TMC में महासंग्राम: “बागी लौटें, मैं 1 घंटे में इस्तीफा दे दूंगा”, अभिषेक बनर्जी का खुला चैलेंज

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी शिकस्त के बाद पार्टी के भीतर छिड़ा गृहयुद्ध अब चरम पर पहुंच गया है।

हर तरफ से बागियों के निशाने पर चल रहे टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने शनिवार को फ्रंटफुट पर आकर एक बड़ा दांव खेला है।

उन्होंने बागी नेताओं को खुली चुनौती देते हुए कहा है कि अगर पार्टी टूटने और ममता बनर्जी से दूरी बनाने की वजह वह खुद हैं, तो कोई भी एक बागी नेता वापस लौट आए, वह महज एक घंटे के भीतर अपने पद से इस्तीफा दे देंगे।

विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में मची भगदड़ थमने का नाम नहीं ले रही है। पार्टी के 20 सांसद (जिनमें काकोली घोष दस्तीदार और सुदीप बनर्जी जैसे बड़े नाम शामिल हैं) केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात के बाद NCPI का दामन थाम चुके हैं।

दूसरी ओर, उलुबेरिया ईस्ट के विधायक ऋतब्रत बनर्जी और एंटाली के विधायक संदीपन साहा ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए खुद को ‘असली तृणमूल’ घोषित कर दिया है।

उन्होंने ‘न्यू तृणमूल ब्लॉक’ का गठन किया है, जिसे विधानसभा अध्यक्ष ने हरी झंडी देते हुए ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष का दर्जा भी सौंप दिया है।

ममता बनर्जी का साथ छोड़कर ऋतब्रत गुट या NCPI में जाने वाले तमाम नेताओं में एक बात पूरी तरह समान (Common) रही है, सभी के निशाने पर अकेले अभिषेक बनर्जी हैं।

दल बदलने से पहले लगभग हर नेता ने हार का ठीकरा अभिषेक और चुनावी रणनीति बनाने वाली एजेंसी AIPAC के सिर फोड़ा। किसी ने अभिषेक के ‘घमंड’ को वजह बताया तो किसी ने आरोप लगाया कि उनके कारण पुराने नेता सुप्रीमो ममता बनर्जी से मिल तक नहीं पा रहे थे।

लंबे समय से हो रहे इन एकतरफा हमलों पर पलटवार करते हुए शनिवार को अभिषेक बनर्जी का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने कहा-“मैं उन लोगों से कह रहा हूं जिन्हें मुझसे दिक्कत है और जो हार के लिए मुझे जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

याद रखिए, जब टीम जीतती थी, तब भी जिम्मेदारी मेरी ही होती थी। जनता बेवकूफ नहीं है। आज 18 तारीख है, तुम 19 को आओ, 20 को आओ या आज ही आ जाओ। कोई एक वापस आ जाए, मैं 1 घंटे में इस्तीफा दे दूंगा।”

अभिषेक ने सीधा हमला बोलते हुए आगे कहा कि असल में कोई वापस नहीं आने वाला है। वहां (विपक्षी खेमे में) जाने की डील ही यही है कि ‘अभिषेक बनर्जी को गाली दो और जिंदा रहो’, ताकि ED और CBI की आंच उन तक न पहुंचे।

आमतला में टीएमसी के पार्टी दफ्तर को बुलडोजर से गिराए जाने की कार्रवाई पर भी अभिषेक बनर्जी ने तीखा रुख अपनाया।

उन्होंने न्यूटन के नियम का हवाला देते हुए चेताया कि “हर एक्शन का बराबर और विपरीत रिएक्शन होता है।” बीजेपी नेताओं को आगाह करते हुए उन्होंने कहा कि अगर वे 2031 में दोबारा सत्ता में लौटे, तो इसी तरह मुकदमों और कानूनी कार्रवाइयों के जरिए बराबर का जवाब दिया जाएगा।

भले ही चुनाव में करारी हार के बाद पार्टी का एक बड़ा धड़ा अभिषेक बनर्जी के खिलाफ लामबंद है, लेकिन टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने साफ कर दिया है कि वह अपने भतीजे और राष्ट्रीय महासचिव के साथ मजबूती से खड़ी हैं।

यही वजह है कि बागी गुट अब सीधे ममता बनर्जी को भी आड़े हाथों ले रहा है। ऐसे में शनिवार दोपहर को आया अभिषेक बनर्जी का यह ‘इस्तीफा चैलेंज’ बंगाल की राजनीति में एक नया भूचाल लेकर आया है।

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