Monday - 27 September 2021 - 12:49 AM

इतने अच्छे दिनों की उम्मीद न थी

सुरेंद्र दुबे

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का जादू ऐसा चलेगा इसकी तो कल्पना ही नहीं की जा सकती थी। पर अब जो हो रहा है उसकी चर्चा तो करनी ही पड़ेगी। नही करेंगे तो यह मलाल रहेगा कि एक अजूबी राजनीतिक घटना पर कोई चर्चा क्यों नहीं हुई।ग ोदी मीडिया की बात अलग है। वे तो खुद ही अजूबे बने हुए है।

इस देश के इतिहास में शायद ऐसा पहली बार हो रहा है जब किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता मूल पार्टी में लौटने के लिए पार्टी कार्यालय के सामने धरना देने की हद तक चले गए हो। लेकिन ऐसा हुआ पश्चिम बंगाल में। टीएमसी को छोड़कर भाजपा में गए एक जिले के कार्यकर्ता टीएमसी में वापस आने के लिए धरने पर बैठ गए। फिर क्या मजबूरन टीएमसी को 50 कार्यकर्ताओं को पार्टी में वापस लेना पड़ा।

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हो सकता है कि उस इलाके के सामाजिक समीकरणों ने कार्यकर्ताओं को ऐसा करने के लिए मजबूर किया हो। ये भी हो सकता है कि कार्यकर्ताओं के सामने पार्टी में वापसी का यही एक विकल्प बचा हो, पर जो हुआ वह अजूबा ही था।

अगर कुछ ऐसा भाजपा के पक्ष में हुआ होता तो गोदी मीडिया इसकी चर्चा करते नहीं थकती। मोदी और शाह की तारीफों के पुल बांधे जाते। कहा जाता की नया इतिहास रचा गया है, लेकिन इस गोदी मीडिया ने इस खबर की चर्चा नहीं की। दरअसल गोदी मीडिया जिस घटना में मोदी की वाहवाही न हो उसकी चर्चा करने को ये पत्रकारिता नहीं समझते।

भाजपा के सामने एक समस्या हो तो उससे निपटे। भाजपा के विधायक राज्यपाल से मिलने गए तो 24 विधायक लापता थे। जाहिर है कि सभी 72 विधायकों को राजभवन पहुंचने को कहा गया होगा। हो सकता है की गोदी मीडिया को इसमें भी चाणक्य का हाथ दिखे, लेकिन एक बात से मैं सहमत हूं।

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पश्चिम बंगाल में वाकई कानून-व्यवस्था की स्थिति बहुत खराब है। भाजपा के 72 विधायक राजभवन के लिए निकले और 24 विधायक राजभवन नहीं पहुंचे। ये किडनैप हो गए या गवर्नर के डर से वहां नहीं पहुंचे। इससे ज्यादा लॉ एण्ड ऑर्डर क्या खराब हो सकता है।

मैं तो कहता हूं कि गवर्नर को तो तुरत ममता सरकार को बर्खास्त कर देना चाहिए। यहीं मौका है कुछ कर गुजरने का। रिपोर्ट भेजने के चक्कर में ही नहीं पडऩा चाहिए। फिर उनकी कुर्सी पक्की। अगर गवर्नर ऐसा न करें तो केंद्र सरकार को उन्हे ही बर्खास्त कर देना चाहिए।

ऐसे राज्यपाल को कतई बने रहने का कोई अधिकार नहीं है जिसके राज्य में भाजपा के विधायक गायब हो जाते हों। लोकतंत्र भी कोई चीज हैं। उसकी रक्षा के लिए ममता सरकार को सत्ता से हटाना ही लोकतंत्र की रक्षा करना है।

(लेखक वरिष्‍ठ पत्रकार हैं, लेख उनके निजी विचार हैं)

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