ईरान-अमेरिका तनाव: इस्लामाबाद वार्ता पर संकट के बादल, जंग की आहट और बढ़ी

ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक रस्साकशी एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। 22 अप्रैल को समाप्त हो रहे दो हफ्ते के युद्धविराम (Ceasefire) से ठीक पहले दोनों देशों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है, जिससे प्रस्तावित इस्लामाबाद शांति वार्ता के भविष्य पर सवालिया निशान लग गए हैं।
प्रमुख घटनाक्रम और बयानबाजी
- ईरान का कड़ा रुख: ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया कि ईरान दबाव में बातचीत नहीं करेगा। उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर लिखा कि अमेरिका वार्ता की मेज को “सरेंडर की टेबल” बनाना चाहता है। गालिबाफ ने चेतावनी दी कि यदि स्थिति बिगड़ी, तो ईरान युद्ध के मैदान में “नए पत्ते” (नए सैन्य कदम) दिखाएगा।
- ट्रंप की सीधी धमकी: पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तनाव को और हवा देते हुए कहा है कि यदि समझौता नहीं हुआ, तो ईरान पर फिर से बमबारी की जा सकती है। हालांकि, उन्होंने यह भी दावा किया कि दोनों पक्ष बातचीत के लिए सहमत थे, लेकिन अब ईरान के शामिल होने पर सस्पेंस बना हुआ है।
- अविश्वास की खाई: ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजेशकियान ने अमेरिका को अविश्वसनीय बताते हुए कहा कि वाशिंगटन केवल दबाव बनाकर तेहरान को झुकाना चाहता है, जो मुमकिन नहीं है।
इस्लामाबाद वार्ता: कौन शामिल होगा, कौन नहीं?
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने वाली इस बैठक को लेकर स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है
| पक्ष | स्थिति | मुख्य तर्क |
| अमेरिका | शामिल होगा | ट्रंप प्रशासन का कहना है कि उनकी टीम तय समय पर पहुंचेगी, चाहे ईरान आए या नहीं। |
| ईरान | अनिश्चित | सरकारी मीडिया के अनुसार, अमेरिका की बढ़ती मांगों और बदलते रुख के कारण ईरान इस बार किनारा कर सकता है। |
राजनयिक हलचल: पाकिस्तान की भूमिका
तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार से फोन पर चर्चा की है। अरागची ने अपनी चिंताओं को साझा करते हुए निम्नलिखित आरोप लगाए:
- अमेरिका लगातार सीजफायर का उल्लंघन कर उकसावे की कार्रवाई कर रहा है।
- ईरानी जहाजों (Ships) को अमेरिकी कार्रवाई से सीधा खतरा पैदा हो गया है।
- ईरान सभी सुरक्षा और राजनीतिक पहलुओं की समीक्षा के बाद ही वार्ता में शामिल होने का फैसला करेगा।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए शांति की उम्मीदें कम और टकराव के आसार ज्यादा नजर आ रहे हैं। यदि अमेरिका अपने रुख में नरमी नहीं लाता, तो 22 अप्रैल के बाद क्षेत्र में सैन्य तनाव एक नए और घातक स्तर पर पहुंच सकता है।



