राहुल गांधी की ‘योग्यता’ पर विवाद तेज: गुहा के सवालों पर शशि थरूर का पलटवार, ओबामा–मोदी का दिया उदाहरण

जुबिली स्पेशल डेस्क
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की प्रधानमंत्री पद के लिए योग्यता को लेकर शुरू हुई बहस अब राजनीतिक विमर्श का बड़ा मुद्दा बनती जा रही है। प्रसिद्ध इतिहासकार रामचंद्र गुहा के बयान के बाद कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने खुलकर प्रतिक्रिया दी है और इस आलोचना को “बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया विवाद” बताया है।
दरअसल, रामचंद्र गुहा ने हाल ही में एक इंटरव्यू में राहुल गांधी के राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उनके पास प्रधानमंत्री बनने के लिए आवश्यक प्रशासनिक और विदेश नीति से जुड़ा अनुभव पर्याप्त नहीं है। उन्होंने यह भी पूछा कि व्यक्तिगत शालीनता और पारिवारिक राजनीतिक पृष्ठभूमि के अलावा राहुल गांधी को इस पद के लिए क्या विशेष रूप से योग्य बनाता है।
थरूर का जवाब: ‘अनुभव ही सब कुछ नहीं’
गुहा के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी शीर्ष नेता के लिए पहले से कार्यकारी अनुभव होना अनिवार्य नहीं है। थरूर ने उदाहरण देते हुए अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र किया।
उन्होंने लिखा कि जब ओबामा राष्ट्रपति बने, तब उनके पास सीमित राष्ट्रीय अनुभव था। इसी तरह नरेंद्र मोदी के पास भी प्रधानमंत्री बनने से पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर का व्यापक अनुभव नहीं था। इसके बावजूद दोनों नेताओं ने अपने-अपने देशों का प्रभावी नेतृत्व किया।
‘राहुल गांधी के पास वैश्विक संपर्क और टीम सपोर्ट’
थरूर ने राहुल गांधी के पक्ष में तर्क देते हुए कहा कि वह एक दशक से अधिक समय से राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हैं और एक प्रमुख पार्टी का नेतृत्व कर चुके हैं। उनके पास दुनिया भर के नेताओं से संपर्क हैं और उन्हें अनुभवी सलाहकारों का सहयोग भी मिलता है।
उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति अकेले फैसले नहीं लेता, बल्कि पूरी टीम और संस्थागत ढांचे के साथ काम करता है। ऐसे में केवल अनुभव के आधार पर किसी की योग्यता पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
‘बहस खत्म करने का समय’
थरूर ने अपने बयान के अंत में कहा कि इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से तूल दिया जा रहा है और अब इस विवाद को समाप्त कर रचनात्मक राजनीतिक चर्चा पर ध्यान देना चाहिए।
राजनीतिक संदेश क्या है?
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या शीर्ष नेतृत्व के लिए प्रशासनिक अनुभव अनिवार्य होना चाहिए, या फिर नेतृत्व क्षमता, राजनीतिक समझ और टीम मैनेजमेंट ज्यादा अहम हैं। आने वाले चुनावी माहौल में यह बहस और तेज हो सकती है।



