AC बना मौत का जाल! आखिर क्यों फट रहे हैं एयर कंडीशनर, जानिए चौंकाने वाली वजह

नई दिल्ली। देशभर में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच एयर कंडीशनर (AC) अब जरूरत बन चुका है। लेकिन बढ़ते इस्तेमाल के साथ एसी ब्लास्ट, शॉर्ट सर्किट और आग लगने की घटनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। हाल ही में लखनऊ के अलीगंज स्थित एक कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग ने पूरे देश को झकझोर दिया, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई। शुरुआती जांच में आग एसी डक्ट से शुरू होने की आशंका जताई गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती गर्मी, लगातार उपयोग और खराब रखरखाव के कारण एसी कई बार आग का कारण बन जाता है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि आखिर एसी में आग क्यों लगती है और इससे बचाव कैसे किया जा सकता है।
भारत में रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ा एसी का इस्तेमाल
देश में गर्मी के बढ़ते प्रकोप के साथ एयर कंडीशनर की बिक्री भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। उद्योग रिपोर्टों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025 में भारत में करीब 1.25 करोड़ रूम एसी यूनिट्स की बिक्री हुई। आने वाले वर्षों में यह संख्या और तेजी से बढ़ने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे एसी का उपयोग बढ़ेगा, वैसे-वैसे इलेक्ट्रिकल सुरक्षा और रखरखाव की अहमियत भी बढ़ती जाएगी।
क्यों फटता है एसी? जानिए बड़े कारण
1. कंप्रेसर का ओवरहीट होना
लगातार कई घंटों तक एसी चलाने से कंप्रेसर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। अत्यधिक गर्मी में कंप्रेसर ओवरहीट होकर खराब हो सकता है और आग लगने का खतरा बढ़ जाता है।
2. गंदी कंडेनसर कॉइल
जब आउटडोर यूनिट की कॉइल पर धूल जमा हो जाती है तो गर्मी बाहर नहीं निकल पाती। इससे सिस्टम का तापमान बढ़ जाता है।
3. खराब वायरिंग और शॉर्ट सर्किट
पुरानी या कमजोर वायरिंग पर हाई पावर एसी चलाने से शॉर्ट सर्किट की संभावना बढ़ जाती है। यह आग लगने की सबसे आम वजहों में से एक है।
4. रेफ्रिजरेंट गैस लीकेज
गैस लीक होने की स्थिति में स्पार्किंग होने पर आग लग सकती है। इसलिए समय-समय पर गैस और पाइपलाइन की जांच जरूरी है।
5. वोल्टेज फ्लक्चुएशन
बार-बार बिजली का वोल्टेज ऊपर-नीचे होने से एसी के इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स प्रभावित होते हैं और आग लगने का खतरा बढ़ जाता है।
लोगों की ये गलतियां बनती हैं हादसे की वजह
- कई सालों तक एसी की सर्विस नहीं कराना।
- लोकल तकनीशियन से सस्ते या नकली पार्ट्स लगवाना।
- बिना स्टेबलाइजर के एसी चलाना।
- कम क्षमता वाली वायरिंग पर हाई टन का एसी लगाना।
- एसी को लगातार 10-12 घंटे तक बिना ब्रेक चलाना।
- आउटडोर यूनिट को बंद और गर्म जगह पर लगाना।
आग से ज्यादा खतरनाक होता है धुआं
फायर विशेषज्ञों के अनुसार एसी से जुड़े अधिकांश हादसों में मौतें सीधे आग से नहीं बल्कि जहरीले धुएं के कारण होती हैं।
जब प्लास्टिक, वायरिंग और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जलते हैं तो कार्बन मोनोऑक्साइड समेत कई जहरीली गैसें निकलती हैं। बंद कमरों और खराब वेंटिलेशन वाली इमारतों में यह धुआं कुछ ही मिनटों में जानलेवा साबित हो सकता है।
AC Blast से बचने के लिए अपनाएं ये उपाय
✔ हर साल नियमित सर्विस कराएं
अधिकृत सर्विस सेंटर से एसी की समय-समय पर जांच और सफाई कराएं।
✔ अच्छी गुणवत्ता की वायरिंग लगवाएं
एसी के लिए अलग सर्किट और उचित क्षमता की वायरिंग का इस्तेमाल करें।
✔ स्टेबलाइजर और MCB जरूर लगाएं
वोल्टेज फ्लक्चुएशन से सुरक्षा के लिए स्टेबलाइजर और मिनिएचर सर्किट ब्रेकर (MCB) का उपयोग करें।
✔ आउटडोर यूनिट को खुली जगह रखें
आउटडोर यूनिट के आसपास पर्याप्त वेंटिलेशन होना चाहिए।
✔ जलने की गंध या आवाज को नजरअंदाज न करें
यदि एसी से जलने की गंध, स्पार्किंग या असामान्य आवाज आए तो तुरंत उसे बंद कर तकनीकी जांच कराएं।
बढ़ती गर्मी के साथ बढ़ रही चुनौती
देश में बढ़ती गर्मी और एसी के बढ़ते इस्तेमाल के बीच सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित मेंटेनेंस, सुरक्षित इंस्टॉलेशन और समय रहते तकनीकी खामियों की पहचान करके अधिकांश हादसों को रोका जा सकता है। लखनऊ जैसे हादसे इस बात की याद दिलाते हैं कि छोटी लापरवाही भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है।



