ईरान के खतरे के बीच सऊदी अरब की बड़ी तैयारी? ताइवान से रिकॉर्ड ड्रोन खरीद पर दुनिया की नजर

ईरान के साथ बढ़ते तनाव और खाड़ी क्षेत्र की बदलती सुरक्षा स्थिति के बीच सऊदी अरब ने ताइवान से रिकॉर्ड संख्या में ड्रोन खरीदे हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब पिछले महीने ताइवान का सबसे बड़ा ड्रोन खरीदार बना और उसने इन ड्रोन के लिए अन्य देशों की तुलना में करीब 10 गुना ज्यादा कीमत चुकाई।

ताइपे के वित्त मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, सऊदी अरब ने करीब 4.72 करोड़ डॉलर के ड्रोन खरीदे। जून 2023 से उपलब्ध आंकड़ों में यह किसी भी देश की ओर से एक महीने में की गई सबसे बड़ी खरीद बताई जा रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब ने करीब 3,260 ड्रोन खरीदे। इनकी औसत कीमत लगभग 14,472 डॉलर प्रति ड्रोन रही, जबकि इसी श्रेणी के ड्रोन अन्य देशों को औसतन करीब 1,464 डॉलर प्रति ड्रोन की कीमत पर निर्यात किए गए।

हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सऊदी अरब इन ड्रोन का इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए करेगा। इनका वजन लगभग 7 से 15 किलोग्राम के बीच बताया गया है और इनका इस्तेमाल औद्योगिक गतिविधियों के साथ-साथ सुरक्षा और सैन्य जरूरतों में भी किया जा सकता है।

सऊदी अरब और ईरान के बीच दशकों से तनाव रहा है। हाल के क्षेत्रीय संघर्षों ने खाड़ी देशों की सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

ईरान और उससे जुड़े गुटों की ओर से ड्रोन और मिसाइल हमलों की घटनाओं के बाद सऊदी अरब समेत कई खाड़ी देशों ने अपनी सुरक्षा रणनीति पर दोबारा ध्यान देना शुरू किया है।

सऊदी अरब लंबे समय से अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भर रहा है। लेकिन क्षेत्रीय संघर्षों के दौरान अमेरिकी सुरक्षा कवच की प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठे हैं।

इसी वजह से सऊदी अरब अपनी रक्षा साझेदारियों में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है। चीन, पाकिस्तान, यूक्रेन और अन्य देशों के साथ उसके रक्षा संबंधों में भी विस्तार देखने को मिला है।

रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व में हुए संघर्षों ने ड्रोन की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बना दिया है। कम लागत में निगरानी और हमले की क्षमता रखने वाले ड्रोन अब आधुनिक युद्ध का अहम हिस्सा बन चुके हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब की ड्रोन खरीद क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों और भविष्य के संभावित खतरों को देखते हुए उसकी रक्षा तैयारियों का हिस्सा हो सकती है।

हालांकि, सऊदी अरब द्वारा खरीदे गए ड्रोन की वास्तविक भूमिका और तैनाती को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि इनका इस्तेमाल केवल निगरानी के लिए होगा या अन्य सुरक्षा अभियानों में भी किया जाएगा।

लेकिन इतनी बड़ी खरीद ने यह संकेत जरूर दिया है कि खाड़ी क्षेत्र में बदलते सुरक्षा समीकरणों के बीच सऊदी अरब अपनी रक्षा क्षमता को मजबूत करने पर जोर दे रहा है।

Related Articles

Back to top button