राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच अमित शाह संभालेंगे यूपी की कमान, अखिलेश की रथ यात्रा को देंगे टक्कर

  • गृहमंत्री अमित शाह ब्रज और बुंदेलखंड से फूंकेंगे चुनावी बिगुल; यूपी के सभी 6 रीजनों का करेंगे तूफानी दौरा।
  • टिकट का नया फॉर्मूला-सिर्फ जीत की गारंटी’, तीन बार चुनाव लड़ चुके दिग्गजों के रिपोर्ट कार्ड पर चलेगी कैंची।
  • अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी विवाद और अखिलेश यादव की ‘रथ यात्रा’ बनी बीजेपी के लिए दोहरी चुनौती।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 की सियासी जंग का काउंटडाउन आधिकारिक रूप से शुरू हो चुका है। लोकसभा चुनाव के झटकों से उबरते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने ‘मिशन 2027’ का एक बेहद गुप्त और अचूक ब्लूप्रिंट तैयार किया है। इस पूरे मिशन की कमान एक बार फिर बीजेपी के चाणक्य कहे जाने वाले गृहमंत्री अमित शाह ने अपने हाथों में ले ली है।

अमित शाह आने वाले दिनों में ब्रज और बुंदेलखंड संभाग से चुनावी शंखनाद करने जा रहे हैं। इस बार शाह का यह दौरा सामान्य नहीं होगा, बल्कि राज्य के सभी 6 रीजनों में सीटवार ‘सर्जरी’ करने के मकसद से हो रहा है, जहाँ टिकट वितरण का एकमात्र पैमाना सिर्फ और सिर्फ ‘जीत की गारंटी’ होगा।

बीजेपी ने उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों को उनके पिछले चुनावी इतिहास के आधार पर चार कड़े हिस्सों में बांट दिया है:

  • Category A: वे सुरक्षित सीटें जहां बीजेपी पिछले तीन चुनावों से लगातार अजेय रही है।
  • Category B: वे सीटें जहां पार्टी पिछले चुनाव में बहुत ही कम मार्जिन से जीत दर्ज कर पाई थी।
  • Category C: वे संवेदनशील सीटें जहां बीजेपी पिछले दो चुनावों से लगातार मामूली अंतर से हार रही है।
  • Category D (सबसे कठिन): यह सपा-कांग्रेस का वो पारंपरिक गढ़ है, जहां बीजेपी के लिए राह बेहद मुश्किल है।

विशेष रूप से उन 61 सीटों पर ‘विशेष ऑपरेशन’ चलाया जा रहा है, जहां पार्टी 2012, 2017 और 2022 में एक बार भी कमल नहीं खिला सकी। इन सीटों पर जातीय समीकरण, बूथ फीडबैक और नए उम्मीदवारों का नए सिरे से सर्वे शुरू हो चुका है।

बीजेपी के आंतरिक सर्वे में यह बात सामने आई है कि साल 2022 के चुनाव में 49 सीटें ऐसी थीं, जहां हार-जीत का अंतर 5,000 वोटों से भी कम था। पार्टी का मानना है कि इन सीटों पर उम्मीदवार बदलकर या संगठन को मजबूत करके पासा पलटा जा सकता है।

सूत्रों के मुताबिक, जो नेता तीन या उससे अधिक बार चुनाव लड़ चुके हैं, उनके बूथ-स्तरीय प्रदर्शन का पूरा कच्चा चिट्ठा खंगाला जा रहा है। शाह का संदेश साफ है: पुराने रिश्ते या पैरवी से टिकट नहीं मिलेगा; अगर जीत की संभावना कम हुई, तो टिकट कटना तय है।

इस महा-अभियान के बीच बीजेपी के सामने दो सबसे बड़े रोड़े हैं:

  1. अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद: राम मंदिर के दान और चढ़ावे में हुई कथित चोरी के मामले ने राजनीतिक और भावनात्मक मोड़ ले लिया है। हालांकि ट्रस्ट ने सीईओ (CEO) पद बनाकर और संगठनात्मक बदलाव कर डैमेज कंट्रोल शुरू कर दिया है, लेकिन विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बना रहा है।
  2. सपा-कांग्रेस का गठबंधन और PDA: समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव जल्द ही ‘रथ यात्रा’ के जरिए जमीन पर उतरने वाले हैं। सपा इस चढ़ावा विवाद को सरकार के खिलाफ एक बड़े प्रशासनिक कलंक के रूप में प्रचारित करने की रणनीति पर काम कर रही है, जबकि कांग्रेस भी जमीन पर अपना आधार मजबूत करने में जुटी है।

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