Saturday - 8 August 2020 - 2:14 AM

ओपिनियन

5 अगस्त अब राममंदिर संघर्ष यात्रा की अंतिम तारीख

राजेंद्र कुमार आप या कोई इसे अयोध्या का सौभाग्य कहे या दुर्भाग्य, इस तथ्य से इंकार नहीं कर सकता कि आजादी के बाद से अब तक कम से कम पांच ऐसी तारीखें अयोध्या के हिस्से ऐसी आई हैं, जिन्हें लेकर दावा किया गया कि उसका, और साथ ही देश का, …

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राम मंदिर: जिंदगी के झरोखे से

चन्‍द्र प्रकाश राय 1990 – 25 सितम्बर को गुजरात के सोमनाथ से अडवाणी जी ने रथयात्रा शुरू कर दिया था ।अडवाणी जी देश के लोकतंत्र की एक राष्ट्रीय पार्टी के दो बड़े नेताओ मे से एक और उसके अध्यक्ष थे जिसकी जिम्मेदारी देश के भविष्य के लिए लड़ने और शैडो …

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समीकरण साधने की मानसिकता ने की पुलिस व्यवस्था चौपट

केपी सिंह बिकरू में विकास दुबे ने 08 पुलिस कर्मियों को अपनी शैतानी सनक पूरी करने के लिए शहीद कर दिया था तो माहौल बहुत गरम हो गया था। सरकार से लेकर पुलिस अफसर तक राज्य की प्रभुता को चुनौती के मानिन्द्र इस घटना से इस कदर बिफरे हुए थे …

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गुरु न सही गुरु घंटाल तो हैं

सुरेन्द्र दुबे क्या आप कोई ऐसा गुरु जानते है जिसके पास कोई चेला न हो। चलिए अब इसी सवाल को अब दूसरी तरह से पूछ लेते है। क्या बगैर चेलों के कोई गुरु कहला सकता है। पर कलयुग की बलिहारी है कि लोग बगैर चेलों की भी गुरु बनने का …

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यह हमारे धैर्य और संयम की परीक्षा का समय है

कृष्णमोहन झा देश में कोरोना बेकाबू हो चुका है। शायद हम अब कोरोना संक्रमण के उस दौर में प्रवेश कर चुके हैं जब कोई भी यह दावे के साथ नहीं कह सकता कि वह कोरोना से पूरी तरह सुरक्षित है। अतिविशिष्ट से लेकर सामान्य श्रेणी तक के लोग कोरोना के …

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सवर्णवाद के छलावे में, सरकार फंसी सांसत में

के पी सिंह जातिवाद प्रेरित गिरोहबंदी देश में संवैधानिक शासन के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। एक ओर हाल में उग्र राष्ट्रवाद का उभार चर्चाओं कें केंद्र में था दूसरी ओर देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में जातिवाद उभार हिंदुत्व की छतरी को छेदने लगा है। …

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राजस्थान में कोरोना पर कुर्सी भारी

कृष्णमोहन झा राजस्थान में कुर्सी की लड़ाई रोज नया रूप लेती जा रही है और लगभग एक पखवाडे से जारी इस लड़ाई ने कोरोना की विपदा को बहुत पीछे छोड़ दिया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत रोज अपने पक्ष के विधायकों से मिलकर उनकी गिनती कर लेते हैं कि होटल में …

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बॉलीवुड में नेपोटिज्म के ‘वैक्सीन’ का भी है इंतजार

कुमार भवेश चंद्र कहते हैं सिनेमा समाज का आइना है। उसके आज को बताता है। उसके आने वाले कल के लिए रास्ता दिखाता है। लेकिन समाज को रास्ता दिखाते दिखाते सिनेमा कहीं भटक सा गया है। उद्योग बनकर यह केवल पैसे और शोहरत कमाने का जरिया बनकर रह गया है। …

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बातें करने से नहीं बल्कि अमल में लाने की जरूरत है

प्रीति सिंह पिछले कई सालों से प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करने या पूरी तरह से खत्म करने की बात की जा रही है। दुनिया भर के तमाम देश इसमें शामिल हैं, लेकिन साल दर साल पर्यावरण को लेकर जो रिपोर्ट आ रही है उससे तो यही लग रहा है …

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पुलिस और प्रशासन की संवेदनहीनता के लिए आखिर कौन है दोषी

केपी सिंह लखनऊ में अमेठी की एक महिला ने सरकार और प्रशासन की अनसुनी से क्षुब्ध होकर मुख्यमंत्री कार्यालय के सामने आत्मदाह की कोशिश की जिसमें महिला की बाद में मौत हो गई। उधर गाजियाबाद में एक पत्रकार को बदमाशों ने गोलियों से भून दिया क्योंकि उन्होंने अपनी भांजी के …

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