20 जुलाई से संसद में महासंग्राम! सामने आई मोदी सरकार के 5 गुप्त बिलों की लिस्ट

  • सीक्रेट एजेंडा: लिस्ट में नाम नहीं, फिर भी ‘परिसीमन’ और ‘एक देश एक चुनाव’ को लेकर विपक्ष में भारी डर।
  • 5 नए और 2 पुराने बिल: इनकम टैक्स से लेकर सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या बदलने तक, बड़े संशोधनों की तैयारी।
  • राजनाथ सिंह के घर हाई-लेवल मीटिंग: आज सुबह 11 बजे ‘ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स’ की बैठक में तैयार हुआ सरकार का चक्रव्यूह।

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में इस वक्त सियासी पारा अपने चरम पर है। 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र (Monsoon Session 2026) से पहले सरकार और विपक्ष दोनों ने एक-दूसरे को घेरने के लिए तलवारें खींच ली हैं।

एक तरफ जहां विपक्ष नीट (NEET) पेपर लीक, बेतहाशा महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर मोदी सरकार को बैकफुट पर धकेलने का प्लान बना रहा है, वहीं दूसरी तरफ सरकार ने संसद में कई चौंकाने वाले विधेयकों को पास कराने की पूरी बिसात बिछा दी है।

इसी सिलसिले में आज रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर ‘ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स’ की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है, जिसमें संसद के भीतर विपक्ष के हर वार का जवाब देने और रणनीतिक समन्वय पर अंतिम मुहर लगेगी।

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, सरकार इस मानसून सत्र में 5 नए और 2 पुराने बिल पेश करने पर विचार कर रही है। हालांकि, आधिकारिक लिस्ट में नाम न होने के बावजूद विपक्षी खेमे में सबसे ज्यादा हड़कंप ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ और ‘परिसीमन (Delimitation) बिल’ को लेकर मचा हुआ है।

विपक्ष को अंदेशा है कि सरकार ऐन वक्त पर इन दोनों ऐतिहासिक विधेयकों को सदन के पटल पर रख सकती है। कांग्रेस ने पहले ही साफ कर दिया है कि अगर सरकार परिसीमन बिल लेकर आती है, तो वह संसद से लेकर सड़क तक इसका पुरजोर विरोध करेगी।

सरकार इस सत्र में अध्यादेशों को कानून में बदलने और नए सुधारों के लिए निम्नलिखित विधेयकों को लोकसभा में पेश कर सकती है:

  1. इनकम-टैक्स (संशोधन) बिल, 2026: (अध्यादेश की जगह लेने के लिए)
  2. सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन बिल, 2026: इसके जरिए शीर्ष अदालत में जजों की संख्या में बदलाव हो सकता है।
  3. जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) बिल, 2026
  4. राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) बिल, 2026
  5. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (MSME) संशोधन बिल, 2026

इसके अलावा, 25 मार्च 2026 को पेश हुआ विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन बिल और संयुक्त समिति को भेजा गया विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल, 2025 भी इस सत्र के मुख्य एजेंडे में शामिल हैं।

सरकार की इस घेराबंदी के खिलाफ कांग्रेस ने भी अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। सत्र की शुरुआत से ठीक एक दिन पहले, यानी 19 जुलाई को देश के सभी प्रमुख विपक्षी दलों की एक महा-बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में सरकार के बिलों को रोकने और फ्लोर मैनेजमेंट को लेकर संयुक्त रणनीति बनाई जाएगी। कुल मिलाकर, 20 जुलाई से शुरू हो रहा यह मानसून सत्र हाल के वर्षों का सबसे हंगामेदार सत्र साबित होने जा रहा है।

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