‘NTA में 34 पद, तो 47 पर एक्शन कैसे?’: NEET पेपर लीक पर गौरव गोगोई का संसद में हमला

पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक 2026 पर चर्चा के दौरान लोकसभा में कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला। गोगोई ने आरोप लगाया कि सरकार का यह संशोधन विधेयक महज ‘आंखों में धूल झोंकने’ जैसा प्रयास है और परीक्षा प्रणाली में वास्तविक सुधार करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है।

संसद में बोलते हुए गोगोई ने NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) की कार्रवाई के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा, “सरकार कह रही है कि उसने NTA के 47 लोगों को बदला है। लेकिन जब NTA में कुल स्वीकृत पद ही 34 हैं और उनमें से भी 10-12 पद खाली हैं, तो 47 अधिकारियों पर कार्रवाई का दावा किस आधार पर किया जा रहा है?”

गौरव गोगोई ने सरकार की नीतियों और दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि 2024 में कड़ा कानून लाने के बावजूद 2026 में फिर से पेपर लीक की घटनाएं सामने आईं।

  • आरोपियों को बेल: 2024 नीट पेपर लीक मामले के 46 आरोपियों में से 44 को जमानत मिल चुकी है। मुख्य आरोपी 11 महीने तक फरार रहने के बाद पकड़ा गया और उसे भी बेल मिल गई।
  • चेयरमैन पर मेहरबानी क्यों?: NTA के महानिदेशक (DG) को तो हटा दिया गया, लेकिन चेयरमैन को पद पर बनाए रखा गया है, जबकि उनके पिछले कार्यकालों पर भी अनियमितताओं के आरोप लग चुके हैं।
  • प्रधान सिर्फ एक मुखौटा: गोगोई ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा केवल एक औपचारिकता है। राहुल गांधी के बयान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग में असली समस्या विचारधारा की है, केवल चेहरे बदलने से सुधार नहीं होगा।
  1. आंकड़ों में झोल: NTA में 34 स्वीकृत पदों के मुकाबले 47 अफसरों पर कार्रवाई का दावा सरकारी तंत्र के खोखलेपन को उजागर करता है।
  2. छात्रों पर अत्याचार का आरोप: आंदोलनकारी छात्रों और छात्राओं पर पुलिसिया लाठीचार्ज, थप्पड़ और पैलेट गन के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए गोगोई ने गृह मंत्री से जवाब मांगा।
  3. वसीम बरेलवी का शेर: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे युवाओं के जज्बे को सलाम करते हुए उन्होंने पंक्तियां पढ़ीं—”उसूलों पर आंच आए तो टकराना जरूरी है,जिंदा हो तो जिंदा नजर आना जरूरी है।”
  4. राधाकृष्णन समिति की रिपोर्ट: दो साल पहले बनी उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों का क्या हुआ और अगर समिति सफल थी तो दोबारा पेपर लीक कैसे हुआ?
  5. असम बाढ़ के लिए पैकेज: गोगोई ने असम में बाढ़ से हुई 70 लोगों की मौत का मुद्दा उठाते हुए पीड़ित राज्य के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की मांग भी रखी।

गोगोई ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि यह संशोधन विधेयक युवाओं के बढ़ते आक्रोश और छात्र आंदोलन को दबाने में नाकाम रहने के बाद लाया गया एक दिखावा है। उन्होंने कहा कि 21 से ज्यादा बच्चों की आत्महत्या सरकार की नीतियों का कड़वा सच है और यह नया कानून सरकार की प्रशासनिक विफलता का जीता-जागता स्मारक है।

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