ऑस्कर्स का बड़ा ऐलान: 2027 से बदल जाएगा फिल्मों का भविष्य, भारत की चांदी!

एकेडमी अवॉर्ड्स यानी ऑस्कर्स ने अपने 100 साल पूरे करने से ठीक पहले इतिहास का सबसे बड़ा यू-टर्न लिया है। 2027 में होने वाले 99वें एकेडमी अवॉर्ड्स के लिए जो नए नियम आए हैं, वे न सिर्फ कलाकारों के हक में हैं, बल्कि एआई (AI) के बढ़ते दखल पर भी लगाम लगाते हैं। 14 मार्च 2027 को होने वाले इस भव्य समारोह में भारत के लिए भी एक बड़ी खुशखबरी छिपी है।

सिनेमा की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच ऑस्कर्स ने एक कड़ा रुख अपनाया है। अब एआई से प्रभावित राइटिंग या डिजिटल रूप से निर्मित एक्टर्स (AI Influenced Performances) को अवॉर्ड की रेस से बाहर कर दिया गया है। एकेडमी का मानना है कि सम्मान कलाकार की मेहनत और भावनाओं को मिलना चाहिए, न कि किसी कंप्यूटर प्रोग्राम को। यह नियम लेखकों और असली कलाकारों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

अब तक किसी एक कैटेगरी में एक एक्टर केवल एक ही फिल्म के लिए नॉमिनेट हो सकता था। लेकिन नए नियमों के मुताबिक, अगर किसी एक्टर ने एक ही साल में दो अलग-अलग फिल्मों में ‘मास्टरक्लास’ परफॉर्मेंस दी है और उसे वोट्स मिलते हैं, तो वह एक ही कैटेगरी में दो बार नॉमिनेट हो सकेगा। यह उन टैलेंटेड एक्टर्स के लिए वरदान है जिनकी एक से ज्यादा फिल्में हिट रहती थीं पर नियम की वजह से एक फिल्म पिछड़ जाती थी।

सबसे दिलचस्प बदलाव ‘बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म’ कैटेगरी में हुआ है। अब कोई भी देश (जैसे भारत) अपनी ऑफिशियल कमेटी के जरिए दो फिल्मों को सबमिशन के लिए भेज सकता है। पहले यह सीमा सिर्फ एक फिल्म तक सीमित थी।

भारत को क्या फायदा? भारत में अक्सर ऑस्कर एंट्री को लेकर विवाद रहता है कि ‘आरआरआर’ जाए या ‘द कश्मीर फाइल्स’, या कोई क्षेत्रीय फिल्म। अब भारत के पास मौका होगा कि वह अपनी दो सबसे बेहतरीन फिल्मों को ऑस्कर की रेस में भेजकर जीत की संभावना को दोगुना कर सके।

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