तमिलनाडु विधानसभा में गरमाई राजनीति, उदयनिधि स्टालिन ने सनातन पर फिर दिया बयान

तमिलनाडु में नई सरकार के गठन के बाद विधानसभा सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को राजनीतिक माहौल एक बार फिर गर्म हो गया। विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने सदन में दिए अपने बयान में सनातन व्यवस्था पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “जनता को विभाजित करने वाली सनातन व्यवस्था को खत्म किया जाना चाहिए।”

उदयनिधि के इस बयान के बाद सदन में राजनीतिक हलचल जरूर दिखी, हालांकि सत्ता पक्ष या विधानसभा अध्यक्ष की ओर से इस पर किसी तरह की तत्काल आपत्ति दर्ज नहीं की गई।

विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान उदयनिधि स्टालिन ने स्पीकर जे. सी. टी. प्रभाकर की भूमिका पर भरोसा जताते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि वे निष्पक्ष तरीके से सदन का संचालन करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि डिप्टी स्पीकर रविकुमार से भी सहयोग की अपेक्षा है।

इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की कार्यशैली का उल्लेख करते हुए कहा कि नई सरकार ने सभी राजनीतिक दलों से संवाद की पहल की है, जिसे विधानसभा में भी जारी रहना चाहिए।

उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि उनकी पार्टी डीएमके शत्रु विपक्ष की बजाय “रचनात्मक विपक्ष” के रूप में काम करेगी। उन्होंने दावा किया कि तमिलनाडु विधानसभा देश के सबसे सक्रिय और बहस-प्रधान सदनों में रही है, और इस परंपरा को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि डीएमके का शासन अनुभव लंबा रहा है और 1967 से पार्टी राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है।

अल्पमत सरकार को लेकर टिप्पणी करते हुए उदयनिधि ने कहा कि भले ही जनता ने पूर्ण बहुमत नहीं दिया हो, फिर भी नई सरकार को वह शुभकामनाएं देते हैं, क्योंकि वह सहयोगी दलों के समर्थन से सत्ता में आई है।

सबसे ज्यादा चर्चा उनके उस बयान को लेकर रही जिसमें उन्होंने सनातन व्यवस्था को “विभाजनकारी” बताते हुए इसे समाप्त करने की बात कही। सदन में मौजूद मुख्यमंत्री और स्पीकर की ओर से इस बयान पर कोई आपत्ति न जताए जाने को भी राजनीतिक हलकों में ध्यान से देखा जा रहा है।

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