‘सचिन के बाद ऐसा लड़का नहीं देखा…’ 65 छक्के ठोकने वाले वैभव सूर्यवंशी के ‘फुटवर्क’ का सच आया सामने!

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में इस वक्त सिर्फ एक ही नाम की गूंज है-वैभव सूर्यवंशी। महज 15 साल की उम्र में दुनिया के सबसे बड़े कप्तानों और गेंदबाजों के छक्के छुड़ाने वाले इस खब्बू बल्लेबाज ने सीजन में 65 गगनचुंबी छक्कों की मदद से 680 रन कूट दिए हैं।

हर कोई हैरान है कि इतनी छोटी सी उम्र में कोई बच्चा इतने लंबे छक्के कैसे मार सकता है? अब राजस्थान रॉयल्स (RR) के क्रिकेट ऑपरेशंस डायरेक्टर जुबीन भरूचा ने वैभव की बैटिंग तकनीक के उस ‘गुप्त राज’ से पर्दा उठाया है, जो उन्हें स्पेशल बनाता है।

जुबीन भरूचा के मुताबिक, वैभव सूर्यवंशी को बड़े-बड़े शॉट्स खेलने के लिए मैदान पर ज्यादा दौड़-भाग या फुटवर्क की जरूरत नहीं पड़ती। उनकी ताकत उनके बाएं पैर और ट्रिगर मूवमेंट में छिपी है..

  • क्रीज का स्मार्ट इस्तेमाल: वैभव का बैकफुट पर हल्का सा ट्रिगर मूवमेंट होता है, जिससे वह क्रीज की गहराई (depth) का पूरा फायदा उठाते हैं।
  • हाई बैकलिफ्ट और बैट स्पीड: गेंदबाज के गेंद फेंकने से ठीक पहले वैभव का शरीर, आंखें और उनकी ऊंची बैकलिफ्ट एक साथ सिंक (Sync) हो जाती हैं, जिससे उन्हें शॉट सिलेक्शन में मदद मिलती है।
  • 30% बढ़ी बैट स्पीड: भरूचा ने खुलासा किया कि ट्रायल के दौरान वैभव की बैट स्पीड सबसे तेज नहीं थी। लेकिन राजस्थान रॉयल्स के ट्रेनिंग सेंटर में 3 महीने की कड़ी मेहनत के बाद उनकी बैट स्पीड को 30 फीसदी तक बढ़ाया गया, जिसका नतीजा आज मैदान पर दिख रहा है।

पिछले साल तक वैभव की एक कमजोरी थी कि वह ऑन-साइड (लेग साइड) पर ज्यादा निर्भर थे। जुबीन भरूचा ने बताया कि गेंदबाजों द्वारा इस कमजोरी को पकड़ने से पहले ही राजस्थान रॉयल्स के कैंप में इस पर काम किया गया।

“पिछले एक साल में वैभव ने अपने रूटीन या गेंदों की संख्या में कोई बदलाव नहीं किया, बल्कि उन्होंने अपनी रेंज बढ़ाई। अब वह ऑफ-साइड में भी उतने ही घातक शॉट खेलते हैं। इस बदलाव ने उनके आत्मविश्वास को 100 गुना बढ़ा दिया है।” – जुबीन भरूचा

जुबीन भरूचा ने वैभव की तुलना क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर से करते हुए एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा “सचिन तेंदुलकर के बाद मैंने इतनी कम उम्र में किसी लड़के को इतनी सफाई और मैच्योरिटी के साथ बैटिंग करते नहीं देखा। वैभव की क्रिकेटिंग समझ उनकी उम्र से कहीं ज्यादा बड़ी है।”

भरूचा जानते हैं कि क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन नामुमकिन है। उन्होंने कहा कि वैभव के करियर में भी उतार-चढ़ाव आएंगे और जब वह फ्लॉप होंगे तो आलोचना भी होगी। लेकिन राजस्थान रॉयल्स चाहता है कि वैभव को और अधिक मुश्किल परिस्थितियों में डाला जाए, क्योंकि असफलताओं से ही उनकी खेल को समझने की शक्ति और ज्यादा मजबूत होगी।

Related Articles

Back to top button