हरियाणा: काला पानी पीने को मजबूर ग्रामीण, डेढ़ महीने से जारी आंदोलन

हिसार/हांसी: हरियाणा के हांसी जिले के चनौत गांव में पेयजल संकट को लेकर ग्रामीणों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। गांव के लोगों का आरोप है कि उन्हें कई दिनों तक पानी नहीं मिलता और जब सप्लाई होती भी है तो उसका रंग काला होता है, जिसे पीना तो दूर, घरेलू इस्तेमाल के लिए भी उपयुक्त नहीं माना जा सकता। हालात ऐसे हैं कि कई परिवार बाजार से पानी खरीदने या टैंकरों पर निर्भर हैं, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर लोग मजबूरी में वही दूषित पानी पीने को विवश हैं।

ग्रामीणों ने 16 मई से आंदोलन शुरू कर रखा है। उनकी मांग है कि हांसी शहर के लिए अमृत 2.0 योजना के तहत बिछाई जा रही 36 इंच की भाखड़ा पाइपलाइन से चनौत गांव को ‘टी-कनेक्शन’ दिया जाए, ताकि गांव को सीधे स्वच्छ पेयजल मिल सके।

ग्रामीणों का कहना है कि मौजूदा जलापूर्ति व्यवस्था पूरी तरह नाकाफी है। गांव की महिला नवीन देवी बताती हैं कि कई-कई दिनों तक पानी नहीं आता और जब आता है तो उसका रंग काला होता है। ऐसे पानी का इस्तेमाल केवल सफाई और कपड़े धोने में किया जाता है। पीने के लिए लोगों को टैंकर मंगाने पड़ते हैं या बोतलबंद पानी खरीदना पड़ता है।

उनका कहना है कि गांव के बच्चे और बुजुर्ग रोज सुबह सिर्फ पीने का पानी जुटाने में घंटों खर्च कर देते हैं। यह समस्या कोई नई नहीं, बल्कि कई वर्षों से बनी हुई है।

ग्रामीणों का कहना है कि चनौत गांव के पास से गुजर रही भाखड़ा पाइपलाइन से यदि टी-कनेक्शन दे दिया जाए तो गांव की जल समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है। उनका तर्क है कि बड़ी पाइपलाइन में पानी का दबाव बना रहेगा और रास्ते में अवैध कनेक्शन या पानी चोरी जैसी समस्याएं भी नहीं होंगी।

गांव के पूर्व सरपंच सत्यवान का कहना है कि अलग पाइपलाइन बिछाने से पुरानी समस्याएं दोबारा पैदा होंगी, जबकि मुख्य लाइन से जुड़ने पर बेहतर गुणवत्ता का पानी सीधे गांव तक पहुंचेगा।

प्रशासन ने ग्रामीणों की इस मांग को फिलहाल स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। हांसी के एसडीएम डॉ. राजेश खोथ के मुताबिक, अमृत 2.0 योजना का उद्देश्य केवल शहरी क्षेत्रों को पेयजल उपलब्ध कराना है। ऐसे में शहर के लिए बनाई जा रही पाइपलाइन से किसी गांव को सीधे जोड़ना योजना के नियमों के अनुरूप नहीं है।

प्रशासन का दावा है कि फिलहाल गांव को रोजाना लगभग पांच लाख लीटर पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा गांव के लिए करीब चार किलोमीटर लंबी अलग पाइपलाइन बिछाने का काम भी शुरू हो चुका है। इस परियोजना पर करीब 7.5 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

हालांकि ग्रामीण प्रशासन के इन दावों से सहमत नहीं हैं और उनका कहना है कि उन्हें आज भी स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं हो रहा।

चनौत गांव के आंदोलन को अब आसपास के कई गांवों का भी समर्थन मिलने लगा है। सर्वजातीय रोघी खाप के प्रधान सुमेर सिंह जागलान का कहना है कि यह सिर्फ एक गांव का नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के स्वच्छ पेयजल का मुद्दा है। उन्होंने कहा कि 24 गांव इस आंदोलन के समर्थन में खड़े हैं।

ग्रामीणों का दावा है कि आंदोलन के दौरान सरकार के प्रतिनिधि बताकर आए एक व्यक्ति ने भरोसा दिलाया था कि मुख्य पाइपलाइन पर टी-कनेक्शन लगाया जाएगा। इसके बाद पाइपलाइन पर कनेक्शन लगाने का काम शुरू हुआ और कई घंटे तक चला। इस आश्वासन के बाद गांव के लोगों ने अपना आमरण अनशन भी समाप्त कर दिया।

लेकिन अगले ही दिन प्रशासन ने इस टी-कनेक्शन को अवैध बताते हुए अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी और उसे हटाने का फैसला लिया।

ग्रामीणों का आरोप है कि टी-कनेक्शन हटाने पहुंचे प्रशासन का उन्होंने शांतिपूर्ण विरोध किया, लेकिन पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। कई प्रदर्शनकारियों पर गंभीर धाराओं में मुकदमे भी दर्ज किए गए।

वहीं पुलिस ने इन आरोपों से इनकार किया है। हांसी के एसपी विनोद कुमार का कहना है कि आंदोलन के दौरान सड़क जाम, सरकारी संपत्ति को नुकसान और पुलिस पर पथराव जैसी घटनाएं हुईं। उनके मुताबिक बिजली के पोल तोड़े जाने से करीब 90 लाख रुपये का नुकसान हुआ और पुलिसकर्मियों पर भी हमला किया गया। इसी आधार पर अलग-अलग मामलों में एफआईआर दर्ज की गई हैं।

एसपी का कहना है कि जिन लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई है, उनके खिलाफ वीडियो सहित अन्य साक्ष्य मौजूद हैं और जांच जारी है।

प्रशासन का कहना है कि अब तक 8 से 10 दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी है। एक ओर प्रशासन अलग पाइपलाइन को समाधान बता रहा है, वहीं ग्रामीण मुख्य पाइपलाइन से टी-कनेक्शन की मांग पर अड़े हुए हैं।

ऐसे में 16 मई से शुरू हुआ यह आंदोलन अब डेढ़ महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जारी है और चनौत गांव के लोगों के लिए स्वच्छ पेयजल का संकट अभी भी जस का तस बना हुआ है।

Related Articles

Back to top button