ईरान जंग पर ट्रंप का बड़ा दावा: ‘शत्रुता खत्म, अब मंजूरी की जरूरत नहीं’; व्हाइट हाउस ने संसद को भेजी चिट्ठी

जुबिली स्पेशल डेस्क

वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे सैन्य तनाव पर एक चौंकाने वाला अपडेट दिया है। ट्रंप ने अमेरिकी संसद (कांग्रेस) को आधिकारिक तौर पर सूचित किया है कि ईरान के खिलाफ युद्ध अब “समाप्त” हो चुका है। इस घोषणा के साथ ही उन्होंने उस कानूनी विवाद को भी खत्म करने की कोशिश की है, जिसमें उन पर बिना संसदीय मंजूरी के युद्ध जारी रखने के आरोप लग रहे थे।

अमेरिकी कानून ‘वॉर पावर रेजोल्यूशन (1973)’ के अनुसार, राष्ट्रपति को किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए 60 दिनों के भीतर संसद से मंजूरी लेनी अनिवार्य होती है। ट्रंप प्रशासन ने 2 मार्च को संसद को अभियान की जानकारी दी थी, जिसकी समय सीमा 1 मई 2026 को खत्म हो रही थी।

हालांकि, ट्रंप ने सांसदों को लिखे पत्र में तर्क दिया है कि:

  • 7 अप्रैल 2026 के बाद से दोनों देशों के बीच एक भी गोली नहीं चली है।
  • 28 फरवरी को शुरू हुई शत्रुता अब पूरी तरह थम चुकी है।
  • चूंकि युद्ध समाप्त हो चुका है, इसलिए अब उन्हें सैन्य कार्रवाई के लिए संसद की किसी विशेष अनुमति की आवश्यकता नहीं है।

ट्रंप ने ईरान की वर्तमान स्थिति पर कड़ा प्रहार करते हुए दावा किया कि हालिया संघर्ष ने तेहरान की कमर तोड़ दी है। ट्रंप के मुताबिक:

“ईरान की सैन्य क्षमता अब नगण्य है। उनके पास अब न कोई प्रभावी नौसेना बची है और न ही वायु सेना। उनकी रक्षा प्रणाली पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है।”

ईरान की ओर से आए बातचीत के प्रस्तावों पर ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वे फिलहाल इन शर्तों से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने ईरान के नेतृत्व पर तंज कसते हुए कहा कि वहां के नेता आपस में ही बंटे हुए हैं।

  • नेतृत्व का संकट: ट्रंप के अनुसार, ईरान में यह स्पष्ट नहीं है कि ‘असली बॉस’ कौन है। नेताओं के बीच आपसी मतभेद वार्ता को जटिल बना रहे हैं।
  • मानवीय दृष्टिकोण: राष्ट्रपति ने कहा कि वे ईरान को पूरी तरह तबाह करने के बजाय कूटनीतिक समाधान पसंद करेंगे, लेकिन उनकी शर्तें पूरी होनी चाहिए।
  • प्लान B तैयार: ट्रंप ने साफ चेतावनी दी है कि यदि बातचीत विफल रहती है, तो सैन्य विकल्प अभी भी टेबल पर हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह कदम घरेलू राजनीति में खुद को सुरक्षित करने की एक रणनीति है। युद्ध को ‘खत्म’ घोषित कर उन्होंने कानूनी अड़चनों को पार कर लिया है, लेकिन ईरान की सीमाओं पर तनाव और कूटनीतिक रस्साकशी अभी लंबे समय तक जारी रहने की उम्मीद है।

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