FIIs को आकर्षित करने के लिए केंद्र सरकार ने इनकम टैक्स कानून में किया अहम बदलाव

केंद्र सरकार ने विदेशी निवेशकों (FIIs) को बड़ा राहत देते हुए भारतीय सरकारी बॉन्ड (G-Secs) में निवेश पर टैक्स छूट देने का फैसला किया है। इसके लिए सरकार ने अध्यादेश जारी कर दिया है और इनकम टैक्स कानून में अहम संशोधन किए हैं। सरकार का उद्देश्य भारत में विदेशी पूंजी निवेश को बढ़ाना और सरकारी बॉन्ड मार्केट को मजबूत करना है।

सरकार ने इनकम टैक्स एक्ट के शेड्यूल-4 में दो नए प्रावधान—13D और 13E—जोड़े हैं। इन प्रावधानों के तहत कुछ विदेशी निवेशकों को सरकारी बॉन्ड से होने वाली आय पर टैक्स छूट दी जाएगी।

यह नया नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा।

सरकार के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य विदेशी निवेशकों को भारतीय सरकारी बॉन्ड में अधिक निवेश के लिए आकर्षित करना है। टैक्स छूट से FIIs को भारत के डेट मार्केट में निवेश करने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा।

इससे—

  • विदेशी पूंजी प्रवाह (Foreign Capital Inflow) बढ़ेगा
  • सरकारी उधारी को आसानी से फंडिंग मिलेगी
  • भारतीय बॉन्ड मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ेगी

विशेषज्ञों के अनुसार, इस कदम से भारत का सरकारी बॉन्ड मार्केट अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए और अधिक आकर्षक बनेगा। इससे लंबी अवधि में रुपये की स्थिरता और वित्तीय बाजारों की मजबूती को भी समर्थन मिलेगा।

इसी बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बिना किसी बदलाव के बनाए रखा है।

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार, मौजूदा वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और महंगाई के जोखिमों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। केंद्रीय बैंक ने अपनी नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ रखा है।

RBI ने साफ किया है कि आने वाले समय में आर्थिक स्थिति, वैश्विक बाजार और मुद्रास्फीति के आधार पर आगे की नीतिगत दिशा तय की जाएगी। फिलहाल ब्याज दरों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है।

सरकार और RBI के इन फैसलों से स्पष्ट है कि भारत विदेशी निवेश को आकर्षित करने और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने पर विशेष ध्यान दे रहा है। टैक्स छूट और स्थिर मौद्रिक नीति मिलकर आने वाले समय में भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दे सकते हैं।

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