जगन्नाथ रथ यात्रा पर घमासान! ISKCON को कलिंग सेना की चेतावनी, जानिए क्यों भड़का विवाद

ओडिशा में भगवान जगन्नाथ पुरी की रथ यात्रा को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। क्षेत्रीय संगठन कलिंग सेना ने ‘इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस’ (ISKCON) को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। संगठन ने आरोप लगाया है कि ISKCON शास्त्रों में बताए गए समय से अलग तारीखों पर रथ यात्रा आयोजित कर परंपराओं का उल्लंघन कर रहा है।

कलिंग सेना ने ISKCON को चेतावनी देते हुए कहा है कि वह भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा को तय समय और परंपरा के अनुसार ही निकाले, अन्यथा संगठन इसका विरोध करेगा।

कलिंग सेना के कार्यकर्ताओं ने भुवनेश्वर स्थित ISKCON मंदिर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। संगठन ने आरोप लगाया कि ISKCON ने पुरी के गजपति महाराजा दिब्यसिंह देब का अपमान किया है, जिन्हें भगवान जगन्नाथ का प्रथम सेवक माना जाता है।

विवाद उस समय और बढ़ गया जब गजपति महाराजा की ओर से शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार दुनिया भर में रथ यात्रा निकालने की अपील को लेकर ISKCON पर सवाल उठाए गए।

क्या है ISKCON और जगन्नाथ रथ यात्रा विवाद?

विवाद का मुख्य कारण रथ यात्रा की तारीख को लेकर है। पुरी मंदिर परंपरा के अनुसार भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को निकाली जाती है।

पुरी में इस साल मुख्य रथ यात्रा तय धार्मिक कैलेंडर के अनुसार आयोजित की जानी है। वहीं, ISKCON ने अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों में स्थानीय परिस्थितियों और श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए अलग-अलग तारीखों पर रथ यात्राएं आयोजित कीं।

पुरी मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोगों का कहना है कि रथ यात्रा की तारीख में बदलाव धार्मिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। वहीं, ISKCON का तर्क है कि भगवान जगन्नाथ पूरी दुनिया के हैं और विदेशों में मौसम, स्थानीय नियमों और भक्तों की सुविधा के अनुसार आयोजन की तारीख तय की जाती है।

कलिंग सेना के अध्यक्ष हेमंत रथ ने कहा है कि अगर ISKCON ने अपनी गतिविधियों में बदलाव नहीं किया तो संगठन इसका विरोध करेगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि ISKCON जगन्नाथ संस्कृति और ओडिशा की धार्मिक परंपराओं का सम्मान नहीं कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पुरी और भुवनेश्वर में होने वाली रथ यात्रा के दौरान ISKCON की मौजूदगी का विरोध किया जाएगा।

कलिंग सेना खुद को ओडिशा की भाषा, संस्कृति, परंपरा और जगन्नाथ संस्कृति की रक्षा करने वाला संगठन बताती है।

संगठन की वेबसाइट के मुताबिक, इसकी स्थापना 7 नवंबर 2001 को हेमंत रथ ने ओडिशा की राजधानी में की थी। इसे एक क्षेत्रीय राजनीतिक संगठन के रूप में स्थापित किया गया था।

कलिंग सेना ओडिया अस्मिता, राज्य के प्राकृतिक संसाधनों और सांस्कृतिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप के विरोध जैसे मुद्दों पर सक्रिय रहने का दावा करती है।

कलिंग सेना कई चुनावों में अपने उम्मीदवार उतार चुकी है। 2024 के लोकसभा चुनाव में संगठन ने भुवनेश्वर सीट से उम्मीदवार उतारा था।

इसके अलावा 2024 विधानसभा चुनाव में भी पार्टी ने कई सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन किसी सीट पर जीत हासिल नहीं कर सकी। इससे पहले 2009, 2013 और 2019 के विधानसभा चुनावों में भी संगठन चुनाव मैदान में उतर चुका है।

पुरी की रथ यात्रा हिंदू धर्म की सबसे प्रमुख धार्मिक यात्राओं में से एक मानी जाती है। इसमें भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथ निकाले जाते हैं।

हर साल लाखों श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होने के लिए पुरी पहुंचते हैं। यही कारण है कि इससे जुड़ी परंपराओं और तारीखों को लेकर होने वाले विवाद भावनात्मक और धार्मिक रूप से बेहद संवेदनशील माने जाते हैं।

फिलहाल विवाद ISKCON और ओडिशा के पारंपरिक धार्मिक संगठनों के बीच मतभेद तक सीमित है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों पक्षों के बीच कोई सहमति बनती है या यह विवाद और बढ़ता है।

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