Thursday - 1 October 2020 - 1:01 PM

क्या ममता के राज में प्रेस की आजादी सचमुच खतरे में है?

  •  तालाबंदी के दौरान घटी कुछ घटनाओं के बाद जोर पकडऩे लगा है यह मुद्दा
  • विपक्षी दलों ने ममता सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

न्यूज डेस्क

पश्चिम बंगाल में अब एक नया मुद्दा जोर पकड़ने लगा है। यह मुद्दा है प्रेस की आजादी पर संकट। ममता बनर्जी सरकार, विरोधी दलों और राज्यपाल जगदीप धनकड़ के निशाने पर हैं। सरकार पर आरोप लगाया जा रहा है कि ममता बनर्जी के राज में प्रेस की आजादी खतरे में हैं।

कोरोना महामारी के बीच जारी तालाबंदी के दौरान घटी कुछ घटनाओं के बाद यह मुद्दा जोर पकड़ने लगा है। राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने तो सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस मुद्दे को लेकर राज्यपाल ने कोलकाता प्रेस क्लब के पदाधिकारियों के साथ बैठक भी की है।

ताजा मामले में कोलकाता पुलिस की ओर से आनंद बाजार पत्रिका अखबार के संपादक अनिर्वाण चौधरी को एक खबर के सिलसिले में पूछताछ और उसके बाद उनके संपादक पद से इस्तीफे से प्रेस की आजादी के मुद्दे पर बहस छिड़ गई है।

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राज्यपाल जगदीप धनखड़ और सीपीएम के प्रदेश सचिव सूर्यकांत मिश्र ने पुलिस के समन और संपादक से पूछताछ को प्रेस की आजादी का गला घोंटने का प्रयास करार दिया है।

राज्यपाल धनकड़ ने अपने एक ट्वीट में कहा है कि, “प्रेस की आजादी पर कोई समझौता नहीं हो सकता। यह लोकतंत्र की रीढ़ है और इसे संवैधानिक गारंटी मिली हुई है।” राज्यपाल ने गृह सचिव आलापन बनर्जी से इस बारे में विस्तृत जानकारी मांगी है।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस मामले में जहां राज्यपाल ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया है वहीं सीपीएम के सचिव सूर्यकांत मिश्र इसके लिए केंद्र की मोदी सरकार को जिम्मेदार मानते हैं।

वह सवाल करते हुए कहते हैं, “क्या कुछ फर्जी आरोपों के तहत अनिर्वाण चटर्जी को गिरफ्तार करने की तैयारी चल रही है? क्या मोदी सरकार इसके जरिए बदला निकालने का प्रयास कर रही है?”

यहां इस बात का जिक्र करना जरूरी है क्योंकि आनंद बाजार पत्रिका समूह का अंग्रेजी अखबार द टेलीग्राफ लगातार मोदी सरकार और उसके कामकाज के खिलाफ आवाज उठाता रहा है।

फिलहाल जिस तरह दिल्ली की मीडिया पर केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी की शरण में जाने के आरोप लगते हैं वैसी ही कुछ स्थिति पश्चिम बंगाल में भी बन रही है। सीएम ममता बनर्जी अक्सर कई मामलों में गलत सूचनाएं और अफवाहें फैलाने के लिए मीडिया को कठघरे में खड़ा करती रही हैं।

चटर्जी के खिलाफ क्यों हुई एफआईआर

आनंदबाजार पत्रिका अखबार के संपादक अनिर्वाण चौधरी के खिलाफ आखिर एफआईआर क्यों दर्ज हुआ? इसको लेकर जानकारों का कहना है कि अखबार ने हाल ही में एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसमें कहा गया था कि कोविड-19 अस्पतालों में निजी सुरक्षा उपकरण यानी पीपीई की सप्लाई जरूरत के मुकाबले बहुत कम है।

