US-Iran Peace Deal: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म, ट्रंप और मसूद ने 14 सूत्रीय महा-डील पर किए हस्ताक्षर

जुबिली स्पेशल डेस्क
US-Iran Peace Deal 2026: मिडिल ईस्ट (Middle East) से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच सालों से चला आ रहा युद्ध और तनाव अब आधिकारिक तौर पर खत्म हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने एक 14 सूत्रीय ऐतिहासिक शांति समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।
इस समझौते को ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ नाम दिया गया है, जो पेरिस में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मौजूदगी में तुरंत प्रभावी हो गया। इस डील के बाद दुनिया पर मंडरा रहा तीसरे विश्व युद्ध का खतरा फिलहाल टल गया है।
‘मिशन होर्मुज’ और यूरेनियम का खात्मा: क्या है इस 14 सूत्रीय महा-डील में?
अमेरिका द्वारा जारी किए गए आधिकारिक मसौदे और सीएनएन (CNN) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस डील का सबसे बड़ा असर ग्लोबल ट्रेड और न्यूक्लियर सिक्योरिटी पर पड़ने वाला है। इस ऐतिहासिक समझौते की 4 सबसे बड़ी बातें यह हैं:
- होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) खुलेगा: ईरान तुरंत इस समुद्री मार्ग को बिना किसी शुल्क के वाणिज्यिक जहाजों के लिए सुरक्षित खोलेगा, जिससे वैश्विक तेल सप्लाई बहाल होगी। बदले में अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा।
- परमाणु हथियार पर फुल स्टॉप: ईरान ने लिखित में दिया है कि वह कभी भी परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। वह अपना ‘इनरिच्ड यूरेनियम’ (Enriched Uranium) का भंडार नष्ट करने पर राजी हो गया है।
- लेबनान सहित सैन्य ऑपरेशन बंद: लेबनान और पूरे मिडिल ईस्ट में चल रहे सभी सैन्य अभियान तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त कर दिए जाएंगे।
- 60 दिनों का अल्टीमेटम: ईरान के परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों पर अंतिम समझौते के लिए 60 दिनों की समय-सीमा तय की गई है।
ईरान को मिलेगा $300 बिलियन का बूस्टर डोज़, प्रतिबंधों से मिलेगी राहत
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघई ने इस डील की पुष्टि करते हुए कहा कि ओमान और अन्य देशों की मध्यस्थता से यह मुमकिन हो पाया है। हालांकि, ईरान ने साफ किया है कि होर्मुज स्ट्रेट पर उसकी संप्रभुता बरकरार रहेगी।
आर्थिक मोर्चे पर बड़ा यू-टर्न: अगर ईरान अगले 60 दिनों में अपना व्यवहार सही रखता है, तो अमेरिका उसे प्रतिबंधों से चरणबद्ध तरीके से बड़ी राहत देगा। इसके तहत ईरान की जब्त संपत्तियां जारी होंगी, तेल निर्यात पर छूट मिलेगी, और ईरान के पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 300 अरब अमेरिकी डॉलर का आर्थिक विकास पैकेज दिया जाएगा।
ट्रंप का मास्टरस्ट्रोक या मजबूरी?
हाल ही में जी-7 (G-7) समिट में अमेरिकी परमाणु हथियारों की ताकत का बखान करने वाले डोनाल्ड ट्रंप का यह कदम वर्ल्ड पॉलिटिक्स को पूरी तरह बदल देगा। जहां एक तरफ चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने की चुनौती है, वहीं ट्रंप ने ईरान के साथ दुश्मनी खत्म कर एक नया दांव खेल दिया है। अब देखना होगा कि अगले 60 दिनों में यह शांति समझौता स्थायी रूप ले पाता है या नहीं।
