Ayodhya Ram Mandir: चढ़ावा चोरी के बाद RSS-VHP का डैमेज कंट्रोल, 23 जुलाई को 300 संतों की हाई प्रोफाइल बैठक

अयोध्या: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सियासी मुद्दा बनता जा रहा है। विपक्ष लगातार केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साध रहा है। इसी बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने स्थिति संभालने के लिए सक्रियता बढ़ा दी है।
जानकारी के मुताबिक, 23 जुलाई को अयोध्या में RSS और VHP की करीब 300 साधु-संतों के साथ एक हाई प्रोफाइल बैठक होने जा रही है। इस बैठक को राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद के बाद श्रद्धालुओं का भरोसा बहाल करने और चुनाव से पहले संभावित राजनीतिक नुकसान की भरपाई की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
श्रद्धालुओं का भरोसा मजबूत करने पर रहेगा फोकस
सूत्रों के अनुसार बैठक में राम मंदिर प्रबंधन को लेकर श्रद्धालुओं के बीच पैदा हुई शंकाओं और अविश्वास को दूर करने पर चर्चा होगी। साथ ही मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर भी विचार किया जाएगा।
RSS और VHP का मानना है कि राम मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा विषय है। ऐसे में श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।
300 संत-महंत होंगे शामिल
बताया जा रहा है कि बैठक में विभिन्न अखाड़ों के संत-महंत, मंदिरों के प्रमुख, RSS और VHP के प्रांतीय पदाधिकारी शामिल होंगे। दोनों संगठन संत समाज से संपर्क कर उन्हें बैठक में आमंत्रित कर रहे हैं।
SIT रिपोर्ट पर भी होगी चर्चा
बैठक के दौरान राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की SIT जांच रिपोर्ट और अब तक हुई कार्रवाई की समीक्षा की जाएगी। साथ ही यह रणनीति बनाई जाएगी कि श्रद्धालुओं के बीच फैले भ्रम को कैसे दूर किया जाए और मंदिर प्रबंधन की विश्वसनीयता कैसे मजबूत की जाए।
22 जुलाई को होगी राम जन्मभूमि ट्रस्ट की बैठक
RSS-VHP की बैठक से एक दिन पहले 22 जुलाई को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक प्रस्तावित है। यह बैठक ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के आश्रम में होगी। इसमें मंदिर प्रबंधन और मौजूदा विवाद से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा होने की संभावना है।
ट्रस्ट बैठक के बाद संत समाज की राय और सुझावों के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक अहमियत
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला अब केवल प्रशासनिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है। विपक्ष जहां सरकार को घेरने में जुटा है, वहीं RSS, VHP और अन्य हिंदू संगठन श्रद्धालुओं का विश्वास कायम रखने के लिए सक्रिय हो गए हैं। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले यह घटनाक्रम राजनीतिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



