Wednesday - 25 November 2020 - 7:42 AM

UP: राज्यसभा चुनाव तो बहाना है असल में विधानसभा जीतना है

जुबिली न्यूज़ डेस्क

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा सीटों पर हो रहे चुनाव के बहाने राजनैतिक दलों ने अपनी जमीन 2022 विधानसभा चुनाव के लिया तैयार करनी शुरू कर दी है। तभी तो नामांकन की अधिसूचना आते ही राज्य की सियासत गरमाने लगी और सियासत का पारा चढ़ने लगा।

बीजेपी में 9 प्रत्याशी उतारने को लेकर कभी हां कभी ना के बीच आखिरकार 8 प्रत्याशी ही मैदान में उतारे गए। बीजेपी के प्रत्याशी उतारे जाने से पहले बहुजन समाज पार्टी अपना प्रत्याशी मैदान में उतार चुकी थी। दूसरी तरफ बीजेपी का सहयोगी दल अपना दल (एस) एक प्रत्याशी के लिए दबाव बना रहा था क्योंकि केंद्र की एनडीए सरकार में इस बार अपना दल (एस) का कोई मंत्री नहीं बन पाया था।

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बीजेपी के एक खेमे की राय भी बन रही थी कि 9 प्रत्याशी उतारे जाएं और नौवां अपना दल का हो, लेकिन दूसरे खेमे को ये डर था कि कहीं विधायक जुड़ने के बजाए टूटने लगे तो मिशन 2022 की नींव गलत पड़ जाएगी। इस रणनीति के तहत नौवां प्रत्याशी नहीं उतारा गया और बसपा के गुपचुप समर्थन की रणनीति बनाई गई। जिससे पार्टी में फूट पड़ने की खबरें आने लगी।

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देर सबेर ये बात भी ज्यादा देर तक छूप नहीं सकती थी तभी समाजवादी पार्टी भी बसपा सुप्रीमो और बीजेपी दोनों को आइना दिखाना चाह रही थी और यह तय हुआ कि एक डमी कैंडिडेट उतारा जाए। सपा की इस रणनीति पर बीजेपी पसोपेश में दिखी, क्योंकि बीजेपी कतई नहीं चाह रही थी कि मतदान की नौबत आए।

इस बीच मौका का फायदा उठाते हुए समाजवादी पार्टी ने बहुजन समाज पार्टी में सेंध लगायी और 7 विधायकों को तोड़ा। जोड़-तोड़ की गणित के बावजूद बसपा अपना प्रत्याशी तो बचा ले गई लेकिन समाजवादी पार्टी अपने मिशन में सफल हो गई।

इस मामले में यूपी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने बसपा सुप्रीमो मायावती को बताया बीजेपी की अघोषित प्रवक्ता और कहा कि बसपा का अस्तित्व धीरे- धीरे खत्म हो रहा है। उन्होंने ये भी कहा कि अब क्या देखने को बाकी है, हाथी अब सरकारी हो गया है। दलित – वंचित समाज के लोगों का दमन कर रही सरकार का साथी हो गया।

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वहीं उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा ने कहा कि केन्द्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने से रोकने के लिये हाथ मिलाने वाली बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी आज एक दूसरे को पटकनी देने के लिये तैयार दिख रही हैं।

इसके अलावा ये भी जानकारी मिली है कि बसपा मुखिया मायावती के OSD रहे गंगाराम अंबेडकर ने अखिलेश यादव से मुलाक़ात की। 5 सदस्यीय दल के साथ गंगा राम अम्बेडकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिले। गंगाराम अंबेडकर ने इसके बाद कहा कि हम एक सामाजिक संगठन है लेकिन जरूरत पड़ने पर 2022 में राजनैतिक तौर से भी मैदान में उतरेंगे।

आपको बता दें कि गंगा राम फिलहाल ‘मिशन सुरक्षा परिषद’ नाम के संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। वो मायावती के महत्वपूर्ण सलाहकार में से एक रहे हैं। अंबेडकर इन दिनों दलितों को देशभर में जोड़ने का अभियान चला रहे हैं।

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इस बीच बीएसपी के विधायक असलम चौधरी का भी बयान आया है उन्होंने कहा है कि मायावती बीजेपी से मिल गईं हैं। मैनें इस गठबंधन का विरोध किया तो इस वजह से मायावती ने निकाला है। मैं बसपा का विधायक बना रहूंगा।

बीएसपी के बागी विधायक बिंद ने कहा कि बीजेपी से मिल गईं हैं मायावती। हाकिम चंद बिंद ने मायावती पर आरोप लगाया कि भाजपा से मिलने का हमने विरोध किया और अखिलेश यादव से कोई मुलाकात नहीं हुई। वहीं बीएसपी के विधायक हरगोविंद भार्गव ने कहा मैं कल लखनऊ में था ही नहीं। मैं बीएसपी का विधायक बना रहूंगा और बीजेपी के साथ मिलने का विरोध किया है।

इसके अलावा आज बीएसपी प्रमुख मायावती ने उन सभी 7 विधायकों को पार्टी में विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के लिए निलंबित किया है। कुल मिलाकर मिशन 2022 की रणनीति के लिए सपा ने ऐसा पासा फेंका, जिसमें बीजेपी तो नहीं फंसी, लेकिन बसपा फंस गई।

अब जनवरी में एमएलसी चुनाव होने हैं। साथ ही शिक्षक, स्नातक की सीटें भी खाली चल रही हैं ऊपर से पंचायत चुनाव भी हैं। ऐसे में राज्यसभा चुनाव का असर इन सभी चुनावों पर भी पड़ेगा और मिशन 2022 की रणनीति के लिए सभी दलों ने अभी से विधानसभा का रास्ता साफ करना शुरू कर दिया है।

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