तमिलनाडु: विरुधुनगर पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट में अब तक 23 की मौत

विरुधुनगर। तमिलनाडु में लोकतंत्र के उत्सव (विधानसभा चुनाव) से ठीक चार दिन पहले एक भीषण त्रासदी ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है।

विरुधुनगर जिले के कत्तनारपट्टी में रविवार को एक पटाखा निर्माण इकाई में हुए जबरदस्त विस्फोट में कम से कम 23 मजदूरों की जान चली गई है। यह हादसा तब हुआ है जब राज्य आगामी गुरुवार (23 अप्रैल) को होने वाले मतदान की तैयारियों में जुटा था।

रेस्क्यू के दौरान दूसरा धमाका: प्रशासन भी आया चपेट में

जिला कलेक्टर डॉ. एन.ओ. सुखपुत्र के अनुसार, राहत कार्य के दौरान स्थिति तब और गंभीर हो गई जब मलबे में एक और विस्फोट हुआ। इस दूसरे ब्लास्ट की चपेट में आकर बचाव कार्य में जुटे पुलिसकर्मी, फायर फाइटर्स और राजस्व विभाग के कर्मचारियों सहित 13 लोग घायल हो गए हैं।

  • मृतकों का विवरण: अब तक पहचाने गए 19 शवों में 16 महिलाएं और 3 पुरुष शामिल हैं।
  • घायलों की स्थिति: 6 मजदूर वर्तमान में आईसीयू (ICU) में जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हैं।
  • नुकसान: धमाका इतना भीषण था कि फैक्ट्री की इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई।

चुनावी माहौल के बीच पसरा सन्नाटा

महज 72 घंटे बाद होने वाले मतदान से पहले इस घटना ने सुरक्षा मानकों पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस को आशंका है कि मलबे के नीचे और भी शव दबे हो सकते हैं, क्योंकि हादसे के वक्त यूनिट के भीतर लगभग 30 लोग मौजूद थे।

सरकार की त्वरित प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे अपूरणीय क्षति बताया है। उन्होंने प्रशासन को निम्नलिखित कड़े निर्देश दिए हैं:

  1. मंत्रियों की तैनाती: कैबिनेट मंत्री के.के.एस.एस.आर. रामचंद्रन और थंगम थेन्नारासु को तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत कार्यों की कमान संभालने को कहा गया है।
  2. वरिष्ठ निगरानी: एक वरिष्ठ IAS अधिकारी को पूरे जिले में राहत और बचाव कार्यों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
  3. कानूनी कार्रवाई: जिला प्रशासन ने घटना के संबंध में FIR दर्ज कर ली है और विस्फोट के कारणों की गहन जांच शुरू कर दी गई है।

“हमारी प्राथमिकता वर्तमान में घायलों को सर्वोत्तम उपचार प्रदान करना और पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता सुनिश्चित करना है।” – डॉ. एन.ओ. सुखपुत्र, जिला कलेक्टर

राज्य में यह लगातार दूसरा दिन है जब किसी बड़ी दुर्घटना ने जनजीवन को प्रभावित किया है, जिससे प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों पर दबाव बढ़ गया है।

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