बंगाल में बंपर वोटिंग ने बदला सट्टा बाजार का मिजाज; फलोदी के दांव ने बढ़ाई टीएमसी की धड़कनें, जानें लेटेस्ट रेट

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण के बाद अब सबकी निगाहें नतीजों पर टिकी हैं। राज्य में हुए 92.47% के रिकॉर्ड मतदान ने सियासी पंडितों के साथ-साथ सट्टा बाजार के समीकरणों को भी पूरी तरह उलट दिया है। राजस्थान का मशहूर फलोदी सट्टा बाजार, जो अक्सर अपने चुनावी अनुमानों के लिए चर्चा में रहता है, इस बार बंगाल में बड़े सत्ता परिवर्तन की ओर इशारा कर रहा है।
चुनावी समीकरणों में बड़ा उलटफेर
मतदान प्रतिशत में हुई भारी बढ़ोतरी के बाद सट्टा बाजार के दांव तेजी से बदले हैं। जहाँ चुनाव की शुरुआत में तृणमूल कांग्रेस (TMC) को बहुमत का दावेदार माना जा रहा था, वहीं अब रुझान भाजपा के पक्ष में झुकते दिख रहे हैं।
- सीटों का अनुमान: ताजा अनुमानों के मुताबिक, भाजपा को 150-152 सीटें मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
- टीएमसी की स्थिति: वहीं ममता बनर्जी की पार्टी 137-140 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है। गौरतलब है कि कुछ समय पहले तक भाजपा के लिए यहाँ केवल 100 सीटों का ही अनुमान था।
■ भवानीपुर सीट पर फंसी मुख्यमंत्री की साख?
सबसे चौंकाने वाला दावा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अपनी पारंपरिक सीट भवानीपुर को लेकर किया गया है।
- सुवेंदु का प्रभाव: सट्टा बाजार के अनुसार, भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ ममता की स्थिति कमजोर बनी हुई है।
- रेट का खेल: बाजार में ममता का ‘रेट’ 20-25 पैसे से बढ़कर 50 पैसे हो गया है। सट्टा बाजार की भाषा में रेट का बढ़ना जीत की संभावनाओं के कम होने का संकेत माना जाता है।
■ क्या वाकई सटीक होते हैं सट्टा बाजार के अनुमान?
जोधपुर के पास स्थित फलोदी का यह नेटवर्क भले ही देशभर में चर्चा बटोरता हो, लेकिन इसकी अपनी सीमाएं हैं:
- अवैध और अनौपचारिक: भारत में पब्लिक गैंबलिंग एक्ट 1867 के तहत सट्टेबाजी पूरी तरह गैर-कानूनी है।
- जोखिम और विश्वसनीयता: ये आंकड़े केवल गुप्त सूचनाओं और दांव लगाने वालों की धारणा पर आधारित होते हैं। कई बार इनके अनुमान धरातल पर गलत भी साबित हुए हैं, इसलिए इन्हें सटीक चुनावी परिणाम मानना भूल हो सकती है।
नोट: भारत में सट्टेबाजी पूरी तरह अवैध है। ये आंकड़े केवल बाजार के अनुमानों पर आधारित हैं और इनकी सटीकता की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं होती। असली चुनावी नतीजे 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे।



