बंगाल एग्जिट पोल 2026: क्या फिर दोहराया जाएगा 2021 का इतिहास? आंकड़ों और असलियत के बीच का बड़ा फर्क

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की 294 सीटों पर चुनाव संपन्न होने के बाद एग्जिट पोल के जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, वे भाजपा के लिए बड़ी खुशखबरी लेकर आए हैं। पी-मार्क (P-MARQ) के सर्वे में भाजपा को 150-175 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है, जो बहुमत के आंकड़े (148) से कहीं अधिक है। वहीं, 15 साल से सत्ता पर काबिज ममता बनर्जी की टीएमसी को 118-138 सीटों के साथ पिछड़ता हुआ दिखाया जा रहा है।
2021 का सबक: जब ‘कमल’ खिलने का दावा हुआ था हवा
एग्जिट पोल के इन दावों के बीच 2021 के चुनाव परिणाम एक बड़ी चेतावनी की तरह सामने खड़े हैं। उस समय भी लगभग सभी सर्वे यह कह रहे थे कि बंगाल में भाजपा सत्ता की चाबी हासिल कर सकती है।
- जमीनी हकीकत से दूरी: 2021 में सर्वे एजेंसियां ग्रामीण मतदाताओं, महिला वोटरों के मौन समर्थन और स्थानीय मुद्दों की गहराई को समझने में नाकाम रही थीं।
- नतीजों ने चौंकाया: जब असली नतीजे आए, तो ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी ने भारी बहुमत के साथ वापसी की और भाजपा अनुमानों से काफी पीछे रह गई।
असम और दक्षिण के राज्यों में क्या है मिजाज?
बंगाल में जहां अनिश्चितता बनी हुई है, वहीं अन्य राज्यों में एग्जिट पोल का ट्रैक रिकॉर्ड बेहतर रहा है:
- असम: 2021 में यहां के अधिकांश सर्वे सटीक रहे थे और इस बार भी भाजपा की मजबूत वापसी के संकेत मिल रहे हैं।
- केरल और तमिलनाडु: इन राज्यों में भी पिछले चुनावों के दौरान सर्वे ने सत्ता परिवर्तन और निरंतरता की दिशा को सही तरीके से पकड़ा था।
- पुडुचेरी: छोटे राज्य होने के कारण यहां समीकरण सीमित होते हैं, जिससे एग्जिट पोल के आंकड़े अक्सर नतीजों के करीब पाए गए हैं।
2026 की चुनौती: क्या ‘साइलेंट वोटर’ फिर पलटेंगे पासा?
एग्जिट पोल एक संकेत जरूर देते हैं, लेकिन बंगाल जैसे राज्य में, जहां चुनावी समीकरण बेहद जटिल हैं, वहां अंतिम नतीजों तक कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। क्या पी-मार्क का अनुमान हकीकत बनेगा या टीएमसी एक बार फिर सर्वेक्षकों को गलत साबित करेगी, इसका फैसला आधिकारिक नतीजों के दिन ही होगा।


