SIR विवाद: पंजाब, कर्नाटक और तेलंगाना में वोटर लिस्ट रिवीजन पर BJP ने उठाए सवाल

चुनाव आयोग देश के विभिन्न राज्यों में चरणबद्ध तरीके से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान चला रहा है। इस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची का सत्यापन और अपडेट किया जा रहा है। फिलहाल पंजाब, कर्नाटक और तेलंगाना समेत कई राज्यों में यह अभियान जारी है।

हालांकि, इन राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सत्ता में नहीं है, लेकिन पार्टी ने यहां चल रही SIR प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं और चुनाव आयोग से शिकायत भी की है।

पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले SIR प्रक्रिया राजनीतिक मुद्दा बन गई है।

BJP का आरोप है कि:

  • SIR की आड़ में राज्य सरकार की योजनाओं का प्रचार कराया जा रहा है।
  • चुनावी ड्यूटी पर तैनात अधिकारी सरकारी योजनाओं से जुड़ा डेटा एकत्र कर रहे हैं।
  • मतदाताओं को योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
  • किरायेदार मतदाताओं से रजिस्टर्ड रेंट एग्रीमेंट और मकान मालिक का शपथपत्र जैसे ऐसे दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, जो चुनाव आयोग की अनिवार्य सूची में शामिल नहीं हैं।

BJP के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने चुनाव आयोग से इन गतिविधियों पर रोक लगाने और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देने की मांग की है।

कर्नाटक में BJP और उसकी सहयोगी जनता दल (सेक्युलर) ने भी SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

विपक्ष का आरोप है कि:

  • बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर सत्यापन नहीं कर रहे।
  • मतदाताओं से कम्युनिटी हॉल, मस्जिदों और BLO के घरों में फॉर्म भरवाए जा रहे हैं।
  • मतदाताओं को बुलाने के लिए WhatsApp ग्रुप बनाए गए हैं, जो चुनाव आयोग की गाइडलाइंस के खिलाफ है।

इस मामले में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी, शोभा करंदलाजे और JDS नेता एचडी कुमारस्वामी ने भी चुनाव आयोग को पत्र भेजकर जांच की मांग की है।

वहीं, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राज्य सरकार का SIR प्रक्रिया में कोई हस्तक्षेप नहीं है।

कांग्रेस शासित तेलंगाना में भी BJP ने SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

प्रदेश BJP अध्यक्ष एन. रामचंदर राव का कहना है कि:

  • BLO को हर घर तक पहुंचना चाहिए।
  • यदि मतदाता घर पर नहीं मिले तो कम से कम तीन बार संपर्क किया जाए।

BJP का आरोप है कि हैदराबाद के पुराने शहर में घर-घर जाकर फॉर्म देने के बजाय कुछ स्थानों पर AIMIM नेताओं द्वारा लगाए गए कैंपों में बड़ी संख्या में फॉर्म वितरित किए जा रहे हैं।

पार्टी नेता मारी शशिधर रेड्डी ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ क्षेत्रों की मतदाता सूची में अवैध घुसपैठियों के नाम शामिल किए गए हैं। BJP और BRS दोनों ने SIR प्रक्रिया के लिए समय सीमा बढ़ाने की मांग की है।

SIR को लेकर तीन राज्यों में अलग-अलग आरोप सामने आने के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। फिलहाल चुनाव आयोग की ओर से इन सभी आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

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