मिडिल ईस्ट में महायुद्ध! ट्रंप की ‘शांति डील’ हवा में उड़ी, इजराइल ने ईरान के 15 ठिकानों पर की भीषण बमबारी; न्यूक्लियर प्लांट पर खतरा

वाशिंगटन/तेहरान। मिडिल ईस्ट (पूर्वोत्तर देश) इस समय इतिहास के सबसे बड़े सैन्य संकट मुहाने पर खड़ा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक तरफ तेहरान के साथ ‘ऐतिहासिक शांति समझौते’ का दावा कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ उनके सबसे भरोसेमंद ‘युद्ध मित्र’ और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान पर सीधे हमले बोलकर इन दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। इजराइली वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने ईरान की सीमा में घुसकर उसके 15 सैन्य ठिकानों को मटियामेट कर दिया है, जिसके बाद सीजफायर की उम्मीदें पूरी तरह खत्म हो गई हैं।

यह हमला इस मायने में ऐतिहासिक है क्योंकि सीजफायर के प्रयासों के बीच इजराइल ने पहली बार ईरान के पेट्रोकेमिकल और ऑयल प्लांट्स को सीधे निशाना बनाया है।

राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले 24 घंटों में जो कुछ भी हुआ, उसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक रूप से डोनाल्ड ट्रंप की साख पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • परदे के पीछे की तकरार: हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप और नेतन्याहू के बीच फोन पर तीखी बहस हुई थी, जिसमें ट्रंप ने इजराइली रुख को लेकर नाराजगी जताई थी।
  • मिसाइलों से दिया जवाब: ऐसा लगता है कि नेतन्याहू ने अमेरिकी दबाव को दरकिनार करते हुए अपनी मिसाइलों से ट्रंप की शांति वार्ता की कोशिशों को ही उड़ा दिया है।

इजराइल डिफेंस फोर्सेस (IDF) के चीफ ऑफ स्टाफ इयाल ज़मीर के मुताबिक, ईरान के अटैक सिस्टम को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए चुन-चुनकर ठिकानों को टारगेट किया गया। तेहरान, तबरीज़, करमनशाह और इस्फ़हान जैसे बड़े शहरों में भीषण धमाके सुने गए:

टारगेट का प्रकारनुकसान का विवरणइजराइल का मुख्य मकसद
मिसाइल लॉन्च साइट्सतेहरान और तबरीज़ में पूरी तरह तबाहईरान की जवाबी हमला करने की क्षमता रोकना
पेट्रोकेमिकल व ऑयल प्लांटपहली बार भीषण हवाई हमलाआर्थिक रीढ़ को चोट पहुंचाना
ड्रोन बेस और कमांड सेंटरपश्चिमी और मध्य ईरान में भारी नुकसानएयर डिफेंस को पंगु बनाना

इस हमले से बौखलाए ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने भी इजराइल पर ताबड़तोड़ बैलिस्टिक मिसाइलें दाग दी हैं।

  • रमत डेविड बेस को निशाना: ईरान का दावा है कि उसने इजराइल के प्रमुख रमत डेविड एयरबेस पर सीधा सटीक निशाना लगाया है।
  • डिप्लोमेटिक प्रेशर: ईरान के विदेश मंत्री अरागची ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ब्रिटेन, फ्रांस, पाकिस्तान, मिस्र, कतर और तुर्किये के विदेश मंत्रियों को फोन घुमाकर कड़ा कूटनीतिक संदेश दिया है।

IRGC की सीधी चेतावनी: ईरान के प्रवक्ता इब्राहिम जुल्फिकार ने साफ कहा है कि अगर इजराइल ने लेबनान और बेरूत में अपनी सैन्य कार्रवाई तुरंत नहीं रोकी, तो अंजाम और भी ज्यादा भुगतना होगा।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति का रुख बेहद विरोधाभासी नजर आ रहा है। एक तरफ वे सोशल मीडिया पर ‘बड़ी डील’ की उम्मीद जताते हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिका की सेना को हाई अलर्ट पर रख दिया गया है। ओमान की खाड़ी और अरब सागर में अमेरिकी सर्वेलेंस ड्रोन (MQ-4C) और P-8A पोसाइडन विमान पैट्रोलिंग कर रहे हैं।

ट्रंप का अगला खतरनाक प्लान: ट्रंप ने साफ संकेत दिए हैं कि अगर ईरान उनकी शर्तों पर समझौता नहीं करता, तो अमेरिकी सेना ईरान के न्यूक्लियर प्लांट्स (परमाणु ठिकानों) को पूरी तरह नष्ट कर देगी और उसके भीतर घुसकर संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) को अपने कब्जे में ले लेगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, यहां दो ही थ्योरियां काम कर रही हैं। पहली यह कि ट्रंप दुनिया के सामने शांति की बात कर रहे हैं और नेतन्याहू के जरिए सैन्य दबाव बनवा रहे हैं (गुड कॉप-बैड कॉप स्ट्रैटेजी)। दूसरी थ्योरी यह कि नेतन्याहू अब किसी के नियंत्रण में नहीं हैं। वजह जो भी हो, यह टकराव अब एक ऐ

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