Thursday - 24 September 2020 - 1:58 PM

इन कंपनियों की अगवाई से भारत ऐसे बनेगा स्मार्टफोन एक्सपोर्ट हब

जुबिली न्यूज़ डेस्क

नई दिल्ली। पेगाट्रॉन, सैमसंग, लावा और डिक्सॉन जैसी इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों ने भारत में मोबाइल​ डिवाइस और उनके कम्पोनेन्ट बनाने का प्रस्ताव दिया है। केंद्र सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इनसेन्टिव स्कीम के तहत ये कंपनियां अगले पांच साल में 11.5 लाख करोड़ का उत्पादन करेंगी।

देश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिल सकेगा। PLI स्कीम के तहत कुल 22 कंपनियों ने आवेदन दिया है, जिसमें Samsung, Foxconn Hon Hai, Rising Star, Wistron और Pegatron जैसी दिग्गज ब्रांड्स हैं।

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रविशंकर प्रसाद ने शनिवार को कहा कि इंटरनेशनल मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों ने 15000 व इससे अधिक के सेग्मेंट में उत्पादन के लिए आवेदन किया है। इनमें से तीन कंपनियां एप्पल की iPhone की कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स हैं। इनका नाम फॉक्सकॉन, विस्ट्रोन और पेगाट्रॉन है।

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37% के साथ एप्पल और 22% के साथ ​सैमसंग को मिला दें तो ये दोनों कंपनियां वैश्विक मोबाइल फोन्स की सेल्स रेवेन्यू से करीब 60% प्राप्त करती है। अब केंद्र सरकार पीएलआई स्कीम के बाद उम्मीद की इन कंपनियों का मैन्युफैक्चरिंग बेस कई गुना तक बढ़ जाएगा।

रविशंकर प्रसाद से जब चीनी कंपनियों की भागीदारी के बारे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मैं किसी देश का नाम नही लेना चाहता। इन्वेस्टमेंट के नियमो का सवाल है तो भारत सरकार के नॉर्म्स हैं जो भारत सरकार के द्वारा फिक्स किए जाते हैं।

आईटी मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद ने यह भी बताया कि इन कंपनियों द्वारा जमा किए गए प्रस्ताव के बाद देश में 12 लाख नए रोजगार अवसर पैदा होंगे। इसमें से 3 लाख डायरेक्ट नौकरियां होंगी और करीब 9 लाख इनडायरेक्ट नौकरियां होंगी।

उन्होंने कहा मोबाइल फोन्स के लिए डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन मौजूदा 15-20% से बढ़कर 35- 40% बढ़ जाएगा। जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स कम्पोनेन्ट के लिए यह 45-50% के करीब पहुंच जाएगा।

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