जुबिली ज़िन्दगी
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व्यंग्य/बड़े अदब से : ये चाय न होती तो न जाने क्या होता
जरा सोचिए… ये चाय न होती तो क्या होता? क्या क्या नहीं होता। सबसे पहले तो यही है कि हमारे…
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गुड्डू खस्ते वाले : लोगों तक पहुंचने से पहले ही गायब हो जाते हैं
जब मोबाइल फोन नहीं हुआ करते थे तो लोग घर पर ही लाइन लगा देते थे और ठीहे तक पहुंचने…
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दो सौ छप्पन तरह की मिठाइयां बनाते हैं छप्पन भोग
प्रेमेन्द्र श्रीवास्तव कोई 28 साल पहले शहर के दूसरे कोने सदर क्षेत्र में एक मिठाई की दुकान छप्पन भोग के…
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श्री लस्सी कार्नर : स्वाद की रस्सी से खिचें आते हैं लोग
पुराने लोग बताते हैं कि फूलवाली गली में नन्दू जी की दूध दही की दुकान थी। उनके छह भाई थे।…
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