Thursday - 21 October 2021 - 2:10 AM

‘खाकी’ और ‘खादी’ दोनों ने खराब की योगी सरकार की छवि

जुबिली स्पेशल डेस्क

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अगले साल चुनाव होना है। जैसे-जैसे चुनाव करीब आ रहा है वैसे-वैसे यूपी में क्राइम की घटनाओं ने अचानक से रफ्तार पकड़ ली है।

चुनाव में अब केवल चार महीने का वक्त ही बचा हैं। ऐसे में बीजेपी ने दोबारा सत्ता में वापसी के लिए नई रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया। इसी के तहत उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार ने हाल में दूसरी बार कैबिनेट का विस्तार किया।

मंत्रिमंडल विस्तार में सरकार ने अगले साल के शुरू में होने वाले चुनाव का पूरा ध्यान रखा गया। मंत्रिमंडल के नये चेहरे जातीय गणित के हिसाब से तय किये गए थे। योगी ने अपने कुनबे में समाज की सभी बिरादरियों को प्रतिनिधित्व दिया।

योगी सरकार की सोशल इंजीनियरिंग में ब्राह्मण, दलित, ओबीसी और आदिवासी को मंत्री बनाकर सभी को खुश करने की कोशिश की गई है।

यहां तक सबकुछ सही चल रहा था। बीजेपी जो भी कदम उठा रही है वो सही साबित होता नजर आ रहा था लेकिन अब पूरी तरह से यूपी का सियासी गणित बीजेपी के लिए नई परेशानी बनता जा रहा है। खाकी की नाकामी और हाल में कुछ ऐसी घटनाये मौजूदा सरकार की नींद उड़ाने के लिए काफी है।

गोरखपुर में व्यापारी मनीष गुप्ता की मौत का मामला अभी ठंडा ही पड़ा था अचानक से यूपी में कुछ और हत्याकांड ने योगी सरकार को टेंशन में ला दिया।

अभी इससे बाहर निकल पाती उससे पहले ही लखीमपुर खीरी कांड ने यूपी की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठा दिया है। बता दें कि उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में हिंसा के दौरान चार किसानों, तीन बीजेपी कार्यकर्ताओं और एक पत्रकार की मौत का मामला लगातार सुर्खियों में है।

मामला अब इतना आगे जा चुका है योगी सरकार के लिए लखीमपुरखीरी कांड गले की हड्डी बन गया है। आलम तो यह है कि मामले को किसी भी तरह से खत्म करना चाहती है योगी सरकार।

इसी वजह से उसने सारी मांगों को मानना पड़ा है। लखीमपुर खीरी में हिंसा के बाद पूरा यूपी इस वक्त राजनीतिक दंगल में बदलता नजर आ रहा है।

विपक्षी नेता किसी भी तरह से लखीमपुर जाकर किसानों से मिलने की कोशिशों में जुटे हुए है। दरअसल यूपी में अगले साल चुनाव है।

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ऐसे में पूरा विपक्ष लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा के मामले को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इन सब घटनाओं में खाकी की नाकामी किसी से छूपी नहीं है। यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है।

वरिष्ठ पत्रकार नितिन गोपाल कहते हैं कि हालिया घटना योगी सरकार का खेल बिगाड़ सकती है। उन्होंने कहा कि कहा इन घटनाओं से योगी आदित्यनाथ की सख्त प्रशासक की छवि को भारी चोट पहुंची है। यूपी पुलिस की लापारवाही सरकार के लिए कही न कही परेशानी खड़ी कर रहा है। वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि लखीमपुर खीरी में जो हुआ वो पूरी तरह से प्रशासन की नाकामी को दिखाता है।

उन्होंने कहा कि पुलिस के पास पर्याप्त कार्यबल होना चाहिए था जो इस तरह के कार्यक्रम में स्थिति में स्थिति पर नियंत्रण कर सके। इस तरह की घटना सरकार की छवि खराब करने का काम करते हैं। वो भी तब जब चुनाव में कुछ महीनों का वक्त बचा हो।

हालांकि पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सुधीर शर्मा कहते हैं कि हर मामलों में पुलिस को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। हां ये बात सच है कि हाल के दिनों में अपराधिक घटनाओं ने तेजी जरूर पकड़ी है लेकिन खाकी को लेकर जो सवाल उठ रहे हैं वो जायज नहीं है। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था को मजबूत करना पुलिस की जिम्मेदारी है।

सुधीर शर्मा ने कहा कि मनीष गुप्ता हत्याकांड के मामले में आरोपी पुलिसकर्मियों पर सख्त एक्शन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग खाकी को बदनाम करते हैं।

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सीएम ने आरोपी पुलिसकर्मियों को लेकर जो एक्शन लिया है, उसकी जितनी भी तारीफ की जाये वो कम है। हालांकि उन्होंने लखीमपुर कांड को लेकर कहा कि यह मामला पूरी तरह से राजनीतिक लग रहा है। हालांकि पुलिस के रवैया पर सवाल जरूर उठ रहा है लेकिन इस मामले में पुलिस तेजी से बड़े कदम उठा रही है।

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