सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: SIR प्रक्रिया पर चुनाव आयोग को मिली राहत

SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले में बड़ा फैसला सामने आया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने बुधवार (27 मई) को सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग ने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल किया है और इसे अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं माना जा सकता।
“पूरी प्रक्रिया को असंवैधानिक नहीं कहा जा सकता”
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा अपनाई गई SIR प्रक्रिया को पूरी तरह गैर-संवैधानिक नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने माना कि चुनाव आयोग ने अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर रहकर कार्य किया है।
लंबी सुनवाई के बाद सुरक्षित रखा गया था फैसला
इस मामले में विस्तृत सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही फैसला सुरक्षित रख लिया था। याचिकाकर्ताओं ने SIR प्रक्रिया की वैधता को चुनौती दी थी और इसे संविधान के अनुच्छेद 326 तथा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के खिलाफ बताया था।
याचिकाकर्ताओं का क्या था तर्क?
याचिकाओं में कहा गया था कि चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के दौरान जो शर्तें लगाई गई हैं, वे उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं। विशेष रूप से यह विवाद इस शर्त पर केंद्रित था कि 2002 या 2003 की मतदाता सूची में नाम न होने पर नागरिकता साबित करनी होगी, और इसके लिए पैतृक संबंध भी प्रमाणित करना होगा।
आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट के इस रुख को चुनाव आयोग के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, हालांकि मामले में विस्तृत निर्णय और कानूनी व्याख्या पर आगे नजर बनी रहेगी।



