चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी की पार्टी पर अस्तित्व का संकट, ‘टॉलीवुड ब्रिगेड’ की चुप्पी ने बढ़ाया सस्पेंस

साल 1998 में गठन के बाद से ही अपनी ‘फायरब्रांड’ छवि और ग्लैमर के दम पर बंगाल की सत्ता पर राज करने वाली ममता बनर्जी इस समय अपने राजनीतिक जीवन के सबसे कठिन दौर से गुजर रही हैं। विधानसभा चुनाव 2026 में बीजेपी के हाथों मिली करारी शिकस्त के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) ताश के पत्तों की तरह बिखरती नजर आ रही है।

एक तरफ जहां पूर्व सांसद ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में 59 विधायकों ने बगावत का बिगुल फूंक दिया है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी की सबसे बड़ी ताकत कही जाने वाली ‘टॉलीवुड ब्रिगेड’ (फिल्मी हस्तियों) ने इस संकट की घड़ी में रहस्यमयी चुप्पी साध ली है।

ममता बनर्जी ने हमेशा से अपनी राजनीति में सिनेमा, खेल और टेलीविजन जगत के बड़े चेहरों पर भरोसा किया और उन्हें सांसद-विधायक बनाया। शताब्दी रॉय, देव (दीपक अधिकारी), मिमी चक्रवर्ती, नुसरत जहां, रचना बनर्जी और सयानी घोष जैसे बड़े नाम इस ब्रिगेड का हिस्सा रहे हैं।

  • सक्रिय सांसद सयानी घोष गायब: पार्टी की सबसे मुखर युवा चेहरा और सांसद सयानी घोष ने बगावत के बाद से पूरी तरह चुप्पी साध रखी है। शुरुआत में वह कालीघाट की बैठक में दिखी थीं, लेकिन हालिया धरने और बैठकों से उन्होंने दूरी बना ली है।
  • सुपरस्टार देव अधिकारी ने बीजेपी को दी बधाई: जहां टीएमसी के शीर्ष नेता चुनाव में धांधली के आरोप लगा रहे हैं, वहीं पार्टी के सबसे बड़े स्टार और सांसद देव अधिकारी ने 6 मई को खुलकर बीजेपी को उसकी जीत की बधाई दे डाली।
  • परमब्रत चटर्जी भी खामोश: चुनाव में टीएमसी के लिए जमकर पसीना बहाने वाले अभिनेता-निर्देशक परमब्रत चटर्जी ने भी इस पूरे बगावती संकट पर मौन व्रत धारण कर लिया है।

पार्टी के भीतर इस समय स्पष्ट रूप से दो धड़े नजर आ रहे हैं। एक जो ममता बनर्जी को बचाने की कोशिश में जुटा है और दूसरा जो नई मंजिल तलाश रहा है।

  • ऋतब्रत बनर्जी की खुली बगावत: पूर्व सांसद ऋतब्रत बनर्जी ने 58 अन्य विधायकों के साथ विधानसभा अध्यक्ष (Speaker) को पत्र सौंपकर खुद को “असली तृणमूल” घोषित कर दिया है और वे विपक्ष के नेता बनने की रेस में हैं।
  • काकोली घोष दस्तीदार के बागी तेवर: बारासात की कद्दावर महिला सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने टीएमसी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्हें हाल ही में नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की बैठक में भी देखा गया है।
  • मनोज तिवारी का इस्तीफा: पूर्व क्रिकेटर और निवर्तमान खेल मंत्री मनोज तिवारी ने चुनाव हारने के ठीक अगले दिन 5 मई को पार्टी छोड़ दी और खेल मंत्री अरूप बिस्वास पर तीखा हमला बोला।

इस महा-संकट के बीच कुछ ऐसे भी चेहरे हैं जो ढाल बनकर ममता बनर्जी के साथ खड़े हैं। वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी और डेरेक ओ’ब्रायन कानूनी लड़ाई से लेकर धरने के मंच तक ममता के साथ डटे हुए हैं। वहीं, कृष्णानगर की सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर बागी गुट को फर्जी करार देते हुए ममता का पुरजोर समर्थन किया है। इसके अलावा डोला सेन, चंद्रिमा भट्टाचार्य और नैना बनर्जी (सुदीप बनर्जी की पत्नी) लगातार ममता के साथ मंच साझा कर रही हैं।

बाबुल सुप्रियो का फेसबुक पोस्ट: बीजेपी से टीएमसी में आए गायक और राज्यसभा सांसद बाबुल सुप्रियो ने इस बुरे दौर में खुलकर ममता बनर्जी का बचाव किया है। उन्होंने फेसबुक पर लंबी पोस्ट लिखकर कहा, “अच्छे समय में भले ही न हों, लेकिन बुरे समय में मैं दीदी के साथ मजबूती से खड़ा रहूंगा।”

ममता सरकार के सबसे मुखर चेहरों में से एक रहे शिक्षा मंत्री ब्रत्या बसु भी हार के बाद से न तो मीडिया के सामने आए हैं और न ही सार्वजनिक रूप से दिखाई दिए हैं। उनका यह रुख भी कई तरह के कयासों को जन्म दे रहा है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति अब एक नए चौराहे पर खड़ी है। ममता-अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व के खिलाफ उठी यह बगावत क्या तृणमूल कांग्रेस के अस्तित्व को समाप्त कर देगी, या ममता एक बार फिर अपनी ‘फायरब्रांड’ राजनीति से वापसी करेंगी? आने वाले कुछ दिन बेहद निर्णायक होने वाले हैं।

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