Sunday - 27 November 2022 - 7:42 AM

भारत के लिए अगले कुछ सप्ताह कितने अहम

डॉ. चंक्रपाणि पांडे

यदि किसी समस्या से निपटने के लिए आप के पास सीमित संसाधन है तो निश्चित ही उनमें जो बेहतर विकल्प है उसी का उपयोग करने में होशियारी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए 3 मई तक लॉकडाउन को बढ़ा दिया है। जाहिर है यह फैसला बहुत सोच-विचार और विशेषज्ञों से परामर्श करने के बाद ही लिया गया होगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने आज अपने संबोधन में कहा कि हमारे पास सीमित संसाधन है। यह सौ फीसदी सच है कि भारत की स्वास्थ्य सेवाएं इतनी अच्छी नहीं है कि वह कोरोना महामारी का मुकाबला कर सके। भारत का क्षेत्रफल बड़ा है और घनी आबादी है। ऐसे में संक्रमण फैलने का खतरा भी ज्यादा है। इतनी बड़ी आबादी का कोरोना टेस्ट कर पाना भी आसान काम नहीं है। इसलिए लॉकडाउन सबसे बेहतर विकल्प है। आज भारत दूसरे देशों की तुलना में अच्छी स्थिति में है तो उसमें लॉकडाउन बड़ी वजह है।

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देश में 30 जनवरी को कोरोना वायरस का पहला कंफर्म मामला सामने आया था। इस ढ़ाई माह की अवधि में सरकार ने कई कदम उठाए हैं। सरकार ने टेस्ट करने की क्षमता को बढ़ाया साथ में महामारी रोकने के लिए लोगों की भीड़ भाड़ को रोकने के लिए 122 साल पुराना सख्त कानून भी लागू कर दिया है। पिछले 21 दिनों से देश के एक अरब से ज्यादा लोग घरों में बंद हैं। लोग घरों में बंद है इसलिए भारत में स्थिति नियंत्रण में है।

अब तक देश में एक लाख अस्सी हजार से ज्यादा लोगों का कोरोना टेस्ट किया जा चुका है। इनमें 4.3 प्रतिशत सैंपल पॉजिटिव पाए गए हैं। इस महामारी से अब तक भारत में 300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। यह संक्रमण देश के 350 से ज्यादा जिलों में फैल चुका है। इस संक्रमण के कई हॉटस्पॉट इलाकों को चिन्हित भी किया गया है।

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भारत इस महामारी का सामना कैसे कर रहा है, इसको लेकर दुनिया भर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों की नजरें टिकी हैं। यदि भारत आने वाले समय में कोरोना पर नियंत्रण कर लेता है तो वह दुनिया के अन्य देशों के नजीर बनेगा। घनी आबादी और सीमित स्वास्थ्य सेवाओं के साथ कोरोना जैसी महामारी पर नियंत्रण पाना आसान काम नहीं है।

भारत के लिए तीन से चार सप्ताह अहम साबित होने वाले है। इसी दौरान तस्वीर साफ हो जायेगी। यह वायरस संक्रमण के शुरुआती दिन ही हैं। देश में एक्टिव मामले सात दिनों में दोगुने हो रहे हैं, यह पहले की तुलना में धीमी दर है। देश में मौत की भी दर कम है अब यह बढ़ रहा है, जो चिंता का विषय है।

हम सब जानते हैं कि देश में कम्यूनिटी ट्रांसमिशन की स्थिति है। इसलिए इसके साक्ष्य को तलाशने की जरूरत है। आने वाले दिनों का प्रत्येक सप्ताह बेहद अहम साबित होने वाला है। कोरोना संक्रमण के ग्राफ को सपाट बनाने के लिए अब कहीं ज्यादा निगरानी की जरूरत होगी कि कौन संक्रमित है और कौन संक्रमित नहीं है। इसके लिए भारत को लाखों टेस्टिंग किट और प्रशिक्षित तकनीशियनों की जरूरत होगी।

कोविड-19 संक्रमण का टेस्ट भी काफी जटिल प्रक्रिया है। इसमें यह सुनिश्चित करना होता है कि हजारों सैंपल लैब में ठीक से पहुंचाए जाएं। भारत के पास सीमित संसाधन हैं जिसकी क्षमता भी सीमित है। ऐसे में ‘पूल टेस्टिंग’ का रास्ता ही बचा हुआ है।

डब्ल्यूएचओ की अनुशंसाओं के अनुसार पूल टेस्टिंग में नाक और गले के स्वैब के कई सैंपल ट्यूब में लिए जाएंगे और इन सबका एक ही बार में रियल टाइम कोरोना वायरस टेस्ट किया जाएगा। अगर टेस्ट निगेटिव हुआ तो इसका मतलब होगा कि सबकी रिपोर्ट निगेटिव है। अगर रिपोर्ट पॉजिटिव निकली तो फिर समूह के प्रत्येक व्यक्ति का अलग अलग टेस्ट करना होगा। पूल टेस्टिंग से बड़ी आबादी का टेस्ट कम समय में संभव है। ऐसे में यदि किसी जिले में संक्रमण का कोई मामला नहीं है तो फिर उन जिलो को आर्थिक गतिविधियों के लिए खोला जा सकता है।

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देश के कई वायरोलॉजिस्टों का कहना है कि देश में ज्यादा से ज्यादा लोगों को टेस्ट करने की जरूरत है। कुछ वायरोलॉजिस्टों का मानना है कि बड़े पैमाने पर लोगों का एंटी बॉडी टेस्ट-उंगली से रक्त सैंपल लेकर भी किया जाना चाहिए। इससे लोगों के शरीर में प्रोटेक्टिव एंटीबाडीज की मौजूदगी का पता चलेगा।वहीं कुछ वायरोलॉजिस्टों का कहना है भारत को प्लाज्मा थेरेपी को भी देखने की जरूरत है। प्लाजमा थेरेपी में संक्रमण से उबरने वाले मरीज की अनुमति से उनके रक्त की जरूरत होगी। इसमें ज्यादा एंटी बॉडी वाले रक्त प्लाजमा को संक्रमित मरीज के रक्त में मिलाया जाता है। कई डॉक्टरों के अनुसारकोरोना संक्रमण के इलाज में यह उम्मीद भरा रास्ता हो सकता है।

कोरोना से निपटने की लड़ाई लंबी होने वाली है। ये सिर्फकुछ हफ्तों की बात नहीं लगती। संक्रमण के मामले कम होने के साथ ही हम सीधे सामान्य जीवन की ओर नहीं लौट सकते। अगर हम लॉकडाउन खत्म कर देते तो ये हो सकता था कि कोरोना विस्फोटक रूप ले लेती। बिना लॉकडाउन वाली स्थिति में एक संक्रमित व्यक्ति औसतन तीन व्यक्ति को संक्रमित करेगा। लॉकडाउन के वजह से इस दर में करीब 60 से 70 फीसदी की गिरावट आ गई है। लॉकडाएन की वजह से 70 फीसदी से ज्यादा संक्रमण को रोकने में कामयाबी मिली है। अब जब 19 दिन के लिए लॉकडाउन बढ़ा दिया गया है आने वाले दिनों में पता चलेगा कि भारत में संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ेंगे या भारत ने संक्रमण को फैलने से रोकने में कामयाबी हासिल कर ली है।

(डा. चक्रपाणि पांडेय वरिष्ठ फीजिशियन हैं। वह कई हेल्थ जर्नल में नियमित लिखते हैं।) 

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