US-Iran Ceasefire Deal: होर्मुज से 300 अरब डॉलर तक… अमेरिका-ईरान के बीच ‘महासमझौते’ पर तेज हुई बातचीत

पश्चिम एशिया में पिछले तीन महीनों से जारी तनाव और संघर्ष को खत्म करने के लिए United States और Iran के बीच उच्च स्तरीय बातचीत लगातार जारी है. दोनों देशों के बीच फिलहाल एक नाजुक सीजफायर लागू है, लेकिन स्थायी शांति को लेकर अभी अंतिम सहमति नहीं बन पाई है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों पक्ष संभावित सीजफायर और व्यापक समझौते के मसौदे पर चर्चा कर रहे हैं, जिसमें Strait of Hormuz से जुड़े मुद्दे और करीब 300 अरब डॉलर के निवेश पैकेज जैसे बड़े प्रस्ताव शामिल हैं.
ड्राफ्ट समझौते पर गहन चर्चा
बताया जा रहा है कि अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच एक नए ड्राफ्ट मेमोरैंडम को लेकर गंभीर बातचीत चल रही है. रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पक्ष कई बिंदुओं पर सहमति के करीब पहुंच चुके हैं, हालांकि कुछ अहम मुद्दों पर मतभेद अब भी बने हुए हैं.
यह प्रस्तावित समझौता ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम, अमेरिकी प्रतिबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा और दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही दुश्मनी को औपचारिक रूप से खत्म करने की दिशा में शुरुआती ढांचा माना जा रहा है.
300 अरब डॉलर के निवेश पैकेज पर चर्चा
वार्ता में सबसे ज्यादा चर्चा जिस मुद्दे की हो रही है, वह ईरान के लिए प्रस्तावित अरबों डॉलर का पुनर्निर्माण और निवेश पैकेज है. माना जा रहा है कि अगर अंतिम समझौता हो जाता है, तो यह निवेश ईरान की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह नया आकार दे सकता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पैकेज के जरिए ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर और व्यापार क्षेत्र में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं.
ट्रंप की मंजूरी अब भी बाकी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बातचीत में हाल के दिनों में सकारात्मक प्रगति हुई है, लेकिन Donald Trump की ओर से अभी तक इस ड्राफ्ट समझौते को अंतिम मंजूरी नहीं दी गई है. ऐसे में समझौते की दिशा में अगला कदम व्हाइट हाउस के फैसले पर निर्भर माना जा रहा है.
कतर और पाकिस्तान निभा रहे मध्यस्थ की भूमिका
पिछले कुछ हफ्तों से Qatar, Pakistan समेत कई क्षेत्रीय देश अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता कर रहे हैं. इन देशों की कोशिश है कि पश्चिम एशिया में फिर से बड़े संघर्ष की स्थिति पैदा न हो और स्थायी शांति स्थापित की जा सके.
हालांकि हालिया तनाव के कारण क्षेत्र में नए संघर्ष की आशंकाएं भी बढ़ी थीं, लेकिन इसके बावजूद दोनों देश बातचीत की मेज पर बने हुए हैं.



