Sonam Wangchuk को अस्पताल ले जाने पर सियासी घमासान, विपक्ष बोला- ‘लोकतंत्र पर हमला’

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर पिछले 21 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार को तबीयत बिगड़ने के बाद दिल्ली पुलिस मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले गई। इस कार्रवाई के बाद राजधानी में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना (यूबीटी) समेत कई विपक्षी दलों के नेताओं ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए इसे लोकतंत्र और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर हमला बताया।

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सरकार की कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने लिखा, “यह कैसी गुंडागर्दी चल रही है? मोदी जी, सत्ता का अहंकार लंबे समय तक नहीं चलता। जिस युवा पर लाठी चला रहे हो, वही आपका तख्त उखाड़ेगा।”

उन्होंने आरोप लगाया कि 21 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक की मांगें सुनने के बजाय उन्हें जबरन अस्पताल में भर्ती कराया गया।

समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक को जबरन हटाना सिर्फ एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान पर हमला है।

एक अन्य पोस्ट में उन्होंने लिखा कि जब शांतिपूर्ण आवाजों को दबाया जाता है तो संविधान और लोकतंत्र भी घायल होते हैं। उनके मुताबिक, सोनम वांगचुक जैसे लोगों की आवाज को दबाना देश की आत्मा को दबाने जैसा है।

तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने भी सरकार की कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने इसे “जबरदस्ती वाली सरकारी हिंसा” बताते हुए कहा कि सरकार विरोध की आवाज को दबाने के लिए केवल बल प्रयोग करना जानती है।

शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया पर लिखा कि भारत में लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं के शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन को भी अब बर्दाश्त नहीं किया जा रहा, जो बेहद शर्मनाक है।

दिल्ली पुलिस ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश और मेडिकल विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए उन्हें आवश्यक इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया।

पुलिस के अनुसार, कार्रवाई के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने बाधा डालने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने संयम बरतते हुए पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित तरीके से पूरा किया।

स्थिति को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर जाने वाले कई रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी। साथ ही प्रदर्शनकारियों से अपील की गई कि वे हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन स्थल खाली कर दें।

सोनम वांगचुक कथित NEET परीक्षा में अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ पिछले 21 दिनों से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। लंबे अनशन के कारण उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही थी। डॉक्टरों की सलाह और अदालत के निर्देशों के बाद पुलिस उन्हें अस्पताल लेकर गई। इस कार्रवाई के बाद विपक्ष ने सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का आरोप लगाया, जबकि पुलिस का कहना है कि यह कदम केवल स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाया गया।

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