अपनी कार का फ्यूल कैप खोलकर अभी चेक करें यह कोड! कहीं आप भी तो नहीं डाल रहे गलत पेट्रोल?

Highlights
- रायपुर कोर्ट के फैसले के बाद देश के करोड़ों कार मालिकों में डर; मारुति को नई कार देने या ₹20.50 लाख लौटाने का आदेश।
- 1 अप्रैल 2023 से पहले की कारों पर ‘इंजन डैमेज’ का सबसे बड़ा खतरा; ऐसे चेक करें अपनी गाड़ी की फ्यूल कंपैटिबिलिटी।
- BS4 से लेकर BS6 और एथेनॉल ब्लेंडिंग तक— भारत की इस नई फ्यूल पॉलिसी का पूरा सच, आसान भाषा में।
The E20 Petrol Controversy: एक कोर्ट केस जिसने हिला दी पूरी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री
जुबिली स्पेशल डेस्क
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मारुति ग्रैंड विटारा (Grand Vitara) के इंजन में ‘सफेद दही’ जैसा एथेनॉल जमने और कोर्ट द्वारा मारुति पर ₹21 लाख से ज्यादा का जुर्माना लगाने के बाद, देश में E20 पेट्रोल (20% एथेनॉल मिश्रित ईंधन) को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है।
एक तरफ सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय दावा कर रहे हैं कि E20 पूरी तरह से टेस्टेड है, वहीं दूसरी तरफ आम कार मालिकों के मन में सबसे बड़ा डर यह है- “क्या पेट्रोल पंप पर मिल रहा E20 पेट्रोल मेरी कार का इंजन फूंक देगा?”
अगर आपके पास भी कार है, तो आपको यह जानना बेहद जरूरी है कि आपकी गाड़ी E10 है या E20 कंप्लाइंट, और आप अपनी पुरानी गाड़ी को इस नुकसान से कैसे बचा सकते हैं।
कैसे पहचानें: आपकी कार E10 है या E20 कंप्लाइंट?
अपनी कार की सेहत बचाने के लिए सबसे पहले उसकी ‘फ्यूल कंपैटिबिलिटी’ (E10 या E20) की पहचान करें। इसके 3 सबसे आसान तरीके यहाँ दिए गए हैं:
- फ्यूल कैप पर स्टिकर: अपनी कार का पेट्रोल टैंक खोलें। फ्यूल फिलर कैप (ढक्कन) या उसके ठीक बगल में एक स्टिकर लगा होगा, जिस पर साफ-साफ E10 या E20 लिखा होता है।
- मैन्युफैक्चरिंग डेट (1 अप्रैल 2023 का नियम): केंद्र सरकार के नियम के अनुसार, 1 अप्रैल 2023 के बाद बनी देश की सभी पेट्रोल गाड़ियां अनिवार्य रूप से E20 कंपैटिबल हैं। अगर आपकी कार 2010 से मार्च 2023 के बीच की है, तो वह केवल E10 (10% एथेनॉल) के लिए डिजाइन की गई थी।
- ओनर मैनुअल (Owner Manual): अपनी कार के साथ मिली गाइड बुक या कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर अपने मॉडल का चेसिस नंबर डालकर आसानी से इसका पता लगा सकते हैं।
पुरानी और BS4 कारों को E20 पेट्रोल के नुकसान से कैसे बचाएं?
अगर आपके पास 2023 से पहले की BS4 या शुरुआती BS6 कार है, तो ऑटो एक्सपर्ट टूटू धवन के अनुसार, आपको इन 3 गोल्डन रूल्स का पालन करना चाहिए:
- गाड़ी को लंबे समय तक खड़ा न रखें: एथेनॉल हवा से नमी (पानी) सोखता है। अगर आपकी कार हफ्तों या महीनों खड़ी रहेगी, तो पेट्रोल टैंक में पानी और एथेनॉल अलग हो जाएंगे, जिससे जंग और ‘सफेद दही’ जैसी गाद जमने लगेगी। गाड़ी को नियमित अंतराल पर चलाते रहें।
- फ्यूल सिस्टम एडिटिव्स का इस्तेमाल: पुरानी कारों में E20 के रस्टिंग (जंग) प्रभाव को कम करने के लिए पेट्रोल डलवाते समय अच्छे ब्रांड के फ्यूल सिस्टम एडिटिव (Fuel Additives) का इस्तेमाल करें। यह इंजन और फ्यूल लाइन्स को सुरक्षित रखता है।
- रेगुलर फ्यूल फिल्टर चेंज: अपनी गाड़ी की सर्विसिंग समय पर कराएं और मैकेनिक से कहकर फ्यूल फिल्टर और इंजेक्टर्स की नियमित जांच करवाएं।
E10 vs E20: क्या वाकई माइलेज कम हो जाता है?
हाँ, यह वैज्ञानिक सच है। सरकार और पीआईबी (PIB) के आंकड़ों के मुताबिक, E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहनों के माइलेज में 3% से 5% तक की मामूली गिरावट आ सकती है। हालांकि, इसकी ऑक्टेन रेटिंग बेहतर होती है, जिससे इंजन में नॉकिंग कम होती है और यह पर्यावरण में बहुत कम कार्बन उत्सर्जित करता है।
BS4 से BS6 और 20% एथेनॉल: भारत का ‘ग्रीन फ्यूल’ सफर
भारत में प्रदूषण और कच्चे तेल के भारी आयात बिल को कम करने के लिए यह यात्रा शुरू हुई थी:
[2001: पायलट प्रोजेक्ट] ➔ [2017: BS4 उत्सर्जन मानक] ➔ [2020: सीधे BS6 लागू] ➔ [2022: 10% एथेनॉल (E10) पूरा] ➔ [2025-26: 20% एथेनॉल (E20) का लक्ष्य हासिल]
आज भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जो बड़े पैमाने पर एथेनॉल ब्लेंडिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं। अमेरिका में जहाँ E10 और E15 सामान्य है, वहीं ब्राजील दुनिया में सबसे आगे है, जहाँ E27 (27% एथेनॉल) स्टैंडर्ड ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।



