CJP Protest: दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस बल प्रयोग वाली याचिका पर तुरंत सुनवाई से किया इनकार

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद मार्च के दौरान कथित रूप से ज्यादा पुलिस बल के इस्तेमाल के आरोपों को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) पर दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मामले की सुनवाई बुधवार, 22 जुलाई को की जाएगी।

CJP के 20 जुलाई को हुए संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को एक वकील ने दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीजन बेंच के सामने तत्काल सुनवाई के लिए पेश किया था।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया। हालांकि, कोर्ट ने मामले को उसी दिन अर्जेंट लिस्ट में शामिल करने से इनकार कर दिया।

बेंच ने कहा, “कोर्ट को इस सब में मत घसीटो।”

याचिका में दावा किया गया है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई अनुपातहीन थी और इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप की जरूरत है।

हाई कोर्ट अब बुधवार को याचिका में लगाए गए आरोपों और उसमें मांगी गई राहतों पर विस्तार से सुनवाई करेगा।

उधर, दिल्ली पुलिस ने CJP के संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा, पत्थरबाजी और तोड़फोड़ के मामले में अब तक 5 FIR दर्ज की हैं।

पुलिस के अनुसार, ये FIR कनॉट प्लेस, पार्लियामेंट स्ट्रीट और अन्य संबंधित थानों में दर्ज की गई हैं। जांच एजेंसियां घटनास्थल के वीडियो फुटेज के जरिए आरोपियों की पहचान करने में जुटी हैं।

पुलिस करीब 250 से ज्यादा वीडियो फुटेज की जांच कर रही है। इसके अलावा यह भी पता लगाया जा रहा है कि हिंसा में शामिल लोगों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड है या नहीं।

गौरतलब है कि सोमवार को CJP की ओर से आयोजित ‘संसद चलो मार्च’ के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव बढ़ गया था। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सुरक्षा बलों ने कार्रवाई की, जिसमें कई प्रदर्शनकारी घायल हुए।

वहीं, पुलिस और सुरक्षाकर्मियों के कई जवानों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। घटना के बाद से पुलिस और प्रदर्शनकारियों की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।

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