Saturday - 13 August 2022 - 3:54 PM

यूएन स्कैंडल : भारत में सस्ते मकान बनाने के लिए 2.5 मिलियन डॉलर का निवेश, लेकिन एक घर भी नहीं बना

जुबिली न्यूज डेस्क

संयुक्त राष्ट्र की एक एंजेसी द्वारा ऋण और अनुदान से जुड़ा 60 मिलियन डॉलर का एक घोटाला सामने आया है। इसमें भारत में भी किफायती घर बनाने के लिए 2.5 मिलियन डॉलर का निवेश भी शामिल था।

न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र परियोजना सेवा कार्यालय  (UNOPS) ने एक ब्रिटिश कारोबारी को पूरी राशि सौंपी थी। अब इस व्यवसायी पर 22 मिलियन डॉलर का कर्ज है।

संयुक्त राष्ट्र के दस्तावेज से पता चला है कि सिंगापुर के कारोबारी डेविड केंड्रिक के स्वामित्व वाली फर्म को गोवा में 2.5 मिलियन डॉलर में कम से कम 50,000 मकान बनाने का काम मिला था।

दिल्ली में एक दंपति अमित गुप्ता व आरती जैन, इस फर्म के निदेशक हैं। सस्टेनेबल हाउसिंग सॉल्यूशंस (SHS) होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड, जिसके पास अपने कागजों में दिखाने के लिए बहुत कम है। इस कंपनी ने साल 2020-21 में 27,289 रुपये का घाटा दर्ज किया है।

यह प्रोजेक्ट साल 2018 में शुरू की गई सस्टेनेबल इन्फ्रास्ट्रक्चर इंपैक्ट इन्वेस्टमेंट्स (SxI)  पहल के तहत थी। इसकी अब संयुक्त राष्ट्र द्वारा कारोबारी केंड्रिक से जुड़ी कंपनियों को अपनी सारी फंडिंग आवंटित करने के लिए जांच की जा रही है।

वहीं UNOPS  के प्रमुख ग्रेटे फरेमो ने भी इसी महीने के शुरुआत में इस मामले में अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं। इस घोटाले ने संस्था को शर्मिंदा किया है।

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द इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक अमित गुप्ता, जो एसएचएस कंपनी के सीईओ हैं, उन्होंने कहा कि इस परियोजना को रोक दिया गया है।

वहीं इंडियन एक्सप्रेस ने भी गोवा सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी से पुष्टि की है। अधिकारी के मुताबिक, गोवा में प्रस्तावित मकान इकाइयों के निर्माण के लिए एसएचएस होल्डिंग्स द्वारा अधिकारियों को एक प्रेजेंटेशन दी गई थी।

अधिकारी ने कहा कि “परियोजना के लिए किसी जमीन की पहचान नहीं की गई थी। दरअसल चर्चा उस चरण तक भी नहीं पहुंची, जहां परियोजना के लिए फंड-शेयरिंग पैटर्न पर चर्चा की गई थी।

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वहीं इस मामले में अमित गुप्ता ने दावा किया है कि ” UNOPS  से गोवा सरकार ने संपर्क किया था। फरवरी 2019 में गोवा सरकार के साथ एक समझौता भी हुआ था। उसके बाद मार्च 2019 में एक पूरक समझौते पर हस्ताक्षर हुआ था।

उन्होंने कहा कि उसके बाद हम लोगों ने कुछ मेल भेजा, क्योंकि गोवा में हमें जमीन आवंटित होने वाला था। हम लोगों ने अगस्त-सितंबर 2019 तक मेल भेंजा, लेकिन हमें कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। फिर हमें UNOPS  द्वारा बताया गया कि गोवा सरकार इन घरों को बनाना चाहती थी और अब वे उत्तर नहीं दे रहे हैं। वे जब भी आना चाहें, आ सकते हैं। हमने उसे उसी समय वहीं छोड़ दिया था।”

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