इस रिपोर्ट पर स्वास्थ्य विभाग ने आपत्ति जताते हुए गृह मंत्रालय से शिकायत की। उसी के बाद कोलकाता के हेयर स्ट्रीट थाने में एफआईआर दर्ज की गई। उसके बाद पुलिस ने पूछताछ के लिए संपादक को समन भेजा।

चटर्जी ने पहले तो कोरोना संक्रमण और अपनी उम्र (62) का हवाला देते हुए थाने जाने से मना कर दिया था, लेकिन बाद में पता चला कि उनसे लगभग छह घंटे तक पूछताछ की गई थी। उसके अगले दिन ही उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। अब उनकी जगह ईशानी दत्त राय को नया संपादक बनाया गया है।

इस मामले में खुद अनिर्वाण चौधरी या पत्रिका समूह ने इस मामले पर कोई टिप्पणी करने से इंकार कर दिया है। समूह के एक अधिकारी दावा करते हैं कि चार साल से काम करने वाले अनिर्वाण ने निजी वजहों से इस्तीफा दिया है।

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आनंदबाजार समूह की ममता से है पुरानी दुश्मनी

ऐसा कहा जाता है कि देश के प्रमुख मीडिया घरानों में शुमार आनंदबाजार समूह से सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की दुश्मनी पुरानी है। इसकी वजह यह धारणा है कि वर्ष 2016 में समूह ने अपने अखबारों के जरिए विधानसभा चुनावों में ममता और उनकी पार्टी के खिलाफ तथाकथित अभियान चलाया था। बावजूद इसके ममता बनर्जी भारी बहुमत के साथ सत्ता में लौटी थी। ममता के सत्ता में लौटने के बाद समूह के प्रमुख अवीक सरकार को निदेशक मंडल के प्रमुख के साथ ही संपादक का पद भी छोडऩा पड़ा था।

ममता को घेरने की तैयारी में विपक्षी दल

इस मुद्दे को लेकर राज्यपाल धनकड़ समेत तमाम विपक्षी दलों ने प्रेस की आजादी को मुद्दा बनाते हुए ममता सरकार को घेरने की तैयारी कर ली है। राज्यपाल ने ममता सरकार पर आरोप लगाते हुए कहते हैं- “राज्य सरकार फर्जी मामले दायर कर पत्रकारों के परेशान करने और प्रेस की आजादी का गला घोंटने का प्रयास कर रही है। लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी के अलावा कांग्रेस नेता अब्दुल मन्नान और सीपीएम व बीजेपी के नेताओं ने भी मुझसे इस बात की शिकायत करते हुए इस प्रवृत्ति पर चिंता जताई है।”

धनकड़ का कहना है कि अगर पुलिस आनंद बाजार पत्रिका जैसे बड़े अखबार के संपादक को पूछताछ के लिए बुलाया जाता है तो यह राज्यपाल के लिए चिंता का विषय है। पत्रकारों को फर्जी मामलों में फंसाना भी चिंता की बात है।

तृणमूल कांग्रेस ने कोई टिप्पणी करने से किया इंकार

राज्यपाल के साथ कोलकाता प्रेस क्लब के पदाधिकारियों की हुई बैठक पर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने कोई टिप्पणी करने से इंकार कर दिया है। पार्टी के एक नेता कहते हैं, “कोई भी किसी के साथ बैठक के लिए स्वतंत्र है। जब तक यह मामला हमारे समक्ष नहीं आता, हम कोई टिप्पणी नहीं कर सकते।”

वहीं दूसरी ओर बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव राहुल सिन्हा ने धनखड़ के कदम को सही ठहराया है। आरोप लगाते हुए वह कहते हैं, “राज्य सरकार पत्रकारों और मीडिया घरानों को बंदूक की नोक पर रखने की कोशिश कर रही है। कई पत्रकारों और संपादकों से पूछताछ की गई है। बंगाल में प्रेस को घेरा गया है।”

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