमाणु कार्यक्रम नहीं, बल्कि पैसा भी है। ईरान ने साफ कर दिया है कि किसी भी संभावित सीजफायर या समझौते पर मुहर लगाने से पहले अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों को विदेशों में फ्रीज (जब्त) की गई ईरान की अरबों डॉलर की संपत्तियों को तुरंत रिहा करना होगा। इसके बिना ईरान एक कदम भी पीछे नहीं हटेगा।
⚡ क्षेत्रीय तनाव चरम पर: इजरायल-हिज्बुल्लाह में भीषण जंग जारी
एक तरफ वाशिंगटन और तेहरान में कूटनीतिक रस्साकशी चल रही है, वहीं दूसरी तरफ जमीन पर युद्धविराम की धज्जियां उड़ रही हैं। अमेरिका और ईरान हाल ही में घोषित युद्धविराम के उल्लंघन को लेकर एक-दूसरे पर मढ़ रहे हैं।
- इजरायल का बड़ा दावा: इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एलान किया है कि उनकी सेना (IDF) युद्धविराम के बावजूद लेबनान में और अंदर तक घुस गई है।
- हिज्बुल्लाह के ड्रोन हमले: ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह ने भी पलटवार करते हुए उत्तरी इजरायल में स्थित कई सैन्य ठिकानों पर आत्मघाती ड्रोन हमलों की जिम्मेदारी ली है।
राजनयिक कोशिशों के बाद भी मिडिल ईस्ट में शांति का यह रोडमैप फिलहाल पूरी तरह खटाई में पड़ता नजर आ रहा है, और अब गेंद पूरी तरह ईरान के पाले में है कि वह ट्रंप के अल्टीमेटम का क्या जवाब देता है।


