इजराइल क्यों भेजे जा रहे दर्जनों अमेरिकी रिफ्यूलिंग विमान?

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब चरम पर पहुंच चुका है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ एक ‘मेगा स्ट्राइक’ की तैयारी में है। इस सैन्य रणनीति के तहत अमेरिका, इजराइल में दर्जनों अतिरिक्त एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग (हवा में ईंधन भरने वाले) विमान तैनात करने जा रहा है।

इस बड़ी तैनाती का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी और इजराइली लंबी दूरी के लड़ाकू विमानों और भारी बॉम्बर्स को बिना रुके लगातार मिशन चलाने की सुविधा देना है। हालांकि, अमेरिका के इस कदम ने इजराइल के भीतर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।

फिलहाल इजराइल में लगभग 60 अमेरिकी रिफ्यूलिंग विमान पहले से ही तैनात हैं। इनमें से 30 विमान तेल अवीव के ‘बेन गुरियन इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ पर और बाकी 30 दक्षिणी इजराइल के ‘रेमन एयरपोर्ट’ पर मौजूद हैं। पेंटागन अब इस बेड़े को और बड़ा करना चाहता है।

सुरक्षा का कारण: पेंटागन इन नए विमानों को बेन गुरियन एयरपोर्ट पर ही रखना चाहता है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के अनुसार, क्षेत्र के अन्य एयरबेस पर ईरान के मिसाइल या आत्मघाती ड्रोन हमलों का खतरा बहुत ज्यादा है, जबकि बेन गुरियन अपेक्षाकृत सुरक्षित है।

व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में हुई एक हाई-लेवल मीटिंग में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान पर हमले के कई नए सैन्य विकल्प सौंपे गए हैं। अमेरिका का मकसद ईरान को झुकाना, होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खुलवाना और उसे अमेरिकी परमाणु शर्तों को मानने के लिए मजबूर करना है।

ट्रंप प्रशासन के राडार पर ईरान के ये 3 बड़े ठिकाने हैं…

  • पावर ग्रिड और बुनियादी ढांचा: ईरान के प्रमुख बिजली संयंत्रों (Power Plants) पर बमबारी करके देश को ब्लैकआउट करना।
  • यूरेनियम भंडार (Nuclear Sites): ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार और परमाणु ठिकानों को तबाह करना।
  • पिकएक्स माउंटेन (Pickaxe Mountain): इस पहाड़ी इलाके में ईरान एक संदिग्ध भूमिगत परमाणु सुविधा (Underground Nuclear Facility) बना रहा है, जो अमेरिका का सबसे बड़ा टारगेट है।

होर्मुज स्ट्रेट और ईरान के दक्षिणी तट पर अमेरिकी वायुसेना के हमले लगातार सातवें दिन भी जारी रहे।

  • बंदर अब्बास पर चोट: अमेरिका ने ईरान के ‘बंदर अब्बास’ के पास कम से कम सात रणनीतिक पुलों को उड़ा दिया है। यह इलाका इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का मुख्य सप्लाई हब है।
  • अमेरिकी ठिकानों पर पलटवार: जवाब में ईरान ने भी जॉर्डन, कतर, बहरीन, इराक और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर रॉकेट और ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं। हालांकि, IRGC द्वारा सीरिया में जिस अमेरिकी बेस को उड़ाने का दावा किया गया है, उसे अमेरिकी सेना महीनों पहले ही खाली कर चुकी थी।

पेंटागन की यह महा-तैनाती अब इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए गले की हड्डी बन गई है। इजराइल में महज तीन महीने बाद आम चुनाव होने हैं और इस फैसले पर देश की राजनीति गरमा गई है:

  • कमर्शियल उड़ानों पर संकट: गर्मियों की छुट्टियों के कारण बेन गुरियन एयरपोर्ट पर नागरिक उड़ानों का भारी दबाव है। दर्जनों विशालकाय अमेरिकी सैन्य विमानों की पार्किंग की वजह से आम पैसेंजर फ्लाइट्स रद्द होने का खतरा पैदा हो गया है।
  • सरकार में फूट: नेतन्याहू सरकार की परिवहन मंत्री मिरी रेगेव ने मांग की है कि इन अमेरिकी विमानों को बेन गुरियन से तुरंत हटाया जाए।
  • सेना बनाम सरकार: दूसरी ओर, इजराइली रक्षा मंत्रालय और सेना (IDF) सुरक्षा कारणों से विमानों को वहीं रखने के पक्ष में हैं। वाशिंगटन ने भी नेतन्याहू से सहयोग की अपील की है, जिससे पीएम पर दबाव बढ़ गया है।

नेतन्याहू की सख्त चेतावनी: भारी जवाबी कार्रवाई के डर से फिलहाल ईरान ने इजराइल पर सीधे हमले से दूरी बनाई हुई है। इस बीच पीएम नेतन्याहू ने दोटूक कहा है कि अगर ईरान ने इजराइल की तरफ आंख भी उठाई, तो उसे ऐसा विनाशकारी जवाब मिलेगा जो उसने पहले कभी नहीं देखा होगा।

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