राम मंदिर चंदा चोरी मामला: CCTV फुटेज हटाने के पीछे कौन?

अयोध्या। राम मंदिर चंदा चोरी मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे सामने आ रहे हैं। विशेष जांच दल (SIT) की पड़ताल में ऐसे संकेत मिले हैं कि दान राशि से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्यों को मिटाने के लिए CCTV फुटेज के साथ छेड़छाड़ की गई हो सकती है। हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जांच एजेंसियों को मिले संकेत मामले को और गंभीर बना रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, SIT ने मंदिर परिसर में लगे CCTV कैमरों की स्थिति और रिकॉर्डिंग सिस्टम की गहन जांच की है। जांच के दौरान कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे यह आशंका मजबूत हुई है कि चोरी और गबन से जुड़े सबूत मिटाने के लिए फुटेज हटाई या बदली गई हो सकती है। यदि यह आरोप सही साबित होता है तो मामले में कई प्रभावशाली लोगों की भूमिका पर सवाल खड़े हो सकते हैं।

SIT की टीम पिछले कई दिनों से अयोध्या में डेरा डाले हुए है। टीम राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्ट सदस्य गोपाल राव समेत कई पदाधिकारियों, कर्मचारियों, पुजारियों और बैंक अधिकारियों से पूछताछ कर रही है।

सूत्रों का दावा है कि पूछताछ के दौरान कई जिम्मेदार लोग महत्वपूर्ण सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं दे पा रहे हैं। वहीं दान राशि के रिकॉर्ड में भी कई विसंगतियां और अस्पष्टताएं सामने आई हैं, जिससे जांच और जटिल हो गई है।

जांच एजेंसी ने इस मामले में पूछताछ के लिए करीब 200 लोगों की सूची तैयार की है। इनमें से लगभग 125 लोगों से पूछताछ की जा चुकी है। कई व्यक्तियों से एक से अधिक बार भी सवाल-जवाब किए गए हैं ताकि तथ्यों की पुष्टि की जा सके।

रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव से SIT ने तीसरे दिन लंबी पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक टिन्नू ने खुद को किसी भी गबन या चोरी में शामिल होने से इनकार किया। उसने दावा किया कि वह केवल मंदिर की व्यवस्थाओं को देखता था और दान राशि की गणना में उसकी कोई भूमिका नहीं थी।

पूछताछ के दौरान टिन्नू यादव ने ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा का नाम लेते हुए दान राशि की निगरानी और गणना की जिम्मेदारी उनके ऊपर बताई। साथ ही उसने तीन गणना प्रभारी (काउंटिंग इंचार्ज) का भी जिक्र किया, जिन पर दान राशि की गिनती की जिम्मेदारी होने की बात कही।

मामले में पकड़े गए पांच संदिग्धों से भी SIT पूछताछ कर चुकी है। उनके पास से कथित रूप से रकम बरामद हुई थी। सूत्रों के अनुसार इन संदिग्धों ने कई अन्य नामों का भी खुलासा किया है, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि SIT जांच के दौरान एफआईआर दर्ज कराएगी या जांच पूरी होने के बाद कार्रवाई होगी। फिलहाल इस मामले में एफआईआर दर्ज होने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

दान राशि की गिनती प्रक्रिया में बैंक कर्मचारियों की मौजूदगी अनिवार्य होती थी। शुरुआती जांच में बैंकिंग प्रक्रिया में भी गंभीर लापरवाही के संकेत मिले हैं। सूत्रों के मुताबिक कुछ बैंक कर्मियों ने स्वीकार किया है कि वे ट्रस्ट पदाधिकारियों के दबाव में रहते थे, जिसके कारण वे प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं कर पाते थे।

SIT को मिले शुरुआती संकेतों और संदिग्धों के बयानों ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। यदि CCTV फुटेज से छेड़छाड़ और दान राशि में गड़बड़ी के आरोप साबित होते हैं तो कई बड़े और प्रभावशाली नाम जांच के दायरे में आ सकते हैं। फिलहाल पूरे प्रदेश की नजर SIT की अगली कार्रवाई और संभावित एफआईआर पर टिकी हुई है।

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