Hormuz Strait बंद होते ही भारत पर संकट! बढ़ सकती है महंगाई; CTI ने दी बड़ी चेतावनी

नई दिल्ली: पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच गहराते टकराव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ा दी है। इस बीच ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Hormuz Strait) को बंद किए जाने की खबरों के बाद भारत के प्रमुख व्यापारिक एवं औद्योगिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने गंभीर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि यदि होर्मुज लंबे समय तक बंद रहता है तो दुनिया 1970 के दशक के बाद के सबसे बड़े ऊर्जा संकट का सामना कर सकती है और भारत पर इसका सीधा असर देखने को मिलेगा।

CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे बड़ा ऊर्जा चोक पॉइंट माना जाता है। वैश्विक स्तर पर करीब 20 फीसदी कच्चे तेल की सप्लाई इसी समुद्री मार्ग से होती है। ऐसे में इसके बंद होने से भारत, चीन और अन्य बड़े आयातक देशों को कच्चे तेल की भारी कमी का सामना करना पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि तेल की आपूर्ति बाधित होने पर पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधनों की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है, जिसका असर परिवहन, विनिर्माण और आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों पर पड़ेगा।

CTI महासचिव रमेश आहूजा और वरिष्ठ उपाध्यक्ष दीपक गर्ग के अनुसार मार्च-अप्रैल 2026 में भारत की खुदरा महंगाई दर 3.4 फीसदी रही थी। इस दौरान पान-तंबाकू, खाद्य एवं पेय पदार्थ, कपड़े-फुटवियर, आवास, बिजली और रेस्तरां सेवाओं में भी कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।

बृजेश गोयल का कहना है कि यदि होर्मुज का रास्ता लंबे समय तक बाधित रहता है तो भारत में महंगाई दर 5 फीसदी से ऊपर जा सकती है, जिससे आम उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

1. तेल और गैस की आपूर्ति पर असर

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशियाई देशों से आयात करता है। देश का लगभग 60 फीसदी कच्चा तेल और 40 फीसदी एलएनजी होर्मुज मार्ग से होकर आता है। इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत से होने वाली सप्लाई प्रभावित होने पर ऊर्जा संकट गहरा सकता है।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि ऐसी स्थिति में कच्चे तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। इसके परिणामस्वरूप पेट्रोल की कीमत 140-150 रुपये प्रति लीटर और डीजल 130 रुपये प्रति लीटर से अधिक हो सकता है।

2. कई उद्योगों पर बढ़ेगा दबाव

तेल और गैस महंगे होने का असर केवल ईंधन तक सीमित नहीं रहेगा।

  • एविएशन सेक्टर: विमान ईंधन (ATF) महंगा होने से हवाई टिकट 40 से 50 फीसदी तक महंगे हो सकते हैं।
  • ऑटो, पेंट और प्लास्टिक उद्योग: पेट्रोलियम आधारित कच्चे माल की लागत बढ़ने से उत्पादन खर्च में भारी वृद्धि हो सकती है।
  • उर्वरक क्षेत्र: एलएनजी महंगी होने से यूरिया उत्पादन लागत और सरकारी सब्सिडी का बोझ बढ़ सकता है।
  • शिपिंग और व्यापार: माल ढुलाई दरों में 200 से 300 फीसदी तक बढ़ोतरी संभव है, जिससे आयात-निर्यात महंगा हो जाएगा।

3. रणनीतिक और सुरक्षा चुनौतियां

भारत के पास रणनीतिक तेल भंडार मौजूद हैं, लेकिन लंबे संकट की स्थिति में इन पर भी दबाव बढ़ सकता है। अरब सागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना की सक्रिय मौजूदगी के बावजूद युद्ध जैसी स्थिति बनने पर समुद्री बीमा लागत कई गुना बढ़ सकती है।

इसके अलावा भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार पोर्ट भी होर्मुज क्षेत्र के करीब स्थित है, जिस पर संकट का असर पड़ सकता है।

4. क्या भारत के पास विकल्प हैं?

भारत फिलहाल रूस से भी बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है, जो होर्मुज मार्ग पर निर्भर नहीं है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि रूस पूरी अतिरिक्त मांग को पूरा करने में सक्षम नहीं होगा।

देश के पास विशाखापट्टनम, मंगलूरु और पादुर में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार मौजूद हैं, लेकिन ये सीमित अवधि तक ही राहत दे सकते हैं। अमेरिका, ब्राजील और गुयाना जैसे देशों से तेल आयात संभव है, मगर वहां से तेल आने में अधिक समय और लागत लगेगी।

यदि होर्मुज संकट लंबा खिंचता है तो इसका असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है। पेट्रोल-डीजल महंगे होने से परिवहन लागत बढ़ेगी, जिसका असर खाद्य पदार्थों, उपभोक्ता वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी दिखाई देगा।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति और वैश्विक तेल बाजार की दिशा पर भारत समेत पूरी दुनिया की नजर रहेगी।

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