शराब सिंडिकेट के आगे बेबस है शासन और प्रशासन

जुबिली न्यूज़ डेस्क 

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में अवैध शराब का धंधा हमेशा से होता रहा है. सरकारें आती हैं, चली जाती हैं. कुछ सरकारें सख्ती करती हैं तो पुलिस अपने इलाके में बन रही अवैध शराब की भट्टियों को जाकर तोड़ती है. अवैध शराब को जब्त करती है. शराब बनाने वाले उपकरण अपने साथ ले जाती है और लोगों की गिरफ्तारियां भी करती है लेकिन कुछ ही समय यह काम फिर से शुरू हो जाता है.

अवैध शराब से जब लोगों की मौत होती है तब ज़रूर पुलिस ज्यादा सक्रिय होती है. सरकार का भी पुलिस पर दबाव बढ़ जाता है लेकिन यह सिलसिला कभी बंद नहीं होता है.

प्रयागराज में हाल ही में नकली शराब पीने से नौ लोगों की मौत का मामला सामने आया है. उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार गठित होने के बाद की बात ही करें तो पिछले चार साल में राजधानी लखनऊ में भी अवैध शराब से लोगों की जानें गई हैं. लखनऊ के अलावा सीएम योगी के शहर गोरखपुर, प्रयागराज, फतेहपुर, बाराबंकी, उन्नाव, हाथरस, कुशीनगर, मेरठ, बुलंदशहर, मथुरा, बरेली और लखीमपुर खीरी आदि जिलों में अवैध शराब की वजह से बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है. और यह सिलसिला लगातार जारी है.

उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने कहा है कि अवैध शराब की वजह से लगातार होने वाली मौतों के लिए उत्तर प्रदेश की सरकार ज़िम्मेदार है क्योंकि शराब कारोबारियों और सत्ता के संरक्षण का गठजोड़ इतना ताकतवर हो चुका है कि उसके सामने मुख्यमंत्री का आदेश भी कोई मायने नहीं रखता.

उन्होंने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की थी कि जिस जिले में नकली शराब से मौत होगी वहां का डीएम और एसपी ज़िम्मेदार होंगे. अपराधियों और माफियाओं के नाम पर अपनी पीठ थपथपाने वाली सरकार शराब के अवैध कारोबारियों के आगे बेबस हो गई है.

अजय लल्लू ने कहा कि नकली शराब से प्रयागराज में हुई नौ लोगों की मौत वास्तव में सरकार के नाकारेपन की वजह से हुई है. सरकार के नाकारेपन की वजह से यूपी शराब माफियाओं का हब बन चुका है.

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राजधानी लखनऊ के मलीहाबाद और मोहनलालगंज में हाल ही में तमाम लोगों की नकली शराब की वजह से मौत हुई है. यूपी के अधिकाँश जिले अवैध शराब की आगोश में हैं. लोगों की मौतों का सिलसिला चल रहा है सरकार इस सिंडिकेट के आगे बेबस बनी हुई है.

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