मशहद में सुपुर्द-ए-खाक हुए अयातुल्ला खामेनेई; सड़कों पर उमड़ा ‘काला समंदर’, लेकिन अंतिम संस्कार से गायब रहे नए सर्वोच्च नेता!

ईरान के इतिहास का एक सबसे लंबा, तनावपूर्ण और ऐतिहासिक अध्याय गुरुवार को हमेशा के लिए बंद हो गया। इसी साल 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के विनाशकारी हवाई हमले में मारे गए ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को उनके जन्मस्थान मशहद में स्थित पवित्र इमाम रजा की दरगाह (श्राइन) के परिसर में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।

यह अंतिम विदाई एक हफ्ते तक ईरान और इराक के अलग-अलग पवित्र शिया शहरों (तेहरान, कौम, नजफ और कर्बला) में चले लंबे जनाजा जुलूसों और शोक सभाओं के बाद संपन्न हुई। हालांकि, इस ऐतिहासिक विदाई के पीछे कई गहरे सवाल और रहस्य भी छोड़ गए हैं। आइए इस खबर को एक नए और विस्तृत नजरिए से समझते हैं:

अयातुल्ला खामेनेई का जन्म मशहद में ही हुआ था और उन्होंने अपनी शुरुआती धार्मिक शिक्षा भी इसी पावन धरती पर ली थी। नौवीं शताब्दी में बने इमाम रजा के इस मकबरे को शिया मुसलमानों के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है, जहां हर साल करोड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं। खामेनेई को इसी परिसर में बने एक विशेष मकबरे में दफनाया गया, जो उनके धार्मिक और राजनीतिक सफर के अंत का प्रतीक है।

गुरुवार सुबह जब अली खामेनेई और उनके परिवार के चार अन्य सदस्यों के ताबूतों को इराक से विमान के जरिए मशहद लाया गया, तो पूरा शहर थम गया।

  • काले कपड़ों में जनसैलाब: एक विशेष ट्रक पर रखे गए ताबूतों के पीछे काले कपड़े पहने लाखों शोकाकुल लोग चल रहे थे।
  • बदले और क्रांति के पोस्टर: भीड़ के हाथों में ईरानी झंडे, खामेनेई की तस्वीरें और “हमें उठ खड़ा होना होगा” जैसे सरकारी संदेशों वाले लाल बैनर लहरा रहे थे।
  • ट्रंप-नेतन्याहू के खिलाफ आक्रोश: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ जनता का भारी गुस्सा देखने को मिला, और सड़कों पर जमकर नारेबाजी हुई।

इस पूरे अंतिम संस्कार समारोह के दौरान जिस एक बात ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा, वह थी नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई (खामेनेई के बेटे) की अनुपस्थिति।

रहस्यमयी गायब होना: 28 फरवरी को तेहरान में खामेनेई के आवास पर हुए हमले के बाद मोजतबा को तुरंत नया सर्वोच्च नेता घोषित किया गया था। लेकिन उसी हमले में उनके गंभीर रूप से घायल होने की अफवाहें थीं। अपने पिता और परिवार के सदस्यों के अंतिम संस्कार में भी मोजतबा का शामिल न होना और सार्वजनिक रूप से नजर न आना, इन अटकलों को और हवा दे रहा है।

यह पूरा घटनाक्रम उस युद्ध की याद दिलाता है जो चार महीने पहले शुरू हुआ था। 28 फरवरी को ईरान और अमेरिका-इजरायल गठबंधन के बीच छिड़ी जंग के पहले ही दिन एक भीषण हवाई हमले में खामेनेई और उनके परिवार के कई सदस्य मारे गए थे। चार महीने तक चली लंबी धार्मिक रस्मों और भारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच आखिरकार अब जाकर खामेनेई को अंतिम विदाई दी जा सकी है।

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